सिक्किम में गुरुवार को एक घंटे के भीतर दो भूकंप के झटके महसूस किए गए। पहले झटके की तीव्रता 4.6 थी और दूसरे की 3.5। गंगटोक, नामची और मंगन में लोग डर के कारण घरों से बाहर आए, लेकिन कोई नुकसान नहीं हुआ।
Earthquake: सिक्किम में गुरुवार को लोगों की नींद उड़ी जब एक घंटे के भीतर दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। पहले झटके की तीव्रता 4.6 थी जबकि दूसरे झटके की तीव्रता 3.5 दर्ज की गई। भूकंप से लोगों में दहशत फैल गई और कई लोग घरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए। इस दौरान गंगटोक, नामची, मंगन और पेलिंग जैसे क्षेत्रों में लोग झटकों का असर महसूस कर रहे थे।
पहला झटका: ग्यालशिंग जिले में आया 4.6 तीव्रता का भूकंप
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismology) के अनुसार, पहला भूकंप पूर्वाह्न 11 बजकर 24 मिनट पर आया। इसका केंद्र ग्यालशिंग जिले के युक्सोम से चार किमी उत्तर-पूर्व में, 10 किलोमीटर की गहराई में था। भूकंप का यह झटका इतना तेज था कि लोग घरों से बाहर निकलकर सुरक्षा की तलाश में सड़कों पर दौड़ पड़े। स्थानीय प्रशासन ने तत्काल स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी और लोगों से संयम बनाए रखने का आग्रह किया।
दूसरा झटका: मंगन जिले में 3.5 तीव्रता का झटका
पहले झटके के लगभग एक घंटे बाद, दोपहर 12 बजकर 17 मिनट पर मंगन जिले में दूसरा भूकंप आया। इस बार झटके की तीव्रता 3.5 थी। इसका केंद्र गंगटोक से 11 किमी उत्तर-पश्चिम में, 10 किलोमीटर की गहराई में पाया गया। हालांकि दोनों झटकों में किसी तरह के जानमाल के नुकसान की अभी तक कोई सूचना नहीं है, लेकिन लोगों की दहशत बरकरार रही।
सिक्किम: भूकंप संवेदनशील क्षेत्र
सिक्किम भूकंप संवेदनशील (Seismic Sensitive) क्षेत्र में आता है क्योंकि यह हिमालयी क्षेत्र का हिस्सा है। यहां इंडियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट (Indian and Eurasian Tectonic Plates) की लगातार टक्कर होती रहती है। इसी वजह से सिक्किम में पहले भी कई बार मध्यम तीव्रता के भूकंप आ चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप की भविष्यवाणी करना मुश्किल है, लेकिन तैयारी और जागरूकता से नुकसान कम किया जा सकता है।
भूकंप आने की स्थिति में क्या करें
भूकंप के दौरान और बाद में सुरक्षित रहने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ जरूरी निर्देश दिए हैं। सबसे पहले झटका महसूस होते ही जमीन पर लेट जाएं, मजबूत टेबल या डेस्क (Drop, Cover and Hold On) के नीचे छिपें और सिर को हाथों से ढकें। झटका रुकने तक वहीं रहें। खिड़कियों और भारी सामान से दूर रहें ताकि गिरने वाली चीजों से चोट न लगे।
भूकंप आने पर बाहर भागने की कोशिश न करें, क्योंकि बाहर गिरने और घायल होने का खतरा अधिक होता है। अगर संभव हो तो बिजली और गैस बंद कर दें, ताकि आग और विस्फोट का खतरा कम हो। तटीय इलाकों में रहने वालों को सुनामी (Tsunami) की चेतावनी पर ध्यान देना चाहिए और ऊंची जगह पर चले जाना चाहिए।
इसके अलावा, हमेशा एक आपातकालीन किट तैयार रखें, जिसमें पानी, आवश्यक दवाइयां, टॉर्च और जरूरी सामान शामिल हो। यह किट भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मददगार साबित हो सकती है।










