दक्षिण अफ्रीका में बढ़ते एंटी-इमिग्रेंट प्रदर्शनों और हिंसा की आशंका के बीच घाना ने अपने नागरिकों की वापसी शुरू कर दी है। पहले चरण में सैकड़ों लोग जोहान्सबर्ग से रवाना हुए। घाना सरकार ने लौटने वालों के पुनर्वास और रोजगार सहायता का भरोसा दिया है।
जोहान्सबर्ग: दक्षिण अफ्रीका में हाल के एंटी-इमिग्रेंट प्रदर्शनों और बढ़ती विदेशी विरोधी भावना के बीच घाना सरकार ने अपने नागरिकों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बुधवार सुबह पहला समूह जोहान्सबर्ग से घाना के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों के मुताबिक करीब 800 घाना नागरिकों ने स्वदेश लौटने के लिए पंजीकरण कराया है।
जोहान्सबर्ग के OR टैम्बो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तड़के कई बसों के जरिए लोगों को लाया गया। इनमें पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल थे। कुछ लोगों को पुलिस सुरक्षा के बीच अलग वाहन में एयरपोर्ट लाया गया। सभी यात्रियों का पंजीकरण दूतावास और एयरपोर्ट अधिकारियों की निगरानी में किया गया।
घाना सरकार ने कहा कि शुरुआती चरण में लगभग 300 लोग रवाना हुए हैं, जबकि बाकी नागरिकों की जांच और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें बाद की उड़ानों से भेजा जाएगा।
एंटी-इमिग्रेंट प्रदर्शन से बढ़ा डर
दक्षिण अफ्रीका के कई शहरों में पिछले कुछ हफ्तों से अवैध प्रवास के खिलाफ प्रदर्शन तेज हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बड़ी संख्या में अवैध प्रवासी देश की सार्वजनिक सेवाओं, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
इन प्रदर्शनों के बाद विदेशी नागरिकों में भय का माहौल पैदा हो गया है। कई लोगों को आशंका है कि स्थिति और बिगड़ सकती है तथा देश में एक बार फिर ज़ेनोफोबिक यानी विदेशी विरोधी हिंसा फैल सकती है।
दक्षिण अफ्रीका में पहले भी विदेशी नागरिकों के खिलाफ हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2019 में ऐसे हमलों में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2008 में विदेशी नागरिकों के खिलाफ हिंसा में 62 लोगों की जान चली गई थी।
‘अब यहां सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा’
दक्षिण अफ्रीका छोड़ रहे लोगों में कई ऐसे हैं जो वर्षों से वहां रहकर काम कर रहे थे। घाना के नागरिक रुडोल्फ, जो पिछले 10 वर्षों से दक्षिण अफ्रीका में सैलून चलाते थे, ने कहा कि मौजूदा माहौल में रहना मुश्किल हो गया है।
उन्होंने कहा कि हाल के विरोध प्रदर्शनों के बाद उन्हें और उनके परिवार को असुरक्षा महसूस होने लगी थी। उनके मुताबिक अब अपने देश लौटना ही बेहतर विकल्प है, जहां वे शांति से जीवन जी सकेंगे।
रुडोल्फ ने कहा कि प्रदर्शन पहले डरबन में शुरू हुए थे लेकिन धीरे-धीरे अन्य प्रांतों में भी फैल गए। उन्हें डर है कि 30 जून की समयसीमा के बाद हिंसा और बढ़ सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि वह भविष्य में दोबारा दक्षिण अफ्रीका लौटने की योजना नहीं बना रहे।
‘मार्च एंड मार्च’ समूह की भूमिका
इन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व “March and March” नाम के एक समूह द्वारा किया जा रहा है। यह संगठन खुद को “इमिग्रेशन सुधार के लिए नागरिक आंदोलन” बताता है।
समूह ने सरकार से मांग की है कि अवैध प्रवासियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही इस संगठन ने 30 जून तक अवैध प्रवासियों को देश छोड़ने की चेतावनी भी दी है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान विदेशी समुदायों में डर और अस्थिरता बढ़ा सकते हैं।
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घाना सरकार ने नागरिकों की सुरक्षा को बताया प्राथमिकता
दक्षिण अफ्रीका में घाना के उच्चायुक्त बेंजामिन क्वाशी ने कहा कि उनकी सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा कि कई घाना नागरिकों ने दूतावास से संपर्क कर बताया कि वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और उनका व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने नागरिकों की रक्षा करे, चाहे वे देश के भीतर हों या विदेश में।
क्वाशी ने कहा कि सरकार लौटने वाले लोगों के पुनर्वास की योजना पर भी काम कर रही है ताकि वे घाना में दोबारा अपना रोजगार या व्यवसाय शुरू कर सकें।
अवैध प्रवास पर भी सख्त संदेश
घाना के उच्चायुक्त ने यह भी कहा कि उनकी सरकार अवैध प्रवास को बढ़ावा नहीं देती। उन्होंने माना कि दक्षिण अफ्रीका में रह रहे कुछ घाना नागरिकों के पास वैध दस्तावेज नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि नागरिकों को वापस लाकर सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह किसी भी देश में अवैध रूप से रहने को समर्थन नहीं देती।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बयान दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
दक्षिण अफ्रीका में प्रवास और बेरोजगारी का मुद्दा
दक्षिण अफ्रीका लंबे समय से बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और अपराध जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे माहौल में विदेशी नागरिकों को अक्सर स्थानीय समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में विदेशी कामगार स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसर कम कर रहे हैं और स्वास्थ्य तथा अन्य सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव डाल रहे हैं।
हालांकि मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि आर्थिक समस्याओं का समाधान विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर नहीं किया जा सकता।
स्थानीय चुनावों से जुड़ रही राजनीति
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण अफ्रीका में बढ़ती एंटी-इमिग्रेंट भावना आगामी स्थानीय चुनावों से भी जुड़ी हो सकती है। नवंबर में होने वाले स्थानीय चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल गर्म है और प्रवास का मुद्दा प्रमुख राजनीतिक बहस बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आर्थिक संकट और बढ़ती बेरोजगारी के बीच प्रवास का मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए संवेदनशील चुनावी विषय बन गया है।
सरकार ने हिंसा की निंदा की
इस महीने दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने विदेशियों के खिलाफ अपराध और हिंसा की घटनाओं की निंदा की थी। हालांकि सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि देश को अवैध प्रवास की समस्या से निपटने की जरूरत है।
सरकार का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और सभी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।










