SFI ने शुक्रवार को शिक्षा विभाग के खिलाफ प्रदर्शन कर स्कूलों में सामान्य ज्ञान परीक्षाओं के जरिए कथित RSS विचारधारा के प्रचार का आरोप लगाया। संगठन ने परीक्षाओं की जांच, कथित पंजीकरण शुल्क वसूली पर कार्रवाई और स्कूलों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने की मांग की।
झुंझुनूं: सरकारी और निजी स्कूलों में आयोजित सामान्य ज्ञान प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने शिक्षा विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। SFI की जिला समिति ने शुक्रवार को मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (समग्र शिक्षा) कार्यालय के बाहर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपने का प्रयास किया। संगठन ने आरोप लगाया कि कुछ सामान्य ज्ञान परीक्षाओं के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी विचारधारा को विद्यार्थियों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, ये आरोप SFI की ओर से लगाए गए हैं और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
शिक्षा विभाग के कार्यालय का घेराव
शुक्रवार को बड़ी संख्या में SFI कार्यकर्ता और छात्र शिक्षा विभाग के कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते हुए शिक्षा व्यवस्था में कथित वैचारिक हस्तक्षेप का विरोध किया। संगठन का कहना है कि स्कूलों का प्राथमिक उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और निष्पक्ष शिक्षा उपलब्ध कराना होना चाहिए।
SFI नेताओं ने कहा कि विद्यार्थियों को किसी एक राजनीतिक या वैचारिक संगठन की विचारधारा से प्रभावित करने के बजाय उन्हें विभिन्न विषयों पर स्वतंत्र रूप से सोचने और सवाल पूछने का अवसर मिलना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने शिक्षा विभाग से पूरे मामले की जांच कराने और ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की।
अधिकारी के नहीं मिलने पर जताई नाराजगी
प्रदर्शन के दौरान मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (समग्र शिक्षा) के कार्यालय में संबंधित अधिकारी के मौजूद नहीं होने पर SFI कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई। छात्र नेताओं आशीष, सचिन चोपड़ा और अमित शेखावत ने कहा कि संगठन की ओर से प्रदर्शन की सूचना पहले ही दी गई थी। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी छात्रों से बातचीत के लिए मौके पर नहीं पहुंचे।
SFI नेताओं ने मांग की कि शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं विद्यार्थियों और छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत करें तथा उनकी शिकायतों को सुनकर उचित कार्रवाई करें। संगठन का कहना है कि प्रशासन को छात्रों की ओर से उठाए गए सवालों को गंभीरता से लेना चाहिए।
सामान्य ज्ञान परीक्षाओं पर उठाए सवाल
SFI ने स्कूलों में आयोजित होने वाली सामान्य ज्ञान प्रतियोगी परीक्षाओं के स्वरूप और संचालन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि ऐसी कुछ परीक्षाओं के जरिए विद्यार्थियों के बीच विशेष विचारधारा का प्रचार किया जा रहा है। छात्र संगठन ने शिक्षा विभाग से इन प्रतियोगिताओं की सामग्री, आयोजकों और संचालन प्रक्रिया की जांच करने की मांग की है।
SFI नेताओं के मुताबिक, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के ज्ञान और समझ को बढ़ाने का माध्यम हो सकती हैं, लेकिन यदि उनके जरिए किसी संगठन या विचारधारा का प्रचार किया जाता है तो यह शिक्षा संस्थानों की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। संगठन ने कहा कि स्कूलों को किसी भी राजनीतिक गतिविधि या वैचारिक प्रचार का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं है कि संबंधित प्रतियोगिताओं का आयोजन RSS की ओर से किया गया था या उनमें संगठन की विचारधारा को आधिकारिक रूप से शामिल किया गया था। इसलिए इस आरोप की पुष्टि के लिए शिक्षा विभाग और संबंधित परीक्षा आयोजकों का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।
पंजीकरण शुल्क की कथित वसूली की जांच की मांग
प्रदर्शन के दौरान SFI ने सामान्य ज्ञान प्रतियोगी परीक्षाओं के पंजीकरण को लेकर कथित शुल्क वसूली का मुद्दा भी उठाया। संगठन का आरोप है कि कुछ परीक्षाओं में विद्यार्थियों से पंजीकरण के नाम पर राशि ली जा रही है। SFI ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
छात्र संगठन ने कहा कि यदि किसी परीक्षा के लिए विद्यार्थियों से शुल्क लिया जा रहा है तो उसकी प्रक्रिया, राशि और उपयोग से संबंधित जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। संगठन ने शिक्षा विभाग से यह भी मांग की कि यदि नियमों के विपरीत छात्रों से पैसा वसूला गया है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

स्कूलों को राजनीतिक मंच नहीं बनाने की अपील
SFI नेताओं ने कहा कि स्कूल विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यक्तित्व विकास के केंद्र हैं। इसलिए वहां होने वाली गतिविधियों का उद्देश्य शिक्षा और छात्रों के सर्वांगीण विकास तक सीमित रहना चाहिए। संगठन ने शिक्षा विभाग से स्कूलों में आयोजित होने वाली बाहरी प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों की निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।
SFI का कहना है कि विद्यार्थियों को संविधान, लोकतंत्र और विभिन्न विचारों के बारे में जानकारी दी जा सकती है, लेकिन किसी एक विचारधारा को उन पर थोपना उचित नहीं है। संगठन ने शिक्षा संस्थानों में राजनीतिक और वैचारिक निष्पक्षता बनाए रखने पर जोर दिया।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन जिलेभर में आंदोलन को आगे बढ़ाएगा। SFI ने कहा कि वह स्कूलों में कथित वैचारिक गतिविधियों और विद्यार्थियों से शुल्क वसूली के आरोपों की जांच होने तक इस मुद्दे को उठाता रहेगा।
संगठन ने शिक्षा विभाग से संबंधित प्रतियोगिताओं की जांच, कथित पंजीकरण शुल्क की पड़ताल और स्कूलों में राजनीतिक या वैचारिक गतिविधियों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल
प्रदर्शन में SFI से जुड़े कई छात्र नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। इनमें अमित शेखावत, आशीष, सचिन चोपड़ा, अंकित शर्मा, मनीष मील, मोहित कुमार और सोनू ढाका सहित अन्य कार्यकर्ताओं के नाम सामने आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा विभाग के कार्यालय के बाहर अपनी मांगों को लेकर नारे लगाए।
फिलहाल पूरे मामले में शिक्षा विभाग या संबंधित प्रतियोगिता आयोजकों की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि विभाग SFI की शिकायतों और लगाए गए आरोपों की जांच किस तरह करता है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या विद्यार्थियों से अनुचित शुल्क वसूली की पुष्टि होती है तो प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा सकती है।
शिक्षा व्यवस्था में निष्पक्षता पर बहस
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब स्कूलों में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगिताओं, जागरूकता कार्यक्रमों और बाहरी संस्थाओं की गतिविधियों को लेकर शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर चर्चा होती रही है। सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन का माध्यम मानी जाती हैं, लेकिन उनके आयोजन और सामग्री को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है।
SFI ने अपने आरोपों के जरिए शिक्षा विभाग के सामने यही सवाल रखा है कि स्कूलों में होने वाली गतिविधियों की निगरानी किस स्तर पर की जाती है और विद्यार्थियों को किसी विशेष राजनीतिक या वैचारिक प्रभाव से बचाने के लिए क्या व्यवस्था है। अब शिक्षा विभाग की जांच या आधिकारिक प्रतिक्रिया से ही स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और संबंधित परीक्षाओं के संचालन में किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं।











