उत्तराखंड के हल्द्वानी में निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर कथित तौर पर फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर 28 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने शिकायत स्वीकार करते हुए बनभूलपुरा पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए हैं।
हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी में मतदाता सूची से 28 लोगों के नाम हटाने के कथित फर्जी प्रयास के मामले में अब पुलिस प्राथमिकी दर्ज करेगी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम शुभांगी गुप्ता ने इकराम अली की ओर से दायर प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए बनभूलपुरा थाना प्रभारी को शिकायत के आधार पर FIR दर्ज करने और कानून के अनुसार विवेचना करने का आदेश दिया है। मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के जरिये आवेदन करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान की जाएगी।
निर्वाचन पोर्टल पर 28 नाम हटाने के लिए भरे गए आवेदन
शिकायत के अनुसार, इंद्रानगर निवासी इकराम अली विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान अपने बूथ पर बूथ लेवल एजेंट-2 (BLA-2) के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें 20 अगस्त को जानकारी मिली कि निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर 12 अगस्त 2026 को भाग संख्या 134 के 28 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए उनके नाम से ऑनलाइन फॉर्म-7 भरे गए थे।
इकराम अली ने दावा किया कि उन्होंने ये आवेदन नहीं किए थे और न ही किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी ओर से आवेदन करने की अनुमति दी थी। आरोप है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी पहचान और नाम का दुरुपयोग करके आवेदन प्रस्तुत किए। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस जांच में ही पता चलेगा कि आवेदन किसने और किन परिस्थितियों में भरे थे।
शिकायत के बाद भी FIR नहीं होने पर पहुंचे अदालत
इकराम अली के मुताबिक, उन्होंने 24 अगस्त को स्पीड पोस्ट के माध्यम से बनभूलपुरा थाने और 29 अगस्त को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नैनीताल को शिकायत भेजी थी। डाक अभिलेखों के अनुसार, दोनों शिकायतें संबंधित कार्यालयों तक पहुंच गई थीं। इसके बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं होने पर उन्होंने 15 सितंबर को न्यायालय में प्रार्थना पत्र दायर किया।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम शुभांगी गुप्ता ने छह अक्टूबर को प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए पुलिस को FIR दर्ज करने और विधि के अनुसार जांच करने के निर्देश दिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में संशोधन को लेकर निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आपत्ति दर्ज कराने का विकल्प और कथित अपराध की पुलिस जांच अलग-अलग विषय हैं। प्रशासनिक प्रक्रिया में उपलब्ध विकल्प आपराधिक जांच का स्थान नहीं ले सकते।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से आरोपियों की पहचान की जाएगी
न्यायालय के अनुसार, कथित तौर पर ऑनलाइन आवेदन भरने के लिए इस्तेमाल की गई यूजर आईडी, लॉगिन विवरण, पंजीकृत मोबाइल नंबर, ई-मेल, OTP, इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) एड्रेस और उपकरणों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर आवेदन प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान करना पुलिस विवेचना का विषय है।
पुलिस को संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड जुटाकर यह पता लगाना होगा कि फॉर्म-7 किसने भरे और क्या इसके लिए इकराम अली की पहचान का दुरुपयोग किया गया था। फिलहाल किसी व्यक्ति की संलिप्तता साबित नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों और जिम्मेदार लोगों के बारे में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।











