इटली में चुनावी सुधार को अंतिम मंजूरी, मेलोनी सरकार को मिली बड़ी जीत; 42% वोट पर मिलेगा सीट बोनस

इटली की संसद ने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी सरकार के चुनावी सुधार को मंजूरी दी। 42% वोट पाने वाले विजेता गठबंधन को 70 और 35 बोनस सीटों का प्रावधान होगा।

इटली की निचली सदन ने चुनावी सुधार को अंतिम मंजूरी दे दी। नए नियम में 42% वोट हासिल करने वाले विजेता गठबंधन को 70 लोकसभा और 35 सीनेट सीटों का बोनस मिलेगा। सरकार इसे राजनीतिक स्थिरता से जोड़ रही है, जबकि विपक्ष प्रतिनिधित्व पर सवाल उठा रहा है।

रोम: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार को विवादित चुनावी सुधार पर बड़ी सफलता मिली है। संसद की निचली सदन ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को नए चुनावी कानून को अंतिम मंजूरी दे दी। गुप्त मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 227 और विरोध में 164 वोट पड़े। नए कानून में 42% से अधिक वोट हासिल करने वाली पार्टी या गठबंधन के लिए अतिरिक्त सीटों के जरिए संसद में स्पष्ट बहुमत सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है।

सरकार का तर्क है कि नए चुनावी मॉडल का उद्देश्य इटली में राजनीतिक स्थिरता बढ़ाना और गठबंधन सरकारों के बार-बार गिरने की समस्या को कम करना है। वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि सीट बोनस का यह प्रावधान चुनाव में अपेक्षाकृत कम वोट पाने वाले गठबंधन को संसद में उसकी वास्तविक वोट हिस्सेदारी से ज्यादा प्रतिनिधित्व दे सकता है।

यह कानून अगले राष्ट्रीय चुनाव के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौजूदा राजनीतिक कार्यक्रम के मुताबिक इटली में अगला आम चुनाव 2027 में होना है।

42% वोट हासिल करने पर मिलेगा सीट बोनस

नए चुनावी कानून में मुख्य बदलाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व यानी proportional representation के साथ एक निश्चित ‘गवर्नेबिलिटी बोनस’ जोड़ना है। इसके तहत यदि कोई पार्टी या गठबंधन दोनों सदनों में कम से कम 42% वैध वोट हासिल करते हुए सबसे अधिक वोट प्राप्त करता है, तो उसे अतिरिक्त सीटों का लाभ मिलेगा।

प्रावधान के तहत निचली सदन यानी Chamber of Deputies में 70 और सीनेट में 35 सीटों का बोनस रखा गया है। इस तरह कुल 105 सीटों का प्रोत्साहन विजेता गठबंधन को मिल सकता है। हालांकि, ये सीटें संसद की मौजूदा कुल संख्या के भीतर ही आवंटित होंगी। इसका अर्थ यह नहीं है कि 70 और 35 सीटें मौजूदा सीटों के ऊपर जोड़ दी जाएंगी।

नए कानून के अनुसार विजेता गठबंधन को निचली सदन में अधिकतम 220 सीटें और सीनेट में अधिकतम 113 सीटें मिल सकती हैं। विदेश से चुने जाने वाले सांसदों की सीटें इस सीमा से अलग रखी गई हैं।

आसान उदाहरण से समझें सीट बोनस का गणित

मान लीजिए किसी चुनाव में एक गठबंधन को 43% वोट मिलते हैं और वह सबसे अधिक वोट हासिल करता है। दूसरे गठबंधन को 35% और अन्य दलों को कुल 22% वोट मिलते हैं।

ऐसी स्थिति में 43% वोट हासिल करने वाला गठबंधन 42% की निर्धारित सीमा पार कर जाता है। उसे सामान्य आनुपातिक सीट आवंटन के अलावा कानून में निर्धारित 70 सीटों का बोनस निचली सदन और 35 सीटों का बोनस सीनेट में मिल सकता है।

