हल्द्वानी बनभूलपुरा में रेलवे जमीन पर अवैध कब्जे हटाने का सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया। प्रभावित परिवारों को छह महीने तक प्रतिमाह 2,000 रुपये भत्ता मिलेगा। पीएम आवास योजना के तहत उन्हें पुनर्वास भी उपलब्ध कराया जाएगा।
नई दिल्ली। उत्तराखंड के हल्द्वानी में बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की जमीन पर अवैध अतिक्रमण के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम आदेश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण हटाना अनिवार्य है और कोई भी अपीलकर्ता उसी जगह पर रहने की मांग नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि रेलवे को जमीन का उपयोग तय करने का अधिकार है और सरकार तथा रेलवे को प्रभावित परिवारों की पहचान कर उचित कदम उठाना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिन परिवारों का विस्थापन होगा, उन्हें सरकार और रेलवे की तरफ से छह महीने तक प्रतिमाह 2 हजार रुपये भत्ते के रूप में दिए जाएंगे। इस आदेश के तहत प्रभावित लोगों का उचित पुनर्वास सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
रेलवे जमीन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन अत्यंत महत्वपूर्ण है। अदालत ने कहा कि इस जमीन पर ट्रैक विस्तार या अन्य रेलवे प्रोजेक्ट के लिए कदम उठाना आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि पात्र लोग प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के लिए आवेदन कर सकते हैं, खासकर वे जो EWS (Economically Weaker Section) कैटेगरी में आते हैं।
कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार से कहा कि नैनीताल जिले की रेवेन्यू ऑथोरिटी के माध्यम से एक कैंप आयोजित किया जाए। इस कैंप में सभी पात्र परिवार पीएम आवास योजना के फॉर्म भर सकें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बनभूलपुरा में पुनर्वास केंद्र बनाना जरूरी है और हर परिवार का प्रमुख व्यक्ति वहां उपस्थित होकर फॉर्म भरने की प्रक्रिया में शामिल होगा।
कोर्ट ने 19 मार्च यानि ईद के बाद इस कैंप को आयोजित करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, सामाजिक कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर पात्र परिवारों को पीएम आवास योजना के बारे में जानकारी देने का काम करना होगा।
अप्रिल में होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले पर अप्रैल में दोबारा सुनवाई होगी। अगली सुनवाई तक रेलवे जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सुरक्षा आदेश उत्तराखंड में अन्य अवैध कब्जों पर लागू नहीं होगा।
केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार और रेलवे ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। कोर्ट को बताया गया कि कुल 13 जमीनें फ्री होल्ड हैं और इनके लिए राज्य और रेलवे दोनों हर्जाना देंगे। रेलवे ने कहा कि ट्रैक विस्तार के लिए यह जमीन आवश्यक है और नदी की वजह से इलाके में विस्तार में दिक्कतें आ रही हैं।
इलाके में 50,000 लोग रह रहे हैं- वकील प्रशांत भूषण
याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि रेलवे ने बिना किसी स्पष्ट प्लान के 36 एकड़ जमीन मांगने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस इलाके में लगभग 50,000 लोग रह रहे हैं और 5,000 परिवारों को पीएम आवास योजना के तहत तुरंत मकान देना संभव नहीं है।
प्रशांत भूषण ने कोर्ट में एक मैप भी प्रस्तुत किया जिसमें विस्थापन और पुनर्वास की स्थिति को दर्शाया गया। उन्होंने कहा कि रेलवे के पास पहले से ही बनभूलपुरा के पास खाली जमीन उपलब्ध है और यदि रेलवे को वाकई में जमीन की जरूरत है तो उसका उपयोग उसी जमीन पर किया जा सकता है।
सरकारी जमीन पर कब्जा हटाना अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो लोग सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बसे हैं, उन्हें हटना ही होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सरकार की जमीन है और किसी को भी उसका कब्जा करने का अधिकार नहीं है।
प्रशांत भूषण ने कोर्ट में दलील दी कि कुछ जमीन बाद में रेगुलराइज की गई थी और पट्टे की जमीन पर कब्जा है। कोर्ट ने इस दलील पर नाराजगी जताई और कहा कि कब्जा करने वाले ही तय नहीं कर सकते कि रेलवे को किस जमीन का उपयोग करना है।
विस्थापन के लिए भत्ते का प्रावधान
केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि हल्द्वानी उत्तराखंड में रेलवे के विस्तार के लिए आखिरी जगह है। इसके बाद पहाड़ी इलाका शुरू हो जाता है। सरकार ने कहा कि विस्थापन के बाद जो परिवार पात्र होंगे, उन्हें छह महीने तक भत्ता दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि हर परिवार को उचित पुनर्वास और वित्तीय सहायता मिल सके। सरकार ने यह भी कहा कि जमीन पर ट्रैक विस्तार की सख्त आवश्यकता है और नदी की वजह से यह काम और महत्वपूर्ण हो जाता है।
प्रशांत भूषण का सवाल- क्या सभी को मकान मिलेगा?
वकील प्रशांत भूषण ने सवाल उठाया कि यहां लगभग 30,000 लोग पिछले 60-70 साल से रह रहे हैं और सभी को मकान देना संभव नहीं है। उन्होंने दिल्ली की झुग्गी नीति का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी मकान वितरण में कट-ऑफ डेट का पालन किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट के CJI सूर्यकांत ने इस पर कहा कि कोर्ट खराब परिस्थितियों में झुग्गियों में रहने वालों के प्रति पूरी संवेदनशीलता रखता है। सभी को बेहतर और सुरक्षित रहने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए योजना और संसाधनों का सही उपयोग जरूरी है।
पीएम आवास योजना के तहत पुनर्वास
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए कि नैनीताल के जिलाधिकारी और SDM हल्द्वानी इस प्रक्रिया में लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रदान करें। पात्र परिवार पीएम आवास योजना के तहत आवेदन भरें और उन्हें घर मिल सके, इसे सुनिश्चित किया जाए।
सामाजिक कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर पात्र परिवारों को योजना की जानकारी देनी होगी। बनभूलपुरा में पुनर्वास केंद्र बनाना और हर परिवार के प्रमुख व्यक्ति को फॉर्म भरने के लिए उपस्थित कराना अनिवार्य होगा।









