हाथी और दर्जी: जैसे को तैसा की सिख देती कहानी

एक दर्जी ने हाथी के साथ शरारत की और हाथी ने बदला लिया। कहानी सिखाती है: दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप चाहते हैं।

यह कहानी हमें सिखाती है कि किसी के साथ किया गया बुरा व्यवहार कभी खाली नहीं जाता। दोस्ती और विश्वास की नींव बहुत नाजुक होती है, और एक छोटी सी शरारत या क्रूरता इसे हमेशा के लिए तोड़ सकती है। यह कहानी 'जैसे को तैसा' (Tit for Tat) की एक सटीक मिसाल है, जो हमें दूसरों के साथ सम्मानपूर्वक पेश आने की प्रेरणा देती है।

कहानी 

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से कस्बे में एक दर्जी की दुकान थी। वह दर्जी बहुत ही मिलनसार और दयालु स्वभाव का था। उसी कस्बे के पास एक घना जंगल था, जहाँ से एक विशाल हाथी रोज़ाना नदी पर पानी पीने के लिए जाया करता था। हाथी का रास्ता दर्जी की दुकान के सामने से होकर गुज़रता था।

धीरे-धीरे दर्जी और हाथी के बीच एक अनोखी दोस्ती हो गई। हर रोज़ जब हाथी दुकान के सामने से गुज़रता, तो वह अपनी सूँड उठाकर दर्जी को सलाम करता। दर्जी भी उसका स्वागत करता और उसे खाने के लिए कभी एक ताज़ा केला, तो कभी गन्ने का टुकड़ा दे देता। हाथी बड़े चाव से उसे खाता और खुशी-खुशी नदी की ओर बढ़ जाता। यह सिलसिला कई महीनों तक चलता रहा और उनकी दोस्ती पक्की हो गई।

एक दिन दोपहर के समय दर्जी अपनी दुकान पर बैठा काम कर रहा था। उसे किसी ज़रूरी काम से बाहर जाना था और उसे थोड़ी देर हो रही थी, इसलिए वह कुछ चिड़चिड़ा हो गया था। उसी समय, हमेशा की तरह हाथी वहाँ पहुँचा और उसने अपनी सूँड दुकान के अंदर बढ़ाकर केले का इंतज़ार करने लगा।

दर्जी का मूड उस दिन कुछ खराब था। उसे अजीब सा मज़ाक सूझा और उसने केले की जगह अपनी सुई उठाकर हाथी की सूँड़ पर चुभो दिया। हाथी दर्द से फड़फड़ाया, अपनी सूँड़ झटका और कराहता हुआ दूर चला गया। दर्जी अपनी हरकत पर हँस पड़ा, उसे यह अंदाज़ा भी नहीं था कि उसने कितनी बड़ी गलती कर दी।

हाथी सीधा नदी पर पहुँचा। उसे दर्जी की इस हरकत पर बहुत गुस्सा आ रहा था। उसने नदी के किनारे से अपनी सूँड में ढेर सारा गंदा कीचड़ और पानी भर लिया। अब वह बदला लेने के लिए तैयार था। वह वापस दर्जी की दुकान की तरफ चल पड़ा।

जब हाथी दुकान पर पहुँचा, तो दर्जी अभी भी अपने काम में लगा हुआ था। हाथी ने बिना कोई चेतावनी दिए, अपनी सूँड में भरा सारा गंदा पानी और कीचड़ दर्जी और उसकी दुकान पर छिड़क दिया। देखते ही देखते दर्जी के सारे नए और महंगे कपड़े कीचड़ से सन गए। उसकी पूरी दुकान गंदी हो गई और उसका बहुत बड़ा नुकसान हो गया।

दर्जी सिर पकड़कर बैठ गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने सोचा, 'मैंने एक बेज़ुबान जानवर के साथ बेवजह क्रूरता की, और आज मुझे उसी का फल मिला है।' उसने हाथी की तरफ देखा, जो अब शांत खड़ा था। दर्जी ने हाथ जोड़कर हाथी से माफी माँगी। उस दिन के बाद से दर्जी ने कसम खाई कि वह कभी किसी के साथ बुरा व्यवहार नहीं करेगा।

सीख 

इस कहानी से हमें यह अनमोल सीख मिलती है कि 'हमें दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए, जैसा हम खुद के लिए चाहते हैं।' (Do unto others as you would have them do unto you). किसी के साथ किया गया बुरा बर्ताव देर-सवेर हमारे पास ही लौटकर आता है, इसलिए हमेशा दयालु और मददगार बनें।

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