हालांकि, वास्तविक चुनावी गणना केवल कुल वोट प्रतिशत को सीटों से गुणा करने जितनी सरल नहीं होगी। सीटों का वितरण निर्वाचन क्षेत्रों, पात्र पार्टियों और कानून में निर्धारित तकनीकी नियमों के अनुसार किया जाएगा। इसलिए किसी उदाहरण में सीधे 43% को 400 सीटों से गुणा करके अंतिम सीट संख्या निकालना सही तरीका नहीं होगा।

संसद की कुल सीटें नहीं बढ़ेंगी

इस सुधार को समझने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि सीट बोनस का मतलब संसद के आकार में वृद्धि नहीं है। बोनस के बावजूद Chamber of Deputies और Senate की निर्धारित सीट संरचना के भीतर ही सीटों का वितरण किया जाएगा।

यानी यदि किसी विजेता गठबंधन को बोनस मिलता है, तो उसके हिस्से की सीटों में वृद्धि होगी और आनुपातिक आवंटन से दूसरी पार्टियों को मिलने वाली सीटों पर इसका प्रभाव पड़ेगा। यही वजह है कि विपक्ष इस व्यवस्था को प्रतिनिधित्व के संतुलन के लिहाज से विवादित मानता है।

इटली की संसद की वर्तमान संरचना में निचली सदन के 400 और सीनेट के 200 निर्वाचित सदस्य हैं। नए कानून का उद्देश्य संसद के आकार को बढ़ाना नहीं, बल्कि मौजूदा सीटों के वितरण के जरिए सरकार बनाने वाली ताकत को मजबूत करना है।

मेलोनी सरकार के लिए क्यों महत्वपूर्ण था यह कानून?

चुनावी सुधार प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था। 6 अक्टूबर को निचली सदन में सुधार के शुरुआती प्रावधानों पर सरकार ने विश्वास मत हासिल किया था। दूसरे विश्वास मत में प्रस्ताव 227-149 वोटों से पारित हुआ था, जबकि तीन सांसदों ने मतदान से परहेज किया था। अंतिम मंजूरी के लिए 8 अक्टूबर को गुप्त मतदान निर्धारित किया गया था।

रिपोर्टों के मुताबिक, मेलोनी ने संकेत दिया था कि यदि सुधार विफल होता है तो उन्हें राजनीतिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है और सरकार के भविष्य पर सवाल उठ सकते हैं। इससे अंतिम मतदान को उनकी सरकार के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा था।

अब कानून के अंतिम अनुमोदन के साथ मेलोनी सरकार ने संसद में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक लक्ष्य हासिल कर लिया है।

सरकार का तर्क- राजनीतिक स्थिरता होगी मजबूत

सरकार और कानून के समर्थकों का कहना है कि इटली की राजनीति में गठबंधन सरकारों की अस्थिरता लंबे समय से समस्या रही है। सीट बोनस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव में स्पष्ट रूप से सबसे आगे रहने वाले गठबंधन के पास सरकार चलाने के लिए पर्याप्त संसदीय समर्थन हो।

नए मॉडल में चुनाव प्रणाली को मुख्य रूप से proportional representation पर आधारित किया गया है। इसके साथ 42% की सीमा को गवर्नेबिलिटी बोनस से जोड़ा गया है। सरकार का मानना है कि इससे मतदाताओं के वोट को संसद में सरकार बनाने की स्पष्ट क्षमता में बदला जा सकेगा।

विपक्ष ने प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक संतुलन पर उठाए सवाल

विपक्षी दलों ने सीट बोनस के आकार और 42% की सीमा को लेकर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि किसी गठबंधन को 42% से थोड़ा अधिक वोट मिलने पर भी 105 सीटों का निश्चित बोनस उसके संसदीय प्रतिनिधित्व को वास्तविक वोट हिस्सेदारी की तुलना में काफी बढ़ा सकता है।

