मनरेगा से बदली किसान की किस्मत, हजारीबाग के वासुदेव ने आम की खेती से बनाई लाखों की आय

हजारीबाग के किसान वासुदेव प्रसाद ने मनरेगा योजना से 3 एकड़ में आम का बाग लगाया। इस सीजन 50 क्विंटल आम बेचकर लाखों की आय हासिल कर किसानों के लिए मिसाल बने।

हजारीबाग के वासुदेव प्रसाद ने मनरेगा योजना की मदद से तीन एकड़ में आम का बाग तैयार किया। अब वे इस सीजन में 50 क्विंटल आम बेचकर लाखों रुपये की कमाई कर चुके हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले के वासुदेव प्रसाद ने मनरेगा योजना का लाभ उठाकर खेती के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति बदल दी है। कभी रसोइया का काम करने वाले वासुदेव आज तीन एकड़ में विकसित आम के बाग और मिश्रित खेती से लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।

मनरेगा योजना से शुरू हुई सफलता की नई कहानी

हजारीबाग जिले के टाटीझरिया प्रखंड के कोल्हू गांव निवासी वासुदेव प्रसाद ने यह साबित कर दिया कि यदि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से उपयोग किया जाए और मेहनत के साथ खेती की जाए, तो कृषि भी बेहतर आय का मजबूत माध्यम बन सकती है। कभी उत्तर प्रदेश में एक अधिकारी के घर रसोइया का काम करने वाले वासुदेव आज अपने गांव में सफल किसान के रूप में पहचान बना चुके हैं।

उन्होंने वर्ष 2021 में मनरेगा के तहत आम बागवानी योजना का लाभ लिया और तीन एकड़ जमीन पर आम का बाग तैयार किया। सरकारी सहायता के साथ उन्होंने अपनी बचत से भी उन्नत किस्म के आम के पौधे खरीदे और उनकी नियमित देखभाल की। चार से पांच वर्षों की मेहनत का परिणाम आज उन्हें अच्छी आमदनी के रूप में मिल रहा है।

इस सीजन में 50 क्विंटल आम बेचकर कमाए लाखों रुपये

वासुदेव प्रसाद ने बताया कि इस वर्ष अब तक वे अपने बगीचे से लगभग 50 क्विंटल आम बेच चुके हैं। बाजार में उनके आमों की कीमत 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल रही है। इससे उन्हें लाखों रुपये की आय प्राप्त हुई है। खास बात यह है कि बगीचे में अभी भी बड़ी संख्या में पेड़ों पर फल लगे हुए हैं, जिससे आने वाले दिनों में भी अच्छी कमाई की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी उन्होंने करीब 30 क्विंटल आम की बिक्री की थी। हर साल उत्पादन और आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे उनका खेती का मॉडल और अधिक सफल बनता जा रहा है।

मिश्रित खेती से सालभर हो रही अतिरिक्त आमदनी

वासुदेव केवल आम की खेती तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने अपने बगीचे में उपलब्ध खाली जगह का उपयोग मिश्रित खेती के लिए किया है। आम के पेड़ों के बीच वे अरहर, टमाटर, बैंगन जैसी नकदी फसलें भी उगाते हैं। इससे उन्हें पूरे वर्ष अतिरिक्त आय होती रहती है और खेती की लागत भी काफी हद तक संतुलित हो जाती है।

उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक, सही योजना और फसलों का विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

रसोइया से बने सफल किसान, अब दूसरों के लिए मिसाल

वासुदेव प्रसाद ने बताया कि वर्ष 1984 तक वे उत्तर प्रदेश में रसोइया के रूप में काम करते थे। बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने गांव लौटने और खेती को ही आजीविका बनाने का फैसला किया। शुरुआत में चुनौतियां जरूर थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे।

आज वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और अपने परिवार के साथ खेती-किसानी में जुटे हुए हैं। उनकी सफलता आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। स्थानीय लोग उन्हें आधुनिक और प्रगतिशील किसान के रूप में पहचानते हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, मेहनत और नई सोच अपनाकर खेती को लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है।

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