होली के मौके पर पेट्रोनेट LNG 279 रुपये, महानगर गैस 1,110 रुपये पर ट्रेड

होली के मौके पर पेट्रोनेट LNG 279 रुपये, महानगर गैस 1,110 रुपये पर ट्रेड

होली के मौके पर भारतीय LNG कंपनियों के शेयर गिरावट में रहे। पेट्रोनेट LNG 9.6%, महानगर गैस 8.2%, और GAIL 6% टूटे। मिडिल ईस्ट संकट और कतर शटडाउन के कारण सप्लाई में रुकावट आई, जिससे निवेशकों ने बिकवाली तेज की।

Share Market: भारत की प्रमुख LNG कंपनियों के शेयर बुधवार, 4 मार्च को बाजार खुलते ही गिरावट के साथ ट्रेड करने लगे। पेट्रोनेट LNG का शेयर 9.6 प्रतिशत टूटकर 279.45 रुपये पर आ गया, जबकि महानगर गैस का शेयर 8.2 प्रतिशत गिरकर 1,110.45 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। GAIL (इंडिया) के शेयर में भी लगभग 6 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई और इंद्रप्रस्थ गैस 5 प्रतिशत कमजोर होकर 158.70 रुपये पर कारोबार कर रही थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में सप्लाई में रुकावट और ग्लोबल LNG कीमतों में उछाल का असर सीधे इन कंपनियों के शेयरों पर पड़ा है। निवेशकों ने इस अनिश्चितता के चलते बिकवाली तेज कर दी, जिससे शेयर मार्केट में दबाव बढ़ गया।

मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ीं LNG कीमतें

एशियाई स्पॉट LNG की कीमतें बुधवार को लगभग $25.40 प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट तक पहुंच गईं, जो 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। मिडिल ईस्ट में संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग रुकावट के कारण सप्लाई में कमी आई है।

कतर ने अपनी बड़ी एक्सपोर्ट फैसिलिटीज को शटडाउन कर दिया, जिससे ग्लोबल LNG मार्केट में दबाव बढ़ गया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट के कारण LNG शिपिंग की लागत तेजी से बढ़ गई और डेली सप्लाई का किराया 40 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया। इन फैक्टर्स ने निवेशकों के डर को बढ़ाया और भारतीय कंपनियों के शेयरों में गिरावट की वजह बनी।

कौन-सी कंपनी कितना प्रभावित हुई

पेट्रोनेट LNG ने सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की, इसके बाद महानगर गैस, GAIL और इंद्रप्रस्थ गैस का नंबर आया। विश्लेषकों के अनुसार इन कंपनियों की फाइनेंशियल स्ट्रेंथ अच्छी है, लेकिन ग्लोबल सप्लाई चेन में अनिश्चितता के कारण अल्पकालिक दबाव बढ़ गया है।

पेट्रोनेट LNG का शेयर 279.45 रुपये पर पहुंच गया, महानगर गैस 1,110.45 रुपये पर और GAIL लगभग 155.25 रुपये पर ट्रेड कर रही थी। इंद्रप्रस्थ गैस का शेयर 158.70 रुपये पर कारोबार कर रहा था।

कतर का शटडाउन

कतर ग्लोबल LNG सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है, जिसका बड़ा हिस्सा भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे एशियाई देशों को जाता है। कतर के फैसिलिटी शटडाउन और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट के कारण सप्लाई में कमी आई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत और चीन पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। भारत को अपनी LNG इंपोर्ट जरूरतों के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं। कुछ खरीदार महंगे स्पॉट कार्गो को प्रीमियम पर खरीदने के बजाय कोयले या अन्य एनर्जी ऑप्शन अपना सकते हैं।

कंपनियों की रणनीति

ग्लोबल मार्केट में सप्लाई रिस्क बढ़ने के कारण भारतीय LNG कंपनियों को अपने पोर्टफोलियो और डाइवर्सिफिकेशन स्ट्रेटेजी पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव बाजार का हिस्सा हैं, लेकिन कंपनियों की दीर्घकालिक मजबूती मजबूत बनी हुई है।

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