इजरायल-ईरान युद्ध के बीच ईरान ने दावा किया कि हमलों में 500 अमेरिकी सैनिक मारे गए, जबकि अमेरिका ने केवल तीन मौतों की पुष्टि की। परमाणु ठिकानों पर हमले और बातचीत की शर्तों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।
Israel Iran War: इजरायल-ईरान युद्ध को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। ईरान ने कहा है कि उसने हमलों में 500 अमेरिकी सैनिकों को मार गिराया है। वहीं अमेरिका ने इस दावे को खारिज करते हुए केवल तीन सैनिकों की मौत की पुष्टि की है। इस विरोधाभासी दावे के बीच दुनिया की नजरें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हुई हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कहा है कि ईरान पर हमले पूरी ताकत के साथ जारी रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक अमेरिका का मकसद पूरा नहीं होता, तब तक सैन्य कार्रवाई रुकेगी नहीं।
ट्रंप का बयान
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका का उद्देश्य साफ है। उनका कहना है कि ईरान को बातचीत की मेज पर लाना जरूरी है। लेकिन यह बातचीत अमेरिका की शर्तों पर होनी चाहिए।
ट्रंप के मुताबिक अभी जो सैन्य कार्रवाई चल रही है, वह केवल सैन्य दबाव नहीं बल्कि काइनेटिक और नॉन काइनेटिक साइकोलॉजिकल वॉरफेयर का हिस्सा है। इसका मकसद ईरान की लीडरशिप पर दबाव बनाना है ताकि वह कमजोर स्थिति में बातचीत के लिए तैयार हो जाए।
परमाणु ठिकानों पर हमला
अमेरिका ने दावा किया है कि हालिया हमलों में ईरान के कई परमाणु ठिकानों को ध्वस्त किया गया है। इन हमलों का उद्देश्य ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकना बताया जा रहा है। उनका कहना है कि वह नहीं चाहता कि ईरान न्यूक्लियर बम बनाए। यह उसकी पहली और सबसे अहम शर्त है।

अमेरिका की चार शर्तें
जानकारी के अनुसार अमेरिका ने बातचीत के लिए चार टर्म्स एंड कंडीशन रखी हैं। पहली शर्त यह है कि ईरान कभी भी न्यूक्लियर बम विकसित नहीं करेगा।
ईरान का कहना है कि वह पहले भी न्यूक्लियर बम नहीं बना रहा था और आगे भी नहीं बनाएगा। ईरान ने यह भी कहा है कि उसने जो करीब 400 किलो यूरेनियम 235 को 60 प्रतिशत तक समृद्ध किया है, उसे डाइल्यूट करने के लिए तैयार है।
डाइल्यूट करने का मतलब है कि समृद्ध यूरेनियम में मिश्रण कर उसकी शुद्धता घटा दी जाए। इससे 60 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत और फिर 10 प्रतिशत तक लाया जा सकता है, जो हथियार बनाने के स्तर से काफी नीचे है।
निगरानी को लेकर विवाद
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस प्रक्रिया की पुष्टि कौन करेगा। इसके लिए दुनिया की परमाणु निगरानी एजेंसी International Atomic Energy Agency यानी IAEA की भूमिका अहम मानी जा रही है।
लेकिन ईरान की मांग है कि निरीक्षण टीम में अमेरिका या इजरायल का कोई वैज्ञानिक शामिल न हो। ईरान को लंबे समय से शक है कि अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण टीमों में खुफिया एजेंसियों के लोग शामिल रहते हैं।
IAEA और खुफिया एजेंसियों को लेकर आरोप
ईरान का आरोप है कि जब IAEA की टीमें उसके परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने आती थीं, तब वे केवल तकनीकी जांच नहीं करती थीं बल्कि संवेदनशील जानकारियां भी इकट्ठा करती थीं।
ईरान का दावा है कि निरीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों के कार्यालय, लैबोरेटरी और वर्कशॉप की जानकारी ली जाती थी। यहां तक कि वैज्ञानिकों की दिनचर्या तक नोट की जाती थी। ईरान का आरोप है कि ये जानकारियां बाद में खुफिया एजेंसियों तक पहुंच जाती थीं, जिनमें Central Intelligence Agency यानी CIA और Mossad शामिल हैं।











