ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर विवाद, मोहम्मद सलीम बने ‘अवस्थी’, बेटे ने उठाए सवाल

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर विवाद, मोहम्मद सलीम बने ‘अवस्थी’, बेटे ने उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में CPI(M) नेता मोहम्मद सलीम के नाम के साथ गलत उपनाम जुड़ने का मामला सामने आया है। उनके बेटे आतिश अजीज ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

West Bengal: पश्चिम बंगाल में जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट (Draft Voter List) को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस बार मामला सीधे सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता और राज्य सचिव मोहम्मद सलीम से जुड़ा है। आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित मतदाता सूची में उनके नाम के साथ गलत उपनाम जोड़ दिया गया है। इस गलती को लेकर खुद उनके बेटे आतिश अजीज ने सामने आकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मोहम्मद सलीम से बन गए ‘अवस्थी’

सीपीआई (एम) नेता मोहम्मद सलीम के बेटे आतिश अजीज ने दावा किया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उनके नाम के साथ हिंदू उपनाम ‘अवस्थी’ जोड़ दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि यही उपनाम उनके पिता मोहम्मद सलीम के नाम के आगे भी दर्ज किया गया है। आतिश अजीज ने बताया कि वह कोलकाता पोर्ट विधानसभा क्षेत्र के पंजीकृत मतदाता हैं और वर्षों से उनका नाम उसी पहचान के साथ मतदाता सूची में दर्ज रहा है।

उन्होंने कहा कि जब उन्होंने हाल ही में प्रकाशित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की जांच की, तब उन्हें इस गंभीर गलती का पता चला। उनके मुताबिक, यह सिर्फ एक टाइपिंग एरर नहीं लगती, बल्कि पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।

बेटे का आरोप, चुनाव आयोग पर उठे सवाल

आतिश अजीज ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस मुद्दे को सार्वजनिक किया। उन्होंने लिखा कि उनके पिता दशकों से राजनीति में सक्रिय हैं और उनकी पहचान किसी से छिपी नहीं है। अगर एक वरिष्ठ नेता के नाम के साथ इस तरह की गलती हो सकती है, तो आम मतदाताओं के डेटा में क्या हाल होगा, इसकी कल्पना करना मुश्किल नहीं है।

उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। अजीज ने कहा कि इस प्रक्रिया पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, इसके बावजूद मतदाता सूची में इतनी बुनियादी और संवेदनशील गलती सामने आ रही है। उन्होंने पूछा कि आखिर इस पूरे अभ्यास का मकसद क्या है, जब नाम और पहचान तक सही नहीं रखी जा पा रही है।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया

आतिश अजीज ने अपनी पोस्ट में तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि एक तरफ मीडिया और भाजपा के कुछ वर्ग यह कहकर खुश हो रहे थे कि SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल मुसलमानों पर शिकंजा कसने के लिए किया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने उन्हें और उनके पिता को ‘अवस्थी’ उपनाम जोड़कर ब्राह्मण बना दिया।

उन्होंने मतदाता सूची के मसौदे की तस्वीरें भी साझा कीं, जिनमें उनके और उनके पिता के नाम के आखिर में गलत उपनाम साफ दिखाई दे रहा है। यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई।

CPI(M) ने उठाया मुद्दा

आतिश अजीज ने बताया कि इस गलती की जानकारी उन्होंने अपने इलाके के CPI(M) के बूथ एजेंट को दे दी है। पार्टी स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से संपर्क किया गया है।

CPI(M) से जुड़े नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति या परिवार का मामला नहीं है, बल्कि पूरी मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल है। अगर नाम, उपनाम और पहचान में इस तरह की गड़बड़ी होती है, तो चुनाव प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।

विपक्ष ने बताया साजिश

इस मुद्दे पर अब अन्य विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह वोटों में कटौती करने का प्रयास हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है कि चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को सत्ता से हटाने की किसी बड़ी साजिश का हिस्सा बन रहा है।

अवधेश प्रसाद ने कहा कि मतदाता सूची में नाम और पहचान से छेड़छाड़ लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

SIR प्रक्रिया पर बढ़ता विवाद

गौरतलब है कि जनगणना प्रपत्र डेटा के डिजिटलीकरण के पूरा होने के बाद, SIR अभ्यास के पहले चरण के तहत 16 दिसंबर को पश्चिम बंगाल की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित की गई थी। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और फर्जी या डुप्लीकेट नामों को हटाना बताया गया था। 

लेकिन अब लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने इस प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि SIR के नाम पर चुनिंदा वर्गों को निशाना बनाया जा रहा है और वोटर डेटा में मनमानी की जा रही है।

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