Giorgia Meloni Voice Trademark: AI Deepfake से बचने के लिए आवाज का ट्रेडमार्क करा रहीं इटली की PM

Giorgia Meloni Voice Trademark: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी AI डीपफेक और आवाज के गलत इस्तेमाल से बचने के लिए अपनी आवाज का ट्रेडमार्क कराने की

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने AI से बनाए जा रहे डीपफेक के बढ़ते खतरे को देखते हुए अपनी आवाज की सुरक्षा के लिए कदम उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने यूरोपीय यूनियन इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस (EUIPO) में अपनी आवाज का ट्रेडमार्क कराने के लिए आवेदन किया है।

बिजनेस न्यूज़: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच डीपफेक और वॉइस क्लोनिंग दुनिया भर में चिंता का विषय बन चुके हैं। अब इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपनी आवाज को सुरक्षित रखने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मेलोनी ने यूरोपीय संघ के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस (EUIPO) में अपनी आवाज के ट्रेडमार्क के लिए आवेदन किया है। अगर आवेदन मंजूर होता है, तो उनकी आवाज को यूरोपीय स्तर पर कानूनी सुरक्षा मिल सकती है।

चार सेकेंड की आवाज का दिया सैंपल

रिपोर्ट के अनुसार, जॉर्जिया मेलोनी ने 5 अक्टूबर 2026 को EUIPO में ट्रेडमार्क आवेदन दाखिल किया। इसके साथ उन्होंने करीब चार सेकेंड की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जमा की है। इस रिकॉर्डिंग में वह अपना परिचय देती हैं और अपनी आवाज का स्पष्ट नमूना उपलब्ध कराती हैं। EUIPO की ओर से अभी इस आवेदन पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो मेलोनी की आवाज को एक विशिष्ट बौद्धिक संपदा के तौर पर सुरक्षा मिल सकती है।

आवाज का ट्रेडमार्क मिलने से क्या फायदा होगा?

ट्रेडमार्क का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि संबंधित पहचान या ब्रांड को कानूनी सुरक्षा मिलती है। EUIPO में पंजीकरण होने की स्थिति में ट्रेडमार्क को यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में सुरक्षा मिल सकती है। यह सुरक्षा आम तौर पर 10 साल की अवधि के लिए होती है, जिसके बाद इसे नवीनीकृत किया जा सकता है।

मेलोनी की आवाज का ट्रेडमार्क मंजूर होने पर किसी दूसरे व्यक्ति या संस्था द्वारा उनकी आवाज की पहचान का व्यावसायिक या भ्रामक इस्तेमाल किए जाने पर कानूनी कार्रवाई का आधार मजबूत हो सकता है। खास तौर पर AI की मदद से तैयार किए जाने वाले नकली ऑडियो, विज्ञापन या अन्य सामग्री के मामलों में यह सुरक्षा महत्वपूर्ण हो सकती है।

हालांकि, ट्रेडमार्क अपने आप में हर तरह के AI डीपफेक को पूरी तरह रोक नहीं सकता। इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित मामले में कानून और ट्रेडमार्क अधिकारों को किस तरह लागू किया जाता है।

पहले भी डीपफेक का सामना कर चुकी हैं मेलोनी

जॉर्जिया मेलोनी के लिए AI और डिजिटल फर्जीवाड़े का खतरा नया नहीं है। वह पहले भी आपत्तिजनक डीपफेक सामग्री का शिकार हो चुकी हैं। उनकी तस्वीरों में डिजिटल बदलाव कर उन्हें सोशल मीडिया और इंटरनेट पर प्रसारित किया गया था। इसी पृष्ठभूमि में आवाज की सुरक्षा को लेकर उनका यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

उनकी आत्मकथा का नाम भी 'Io sono Giorgia' यानी 'I am Giorgia' रहा है। ऐसे में अपनी आवाज की विशिष्ट पहचान को सुरक्षित करना उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व से भी जुड़ा हुआ कदम है।

AI से आवाज की क्लोनिंग कितनी आसान?

AI तकनीक के विकास ने किसी व्यक्ति की आवाज की नकल तैयार करना पहले की तुलना में काफी आसान कर दिया है। कुछ सेकेंड की वास्तविक रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल करके ऐसी आवाज तैयार की जा सकती है, जो सुनने में मूल व्यक्ति जैसी लग सकती है। यह तकनीक मनोरंजन और रचनात्मक क्षेत्र में उपयोगी हो सकती है, लेकिन इसके गलत इस्तेमाल से धोखाधड़ी, फर्जी बयान, राजनीतिक भ्रम और पहचान की चोरी जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। 

सार्वजनिक हस्तियों की आवाज की नकल कर बनाई गई सामग्री विशेष रूप से संवेदनशील हो सकती है, क्योंकि इससे लोगों के बीच गलत सूचना तेजी से फैल सकती है।

भारत में भी सामने आ चुका है डीपफेक का खतरा

डीपफेक को लेकर भारत में भी चिंता बढ़ी है। 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान कई प्रमुख नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों से जुड़ी नकली तस्वीरें, वीडियो और ऑडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हुए थे। इसके बाद चुनावी प्रक्रिया में AI-जनित भ्रामक सामग्री के संभावित प्रभाव को लेकर नियामक स्तर पर भी चेतावनियां जारी की गईं।

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