हरिद्वार में हिमंत बिस्वा सरमा ने किया पितरों का तर्पण, राहुल गांधी पर कसा तंज; बोले- चंद्रयान-मंगलयान में जाएंगे तो पूछना चमत्कार किया या नहीं

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हरिद्वार के नारायणी शिला मंदिर में पितरों का तर्पण किया। इसके बाद राहुल गांधी और विपक्ष के आंदोलन पर निशाना साधा।
हरिद्वार में हिमंत बिस्वा सरमा ने किया पितरों का तर्पण, राहुल गांधी पर कसा तंज; बोले- चंद्रयान-मंगलयान में जाएंगे तो पूछना चमत्कार किया या नहीं
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उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में शनिवार, 10 अक्टूबर को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा धार्मिक अनुष्ठान के लिए पहुंचे। यहां उन्होंने नारायणी शिला मंदिर में पूजा-अर्चना कर अपने पितरों के निमित्त तर्पण किया और परिवार तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। धार्मिक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उनका राजनीतिक अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दलों की ओर से किए जा रहे आंदोलन पर निशाना साधा। इसी दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर भी उन्होंने तंज कसा। सरमा ने कहा कि जब राहुल गांधी चंद्रयान और मंगलयान में जाएंगे, तब उनसे पूछना कि उन्होंने कोई चमत्कार किया है या नहीं। उनके इस बयान के बाद हरिद्वार में उनका दौरा धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर भी चर्चा में आ गया।

हिमंत बिस्वा सरमा शनिवार को पितृ अमावस्या के अवसर पर हरिद्वार पहुंचे थे। उन्होंने प्रसिद्ध नारायणी शिला मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और अपने पूर्वजों की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान किया। पितृ पक्ष के अंतिम दिन पितरों को याद करने और उनके निमित्त तर्पण करने की परंपरा हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। हरिद्वार में गंगा के तट और नारायणी शिला जैसे धार्मिक स्थलों पर इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सरमा ने भी इस मौके पर पूजा-अर्चना कर अपने पितरों का स्मरण किया। उन्होंने बताया कि वह पिछले करीब 12 वर्षों से नारायणी शिला मंदिर में पूजा करने के लिए आते रहे हैं। उनके अनुसार, यहां आकर उन्हें शांति का अनुभव होता है।

धार्मिक अनुष्ठान पूरा करने के बाद जब मुख्यमंत्री से राजनीतिक सवाल पूछे गए, तो उन्होंने दिल्ली में चल रहे विपक्षी आंदोलन पर प्रतिक्रिया दी। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस मुद्दे पर सरमा ने आंदोलन को विपक्ष की निराशा से जोड़ते हुए इसे तमाशा करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बड़ी संख्या में देशवासी खड़े हैं और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन से सरकार अपने कामकाज से पीछे हटने वाली नहीं है। यह उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया थी, जबकि विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग को लेकर उठाए जा रहे सवाल उनके आंदोलन का आधार हैं।

सरमा ने दावा किया कि आंदोलन में शामिल लोगों की तुलना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में खड़े लोगों की संख्या कहीं अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार विपक्ष के आरोपों से डरने वाली नहीं है और दबाव बनाने की कोशिशें सफल नहीं होंगी। उनके बयान से साफ था कि वह विपक्ष के प्रदर्शन को राजनीतिक विरोध के तौर पर देख रहे हैं और इसे सरकार की कार्यशैली पर निर्णायक असर डालने वाला कदम नहीं मानते। हालांकि, आंदोलन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के अपने तर्क और दावे हैं। विपक्ष चुनाव आयोग की भूमिका और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि सरमा ने प्रदर्शन की राजनीतिक उपयोगिता पर सवाल खड़े किए।

राहुल गांधी को लेकर पूछे गए सवाल पर भी असम के मुख्यमंत्री ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति देश की राष्ट्रपति हैं और उनसे कोई भी मुलाकात कर सकता है। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट में भी हर दिन हजारों लोग जाते हैं। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि जब वह चंद्रयान और मंगलयान में जाएंगे, तब उनसे पूछना कि उन्होंने कोई चमत्कार किया है या नहीं। यह टिप्पणी राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात के संदर्भ में पूछे गए सवाल के जवाब में की गई थी। सरमा ने अपने जवाब के जरिए राहुल गांधी की गतिविधियों को लेकर कटाक्ष किया और बातचीत को राजनीतिक बहस की ओर मोड़ दिया।

