शिमला: हिमाचल प्रदेश में चीनी के लगातार बढ़ते दामों के बीच राज्य सरकार ने आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कदम उठाया है। सरकार ने 35,600 क्विंटल चीनी का विशेष ऑर्डर किया है, ताकि उचित मूल्य की दुकानों और सरकारी वितरण व्यवस्था के जरिए लोगों को चीनी उपलब्ध कराई जा सके। इसके साथ ही बाजार में जमाखोरी और कालाबाजारी पर नजर रखने के लिए उड़नदस्तों को भी सक्रिय किया गया है।
त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में तेजी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। देश के कई हिस्सों में खुदरा बाजार में चीनी के दाम 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। केंद्र सरकार ने भी उपलब्धता बढ़ाने और जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट और निरीक्षण जैसे कदम उठाए हैं।
हिमाचल सरकार का विशेष ऑर्डर इसी बढ़ती कीमत के बीच उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश है। 35,600 क्विंटल यानी 3,560,000 किलो चीनी की अतिरिक्त उपलब्धता से सरकारी वितरण प्रणाली में स्टॉक मजबूत होने की उम्मीद है। इससे उन उपभोक्ताओं को फायदा मिल सकता है जो सरकारी डिपुओं के माध्यम से आवश्यक वस्तुएं प्राप्त करते हैं।
सरकार ने केवल चीनी की खरीद बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दिया है, बल्कि बाजार में इसकी उपलब्धता और कीमतों की निगरानी भी तेज कर दी है। अधिकारियों और निरीक्षण टीमों को दुकानों तथा गोदामों में स्टॉक की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी कारोबारी द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक रखने या कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश किए जाने पर कार्रवाई की जा सकती है।
चीनी की कीमतों में तेजी को लेकर केंद्र स्तर पर भी जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर चिंता जताई गई है। खाद्य सचिव ने हाल में कहा था कि देश में चीनी की उपलब्धता पर्याप्त है और मौजूदा तेजी को केवल कमी से जोड़ना उचित नहीं है। सरकार ने जमाखोरी और सट्टेबाजी को भी कीमत बढ़ने की वजहों में शामिल किया है।
इसी वजह से हिमाचल में भी बाजार की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है। उड़नदस्ते अचानक दुकानों और गोदामों का निरीक्षण कर सकते हैं, जिससे कारोबारी निर्धारित नियमों के मुताबिक स्टॉक रखने और बिक्री करने के लिए बाध्य होंगे। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कृत्रिम तरीके से चीनी की कमी पैदा करके ग्राहकों से ज्यादा कीमत न वसूली जाए।
हिमाचल में सरकारी डिपुओं के जरिए बड़ी संख्या में परिवारों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की जाती है। ऐसे में चीनी का विशेष ऑर्डर सरकारी वितरण प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अतिरिक्त स्टॉक मिलने के बाद डिपुओं में चीनी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है और उपभोक्ताओं को खुले बाजार की बढ़ी हुई कीमतों पर निर्भरता कम हो सकती है।
चीनी की कीमतों में राष्ट्रीय स्तर पर हुई वृद्धि के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सरकार ने कम उत्पादन, मौसम से फसल को नुकसान, त्योहारी मांग, वैश्विक बाजार में कमजोर आपूर्ति और कुछ कारोबारियों की जमाखोरी जैसे कारणों का उल्लेख किया है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक 20 जुलाई से 20 अगस्त के बीच चीनी की कीमत में करीब 15.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
वहीं केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को टैरिफ रेट कोटा के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाकर त्योहारी सीजन में कीमतों पर दबाव कम करना है।
हिमाचल में राज्य सरकार की ओर से किया गया 35,600 क्विंटल का विशेष ऑर्डर इसी व्यापक स्थिति के बीच स्थानीय उपभोक्ताओं को राहत देने वाला कदम है। सरकार चाहती है कि सरकारी वितरण व्यवस्था में पर्याप्त स्टॉक रहे और बढ़ती कीमत का सीधा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर कम पड़े।
उड़नदस्तों की सक्रियता का एक और उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जा रही चीनी का लाभ वास्तविक उपभोक्ताओं तक पहुंचे। यदि बाजार में जमाखोरी होती है तो उपलब्ध स्टॉक होने के बावजूद कीमतें बढ़ सकती हैं। इसलिए खरीद के साथ निगरानी को भी जरूरी माना जा रहा है।
व्यापारियों के स्टॉक की जांच के दौरान उपलब्ध मात्रा, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड और निर्धारित स्टॉक सीमा जैसे बिंदुओं को देखा जा सकता है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित विभाग कार्रवाई कर सकता है। देश के दूसरे राज्यों में भी चीनी के गोदामों और थोक कारोबारियों के यहां स्टॉक सत्यापन की कार्रवाई शुरू की गई है।
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ पर्याप्त चीनी उपलब्ध करानी है, वहीं दूसरी तरफ बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखना है। अगर त्योहारी मांग बढ़ने के साथ आपूर्ति पर दबाव आता है तो कीमतों में और तेजी का खतरा हो सकता है। ऐसे में विशेष ऑर्डर और बाजार निगरानी दोनों को प्रभावी तरीके से लागू करना जरूरी होगा।
हिमाचल के उपभोक्ताओं के लिए सबसे अहम बात यह है कि सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए अतिरिक्त चीनी की व्यवस्था शुरू की है। आने वाले दिनों में डिपुओं में इसकी उपलब्धता और बाजार में कीमतों की स्थिति पर नजर बनी रहेगी।
फिलहाल 35,600 क्विंटल चीनी का विशेष ऑर्डर और जमाखोरी रोकने के लिए सक्रिय किए गए उड़नदस्ते हिमाचल सरकार की ओर से बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण की कोशिश हैं। अब देखना होगा कि अतिरिक्त स्टॉक बाजार और सरकारी वितरण प्रणाली में कितनी जल्दी पहुंचता है और इसका खुदरा कीमतों पर कितना असर पड़ता है।