संसद में विपक्षी बहस के दौरान इस बात पर भी सवाल उठाए गए कि चुनावी प्रणाली में स्थिरता और प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। कुछ सांसदों ने संवैधानिक समानता और वोट की बराबर ताकत से जुड़े सवाल भी उठाए हैं।

हालांकि, इन आपत्तियों को विपक्षी दलों और सांसदों के राजनीतिक तथा संवैधानिक तर्क के रूप में देखा जाना चाहिए। अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित न्यायिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।

प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा भी होगी

नए चुनावी मॉडल में गठबंधन या राजनीतिक दलों को चुनाव से पहले अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की जानकारी देनी होगी। इसका उद्देश्य मतदाताओं को यह स्पष्ट करना है कि चुनाव जीतने की स्थिति में सरकार का नेतृत्व कौन करेगा।

हालांकि, कानून में यह व्यवस्था इटली के राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका को समाप्त नहीं करती। संसद में पेश किए गए प्रावधानों में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का उल्लेख राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

इटली के पुराने चुनावी कानूनों का अनुभव

इटली में चुनावी प्रणाली को लेकर पहले भी कई बड़े बदलाव किए जा चुके हैं। 2015 के ‘Italicum’ कानून में भी बहुमत बोनस का प्रावधान था। उस व्यवस्था में 40% वोट हासिल करने वाली सूची को 340 सीटें देने का प्रावधान किया गया था।

इटली की संवैधानिक अदालत ने 2017 में उस कानून के कुछ प्रावधानों पर फैसला दिया। अदालत ने 40% की सीमा वाले बहुमत बोनस के मूल प्रावधान को अपने आप में असंवैधानिक नहीं माना था, लेकिन कानून के अन्य हिस्सों, विशेष रूप से दूसरे दौर के मतदान से जुड़े प्रावधानों पर हस्तक्षेप किया गया।

इस पुराने अनुभव के कारण मौजूदा सुधार को लेकर भी संवैधानिक और प्रतिनिधित्व संबंधी बहस महत्वपूर्ण बनी हुई है।

मेलोनी के अगले चुनाव पर क्या असर पड़ेगा?

नए चुनावी कानून का वास्तविक राजनीतिक प्रभाव अगले आम चुनाव के दौरान स्पष्ट होगा। यदि कोई गठबंधन 42% की सीमा पार कर सबसे अधिक वोट हासिल करता है, तो उसे बोनस के जरिए संसद में सरकार बनाने की अधिक स्पष्ट स्थिति मिल सकती है।

इसके विपरीत, यदि कोई दल या गठबंधन 42% तक नहीं पहुंचता है, तो सीट बोनस लागू नहीं होगा और आनुपातिक वितरण अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे गठबंधन निर्माण और चुनावी रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।

मेलोनी की सरकार के लिए अब अगली चुनौती कानून को लागू करने की प्रक्रिया और आगामी चुनाव की तैयारी होगी। विपक्ष के लिए चुनौती यह होगी कि वह नए नियमों के तहत अपनी चुनावी रणनीति और गठबंधन संरचना तय करे।

कानून पास होने के बाद आगे की तस्वीर

8 अक्टूबर के अंतिम मतदान के बाद इटली की चुनावी व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव का रास्ता साफ हो गया है। 42% वोट की सीमा, 70 और 35 सीटों का बोनस तथा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पर आधारित नया मॉडल अगले आम चुनाव की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।

अब इस सुधार का वास्तविक परीक्षण चुनाव के दौरान होगा। उस समय यह देखा जाएगा कि नया मॉडल राजनीतिक स्थिरता और संसदीय प्रतिनिधित्व के बीच किस तरह का संतुलन बनाता है। फिलहाल, मेलोनी सरकार ने संसद में अपने प्रमुख चुनावी सुधार को अंतिम मंजूरी दिला दी है और इटली की अगली चुनावी राजनीति के लिए नया ढांचा तैयार हो गया है।

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