दुनिया पर मंडरा रहा GPS Spoofing का खतरा, जानिए कैसे हो रहा बचाव

दुनिया पर मंडरा रहा GPS Spoofing का खतरा, जानिए कैसे हो रहा बचाव

GPS स्पूफिंग और जामिंग अब वैश्विक स्तर पर गंभीर चुनौती बन चुकी है। 2024 में 4.3 लाख से अधिक घटनाएं दर्ज हुईं, जिससे विमान, ड्रोन और महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रभावित हुए। अमेरिका, यूरोप, चीन और रूस जैसे देश बैकअप नेविगेशन सिस्टम विकसित कर सुरक्षित GPS नेटवर्क सुनिश्चित करने में जुटे हैं।

GPS Spoofing: दुनिया भर में GPS स्पूफिंग और जामिंग की बढ़ती घटनाओं ने नेविगेशन सिस्टम और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को गंभीर खतरे में डाल दिया है। दिल्ली, ब्लैक सी और बाल्टिक क्षेत्र में विमानों के नेविगेशन सिस्टम असली लोकेशन से सैकड़ों किलोमीटर दूर दिख रहे हैं। 2024 में 4.3 लाख से अधिक मामलों की पुष्टि हुई है। अमेरिका, यूरोप, चीन और रूस अपने-अपने बैकअप और मल्टी-लेयर नेविगेशन नेटवर्क के जरिए इस समस्या से निपटने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि विमान, ड्रोन और बैंकिंग, पावर ग्रिड जैसी प्रणालियों की सुरक्षा बनी रहे।

GPS स्पूफिंग की बढ़ती घटनाएं

हाल के वर्षों में GPS सिग्नल पर खतरनाक तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं। दिल्ली, ब्लैक सी और बाल्टिक क्षेत्र में विमानों का नेविगेशन सैकड़ों किलोमीटर दूर दिखना इसके उदाहरण हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि GPS जामिंग और स्पूफिंग आधुनिक नेविगेशन सिस्टम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। सिर्फ 2024 में 4.3 लाख से ज्यादा GPS स्पूफिंग के मामले दर्ज हुए, जो 2023 के मुकाबले 62% ज्यादा हैं।

GPS क्यों महत्वपूर्ण है

GPS (Global Positioning System) अमेरिका द्वारा संचालित 24+ सैटेलाइट्स का नेटवर्क है, जो लोकेशन और समय का सटीक डेटा देता है। फोन, एयरक्राफ्ट, शिपिंग, बैंकिंग, पावर ग्रिड और डेटा सेंटर जैसी प्रणालियां GPS पर निर्भर हैं। इसके बिना आधुनिक टेलीकॉम, एविएशन और लॉजिस्टिक्स सिस्टम प्रभावित होते हैं। रूस का GLONASS, यूरोप का Galileo और चीन का BeiDou मिलकर ग्लोबल GNSS नेटवर्क का हिस्सा हैं।

युद्ध और सैन्य उपयोग में खतरे

यूक्रेन-रूस युद्ध में GPS स्पूफिंग और जामिंग ने स्पष्ट किया कि यह तकनीक कितनी संवेदनशील है। ड्रोन की दिशा भटकना, मिसाइल गाइडेंस प्रभावित होना और संचार बाधित होना इसके परिणाम हैं। DGCA के अनुसार भारत में भी दिल्ली और जम्मू रूट पर स्पूफिंग की घटनाएं सामने आई हैं।

वैश्विक समाधान और बैकअप सिस्टम

अमेरिका eLoran, LEO सैटेलाइट और फाइबर-आधारित टाइमिंग नेटवर्क में निवेश कर रहा है। ब्रिटेन राष्ट्रीय eLoran नेटवर्क के लिए 200+ मिलियन डॉलर खर्च कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया जाम-प्रतिरोधी क्वांटम सेंसर और सेल्स्टियल नेविगेशन पर काम कर रहा है। यूरोप और एशिया LEO PNT कॉन्स्टेलेशन और उन्नत इनर्शियल सिस्टम विकसित कर रहे हैं। चीन और रूस भी मल्टी-लेयर PNT नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं।

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