डॉक्टर अशोक जैन: जिन्होंने संसद भवन जैसा सरकारी स्कूल बनाया

डॉक्टर अशोक जैन: जिन्होंने संसद भवन जैसा सरकारी स्कूल बनाया

राजस्थान के जालौर जिले के दादाल गांव में एक सरकारी स्कूल आज ग्रामीण शिक्षा की नई पहचान बन गया है। एनआरआई डॉक्टर अशोक जैन की पहल से पेड़ों के नीचे पढ़ने वाले बच्चों को संसद भवन जैसी आधुनिक स्कूल इमारत, बेहतर कक्षाएं और खेल सुविधाएं मिली हैं।

Dadal Village Government School: राजस्थान के जालौर जिले के दादाल गांव में स्थित एक सरकारी स्कूल बीते कुछ वर्षों में पूरी तरह बदल चुका है। यह बदलाव अमेरिका में रहने वाले एनआरआई डॉक्टर अशोक जैन की पहल से संभव हुआ, जिन्होंने अपने बचपन के स्कूल को नया स्वरूप देने का संकल्प लिया। साल 2023 में गांव के सहयोग और परिवार के साथ शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य ग्रामीण बच्चों को बेहतर शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं और सुरक्षित माहौल देना था, ताकि वे भी शहरों के बच्चों की तरह आगे बढ़ सकें।

पेड़ों की छांव से आधुनिक स्कूल तक

दादाल गांव का सरकारी स्कूल कभी बुनियादी सुविधाओं की कमी का प्रतीक था। पक्के कमरे नहीं थे और बच्चों को पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी। इसी स्कूल में डॉक्टर अशोक जैन ने 1970 के दशक की शुरुआत में अपनी प्राथमिक शिक्षा हासिल की थी। सालों बाद भी उन दिनों की यादें उनके साथ रहीं।

करीब छह साल पहले स्कूल प्रशासन ने जर्जर इमारत की जानकारी देते हुए मदद मांगी। यहीं से बदलाव की शुरुआत हुई। डॉक्टर जैन ने महसूस किया कि सिर्फ मरम्मत नहीं, बल्कि पूरे स्कूल को नए सिरे से खड़ा करने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर माहौल मिल सके।

मां की सीख और करोड़ों का संकल्प

इस बड़े फैसले के पीछे डॉक्टर अशोक जैन की मां की अहम भूमिका रही। जब उन्होंने एक कमरे के निर्माण की बात की, तो मां ने साफ कहा कि अधूरा काम करने से बेहतर है पूरे स्कूल की व्यवस्था की जाए। यही सलाह इस परियोजना की नींव बन गई।

इसके बाद डॉक्टर जैन ने अपने बड़े भाई के साथ मिलकर पूरा स्कूल बनाने का संकल्प लिया। गांव के मलसिंह और उनके परिवार ने तीन बीघा जमीन दान में दी। साल 2023 में निर्माण शुरू हुआ और करीब दो साल में लगभग सात करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक स्कूल तैयार हो गया, जिसकी बनावट संसद भवन से प्रेरित बताई जा रही है।

पढ़ाई के साथ खेल और विकास पर जोर

नए स्कूल को सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रखा गया। यहां बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए खेल सुविधाओं पर भी खास ध्यान दिया गया है। स्कूल परिसर में वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, फुटबॉल, क्रिकेट, कबड्डी और एथलेटिक्स के लिए मैदान बनाए गए हैं।

इसके अलावा स्कूल के सामने एक ओपन जिम भी विकसित किया गया है, ताकि बच्चे शारीरिक रूप से भी मजबूत बन सकें। कक्षाओं में आधुनिक सुविधाएं हैं, जिससे गांव के बच्चों को शहरों जैसे शैक्षणिक माहौल का अनुभव मिल रहा है।

शिक्षा से बदली गांव की तस्वीर

डॉक्टर अशोक जैन मानते हैं कि शिक्षा सबसे बड़ा निवेश है, जो समाज को लंबे समय तक लाभ देता है। उनका कहना है कि गांव के बच्चों को अगर सही संसाधन और माहौल मिल जाए, तो वे किसी से कम नहीं होते। दादाल गांव का यह स्कूल इसी सोच का नतीजा है।

आज यह स्कूल सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा में बदलाव की मिसाल बन चुका है। आसपास के गांवों से भी अभिभावक यहां अपने बच्चों को पढ़ाने की इच्छा जता रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में शिक्षा को लेकर नई उम्मीद जगी है।

Leave a comment