कक्षा 8 की नई NCERT सोशल साइंस किताब में न्यायपालिका की भूमिका और उसकी चुनौतियों, जैसे भ्रष्टाचार और लंबित मामलों, पर स्पष्ट चर्चा की गई है। पुस्तक में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और जिला अदालतों में लंबित मामलों के आंकड़े, जवाबदेही के उपाय और वास्तविक उदाहरण शामिल किए गए हैं, ताकि छात्र न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों को बेहतर समझ सकें।
New NCERT Book: कक्षा 8 के छात्रों के लिए जारी NCERT की नई सोशल साइंस पुस्तक में न्यायपालिका की भूमिका और चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह किताब भारत के न्यायिक सिस्टम में भ्रष्टाचार, लंबित मामलों और जवाबदेही जैसे मुद्दों को समझाने के लिए तैयार की गई है। छात्रों को सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और जिला अदालतों में लंबित मामलों के आंकड़े, चुनावी बॉन्ड और IT Act जैसे उदाहरणों के माध्यम से न्याय की वास्तविक स्थिति दिखाई गई है। इसका उद्देश्य छात्रों में लोकतांत्रिक मूल्यों और न्यायपालिका के कामकाज की समझ बढ़ाना है।
भ्रष्टाचार और जवाबदेही की व्यवस्था
किताब में यह भी बताया गया है कि न्यायपालिका लोकतंत्र का अहम स्तंभ होते हुए भी चुनौतियों का सामना करती है। जजों के लिए आचार संहिता मौजूद है, और किसी गंभीर आरोप पर संसद महाभियोग के माध्यम से उन्हें हटाने की प्रक्रिया निर्धारित है।
Centralised Public Grievance Redress and Monitoring System (CPGRAMS) जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए जनता शिकायत दर्ज कर सकती है। 2017 से 2021 के बीच 1,600 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई थीं। छात्रों को यह बताया गया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र की मजबूत नींव हैं।

वास्तविक उदाहरणों से सीख
किताब में चुनावी बॉन्ड और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के उदाहरण दिए गए हैं। 2018 में चुनावी बॉन्ड योजना सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक ठहराई गई थी। वहीं, 2009 के IT Act के एक प्रावधान को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उल्लंघन के कारण 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया। ऐसे उदाहरण छात्रों को संविधान और न्यायपालिका की भूमिका को समझने में मदद करते हैं।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश B R Gavai का बयान भी शामिल किया गया है, जिसमें उन्होंने पारदर्शिता, त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया।
बदलाव और पुरानी किताब से अंतर
पहली किताब में केवल अदालतों की संरचना और स्वतंत्रता पर ध्यान दिया गया था, जबकि नई किताब में लंबित मामलों और भ्रष्टाचार पर स्पष्ट चर्चा शामिल की गई है। कोविड-19 महामारी के बाद पुराने सिलेबस को रैशनलाइज किया गया और नई शिक्षा नीति 2020 और NCF के तहत किताबों को दोबारा तैयार किया गया।