उनकी इस टिप्पणी ने राजनीतिक बयानबाजी को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया। भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच अलग-अलग मुद्दों पर आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। सरमा का बयान भी इसी राजनीतिक टकराव के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने अपनी टिप्पणी में राहुल गांधी को लेकर व्यंग्य किया, लेकिन यह उनके राजनीतिक विचार और प्रतिक्रिया के रूप में ही दर्ज किया जाना चाहिए। बयान से जुड़ी बहस में दोनों दलों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं, लेकिन इस खबर का मुख्य तथ्य यही है कि हरिद्वार में धार्मिक कार्यक्रम के बाद सरमा ने विपक्ष के आंदोलन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर टिप्पणी की।

मीडिया से बातचीत के दौरान सरमा ने एक अन्य राजनीतिक समूह को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जो लोग खुद को कॉकरोच कहते हैं, उनके बारे में चर्चा करने के बजाय उन लोगों की बात होनी चाहिए जो खुद को युवा शक्ति बताते हैं। यह टिप्पणी भी उनके राजनीतिक संवाद का हिस्सा रही। सरमा ने विपक्षी गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता के बीच किसकी बात सुनी जा रही है, इसका फैसला राजनीतिक समर्थन और जनभागीदारी से होता है। उन्होंने असम और पश्चिम बंगाल में भाजपा की चुनावी सफलताओं का भी जिक्र किया और कहा कि विपक्ष के विरोध से सरकार पीछे हटने वाली नहीं है।

हरिद्वार में सरमा का दौरा ऐसे दिन हुआ, जब पितृ अमावस्या के अवसर पर धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई थी। पितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। इस दिन अनेक लोग अपने पूर्वजों के लिए तर्पण, पूजा और अन्य धार्मिक कर्मकांड करते हैं। मान्यता के अनुसार, इन अनुष्ठानों के जरिए दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है और उनकी शांति की कामना की जाती है। हरिद्वार लंबे समय से पिंडदान और तर्पण जैसे धार्मिक कर्मों के लिए प्रमुख तीर्थस्थल रहा है। इसी कारण पितृ पक्ष के दौरान यहां देश के विभिन्न हिस्सों से लोग पहुंचते हैं।

नारायणी शिला मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद सरमा ने अपने परिवार और असम प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उनके दौरे का धार्मिक पक्ष उनके लिए व्यक्तिगत आस्था से जुड़ा रहा, जबकि मीडिया से बातचीत में दिए गए बयान ने इसे राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बना दिया। एक ही दौरे के दौरान धार्मिक अनुष्ठान और राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आने से उनके हरिद्वार प्रवास को दो अलग-अलग संदर्भों में देखा गया।

राजनीतिक दृष्टि से सरमा की टिप्पणियां विपक्ष के आंदोलन को लेकर भाजपा के रुख को भी सामने रखती हैं। उन्होंने प्रदर्शन को निराशा से प्रेरित बताया और कहा कि सरकार पर दबाव बनाने की कोशिशें कामयाब नहीं होंगी। वहीं, विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस तरह दोनों पक्षों के बीच चुनाव आयोग और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने हैं। सरमा ने अपने बयान में सरकार के समर्थन का दावा किया, लेकिन यह उनका राजनीतिक आकलन है; विपक्ष की मांगों और आंदोलन को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित घटनाक्रम और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

फिलहाल हरिद्वार में हिमंत बिस्वा सरमा का दौरा पितरों के तर्पण और राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी, दोनों वजहों से चर्चा में है। उन्होंने नारायणी शिला मंदिर में पूजा-अर्चना कर अपने पूर्वजों की शांति की कामना की और इसके बाद विपक्षी आंदोलन पर निशाना साधा। राहुल गांधी के चंद्रयान और मंगलयान में जाने वाली टिप्पणी के जरिए उन्होंने कांग्रेस नेता पर व्यंग्य किया। उनके बयान ने भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक बयानबाजी को एक नया संदर्भ दिया है, जबकि हरिद्वार में उनका धार्मिक कार्यक्रम पितृ अमावस्या की परंपरा से जुड़ा रहा।

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