कश्मीर घाटी में शुक्रवार को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के विरोध में लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारी ईरान और फिलिस्तीन के समर्थन में नारे लगा रहे थे। प्रशासन ने पाबंदियां और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी।
Srinagar: कश्मीर घाटी में एक बार फिर शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी देखी गई। श्रीनगर, मगाम और बड़गाम जैसे इलाकों में लोग ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के विरोध में सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने ईरान और फिलिस्तीन के समर्थन में नारे लगाए। प्रशासन ने पहले से ही पाबंदियां लगा दी थीं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
शिया आबादी वाले क्षेत्रों में जोरदार प्रदर्शन
जानकारी के अनुसार यह विरोध खास तौर पर उन इलाकों में देखने को मिला जहां शिया आबादी अधिक है। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारे लगाए और ईरान के साथ एकजुटता जताई। प्रशासन ने कहा कि अब तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं। सुरक्षा के दृष्टिकोण से श्रीनगर के नौहट्टा इलाके में स्थित ऐतिहासिक जामिया मस्जिद को भी बंद कर दिया गया।
कश्मीर की शांति पर असर
हालांकि यह सवाल उठता है कि ईरान में हुई घटनाओं का असर कश्मीर की सड़कों पर क्यों दिखाई दे रहा है। घाटी ने पिछले कई सालों में हिंसा और अशांति के दौर से निकलकर सामान्य जीवन की ओर कदम बढ़ाए हैं। बाजार खुल रहे हैं, पर्यटन लौट रहा है और लोग अपने जीवन को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के नाम पर सड़कों पर भीड़ जुटना घाटी में बनी शांति के लिए चिंता का विषय है।
संयोग या संगठित प्रयास

विश्लेषकों का कहना है कि जैसे ही ईरान पर हमला हुआ, वैसे ही शुक्रवार की नमाज के बाद विरोध प्रदर्शन का वही पुराना पैटर्न दिखाई देने लगा। यह संयोग है या किसी संगठित सोच का हिस्सा, यह स्पष्ट नहीं है। सवाल यह भी उठता है कि क्या यह केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया है या फिर वह मानसिकता जो घाटी को बार-बार सड़कों पर टकराव की ओर धकेलती रही।
भारत की संप्रभुता
भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है। इसलिए नागरिकों को अपने देश की शांति और व्यवस्था को प्राथमिकता देनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय विवादों के नाम पर हंगामा खड़ा करना सीधे देश की आंतरिक सुरक्षा और माहौल को प्रभावित करता है। ईरान और इजराइल के बीच टकराव का समाधान केवल कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय मंचों के माध्यम से निकलेगा, न कि श्रीनगर की सड़कों पर नारे लगाने से।
युवाओं और विकास की आवश्यकता
विशेष रूप से कश्मीर के युवाओं को रोजगार, शिक्षा और बेहतर भविष्य की जरूरत है। लगातार नारेबाजी और गुस्से की राजनीति उन्हें उनके लक्ष्य से दूर ले जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हर अंतरराष्ट्रीय संघर्ष को अपनी पहचान का हिस्सा बनाना घाटी के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए हानिकारक है।
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कई पाबंदियां लगाई और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई। श्रीनगर और आसपास के इलाकों में भीड़ को नियंत्रित किया गया। प्रशासन की नजर लगातार प्रदर्शनकारियों और स्थिति पर बनी हुई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।










