Green Carbon Credit Scheme: सुलतानपुर में 1,000 से ज्यादा किसान जुड़े, 5 साल बाद पौधों पर मिलेगा मालिकाना हक

लतानपुर में Green Carbon Credit Scheme से 1,000 से ज्यादा किसान जुड़े हैं। पांच साल पौधों की देखभाल के बाद प्रति पौधा 500 रुपये और मालिकाना हक मिलेगा।

सुलतानपुर में वन विभाग की Green Carbon Credit Scheme से 1,000 से अधिक किसान जुड़ चुके हैं। योजना में पौधारोपण और पांच साल तक संरक्षण के बाद किसानों को पौधों का मालिकाना हक और प्रति पौधा 500 रुपये मिलेंगे।

सुलतानपुर: किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग ने Green Carbon Credit Scheme शुरू की है। योजना के तहत सुलतानपुर की सदर, कादीपुर, जयसिंहपुर और लंभुआ रेंज में अब तक 1,000 से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। किसानों को पांच साल तक पौधों की देखभाल करनी होगी, जिसके बाद उन्हें आर्थिक लाभ के साथ पौधों पर मालिकाना हक मिलेगा।

1,000 से ज्यादा किसानों ने कराया पंजीकरण

सुलतानपुर में किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर देने के लिए वन विभाग ने Green Carbon Credit Scheme लागू की है। योजना के तहत किसान अपने खेत या उपलब्ध भूमि पर पौधारोपण कर सकते हैं। इसके लिए वर्तमान वर्ष के साथ पिछले वर्ष पौधारोपण महाअभियान के दौरान लगाए गए पौधों को भी योजना से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है।

वन विभाग के मुताबिक जिले की सदर, कादीपुर, जयसिंहपुर और लंभुआ रेंज में अब तक 1,000 से अधिक किसानों ने अपना पंजीकरण कराया है। संबंधित रेंज के अधिकारी और वनकर्मी किसानों को योजना की जानकारी देकर इससे जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

योजना के तहत पंजीकृत किसानों की ओर से लगाए गए पौधों का सर्वे किया जा रहा है। यह सर्वे द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) की ओर से किया जा रहा है। सर्वे के बाद पौधों की स्थिति और योजना के लिए उनकी पात्रता से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

पांच साल पौधों की देखभाल, फिर मिलेगा आर्थिक लाभ

योजना से जुड़ने वाले किसानों को लगाए गए पौधों का पांच वर्ष तक संरक्षण करना होगा। इस अवधि में पौधों की देखभाल और उनके सुरक्षित विकास की जिम्मेदारी किसान की होगी। पांच वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद किसानों को प्रति पौधा 500 रुपये की राशि मिलने की जानकारी दी गई है।

इसके साथ ही किसानों को पौधों पर मालिकाना हक भी मिलेगा। इस तरह योजना का उद्देश्य किसानों को पौधारोपण के लिए प्रोत्साहित करने के साथ उनकी आय का एक अतिरिक्त स्रोत तैयार करना है। किसानों का कहना है कि इससे एक तरफ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है, वहीं दूसरी तरफ खेत और आसपास के क्षेत्र में हरियाली बढ़ेगी।

योजना से जुड़े किसानों ने इसे पर्यावरण और आय दोनों के लिहाज से उपयोगी बताया है। चांदा छतौनाकला के सजन कुमार, महेसुआ के हरिपूजन सिंह, माधवपुर के लाल बहादुर सिंह, भपटा के धर्मेंद्र सिंह और सिप्तापुर के शंकर विश्वकर्मा समेत अन्य किसानों ने योजना में पंजीकरण कराया है।

पंजीकरण के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत

वन विभाग के अनुसार योजना से जुड़ने के लिए किसानों को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। इनमें खसरा, खतौनी, नाम, पता और मोबाइल नंबर के साथ बैंक खाते से संबंधित जानकारी शामिल है। किसान को बैंक पासबुक की छायाप्रति और पैन कार्ड भी जमा करना होगा।

इन दस्तावेजों का इस्तेमाल योजना से संबंधित भुगतान को किसान के बैंक खाते में भेजने के लिए किया जाएगा। इच्छुक किसान अपने क्षेत्र के क्षेत्रीय वनाधिकारी या प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय से संपर्क कर योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

वन विभाग का मानना है कि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होने से जिले में बड़े स्तर पर पौधारोपण और संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान होगा। आने वाले समय में अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ने की प्रक्रिया जारी रहने की उम्मीद है।

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