ओटीटी और फिल्म इंडस्ट्री में अपनी दमदार पहचान बना चुकीं अभिनेत्री Shweta Tripathi एक बार फिर थिएटर की दुनिया को लेकर चर्चा में हैं। अपने नए नाटक ‘एक्सटर्नल अफेयर्स’ के जरिए वे आधुनिक जीवन, रिश्तों और भावनात्मक दूरी जैसे विषयों को मंच पर पेश कर रही हैं।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: आज के डिजिटल युग में जब मोबाइल स्क्रीन, रील्स और तेज़ रफ्तार कंटेंट लोगों का ध्यान कुछ ही सेकंड में भटका देते हैं, ऐसे समय में थिएटर करना और उससे दर्शकों को जोड़ना आसान नहीं रह गया है। लोग अब लंबी बातचीत, गहरी चुप्पी और यहां तक कि खुद के साथ अकेले समय बिताने से भी बचते नजर आते हैं।
इसी बदलते माहौल में अभिनेत्री Shweta Tripathi अपने नए नाटक ‘एक्सटर्नल अफेयर्स’ के जरिए रिश्तों, भावनाओं और इंसानी जुड़ाव की गहराई को सामने ला रही हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि आज थिएटर सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह एक जरूरी अनुभव बनता जा रहा है, जो लोगों को खुद से और समाज से फिर से जोड़ने का काम करता है।
“थिएटर आज इमोशनल डिटॉक्स जैसा लगता है”
श्वेता त्रिपाठी का मानना है कि तेज़ रफ्तार डिजिटल दुनिया में थिएटर एक जरूरी ठहराव (pause) की तरह है। उनके अनुसार, लोग अब लगातार स्क्रीन से जुड़े रहते हैं, लेकिन भावनात्मक रूप से अलग होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि थिएटर दर्शकों को एक साझा अनुभव देता है—जहां लोग एक साथ हंसते हैं, चुप रहते हैं और भावनाओं को महसूस करते हैं। उनके अनुसार, यही अनुभव आज के समय में “इमोशनल डिटॉक्स” जैसा हो गया है।
श्वेता ने बातचीत में कहा कि आज की सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग हर खाली पल को मोबाइल से भर देते हैं। उनके मुताबिक, लोग अब रुककर सोचते नहीं, हर समय कुछ न कुछ देखने की आदत बन चुकी है. ध्यान देने की क्षमता लगातार कम हो रही है. उन्होंने कहा कि थिएटर में दर्शकों को 90 मिनट तक बिना फोन के एक कहानी के साथ रहना पड़ता है, जो आज के समय में एक “क्रांतिकारी अनुभव” जैसा है।
डिजिटल युग में भावनात्मक दूरी बढ़ी

श्वेता त्रिपाठी के अनुसार, सोशल मीडिया ने लोगों को जोड़ तो दिया है, लेकिन भावनात्मक रूप से दूरी भी बढ़ा दी है। वे कहती हैं कि आज लोगों के पास बोलने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन सुनने की क्षमता कम होती जा रही है। थिएटर इस अंतर को भरता है क्योंकि वहां कोई एडिट, कट या एल्गोरिदम नहीं होता—सिर्फ लाइव इंसानी भावनाएं होती हैं।
अपने नए थिएटर प्रोजेक्ट ‘एक्सटर्नल अफेयर्स’ के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि यह नाटक रिश्तों और आधुनिक डेटिंग कल्चर पर आधारित है। यह कहानी दर्शाती है कि, आज रिश्ते विकल्पों से भरे हैं. डिजिटल डेटिंग के बावजूद जुड़ाव कम हो रहा है. लोग एक-दूसरे को समझने से ज्यादा विकल्प खोज रहे हैं. श्वेता के अनुसार, यह नाटक आधुनिक रिश्तों की उलझनों और भावनात्मक जटिलताओं को उजागर करता है।
थिएटर बनाम कैमरा: अनुभव का फर्क
थिएटर और फिल्म/कैमरा अभिनय के फर्क पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मंच पर गलती छुपाई नहीं जा सकती। उन्होंने बताया:
- थिएटर में हर पल लाइव होता है
- दर्शक प्रतिक्रिया तुरंत देते हैं
- ऊर्जा पूरे हॉल में फैलती है
- कोई रीटेक या एडिटिंग संभव नहीं होती
उनके अनुसार, यही कारण है कि थिएटर कलाकार को अधिक सचेत और जीवंत बनाता है। श्वेता त्रिपाठी ने यह भी साझा किया कि उन्होंने अपने जीवनसाथी के साथ पहली बार मंच साझा किया है। उन्होंने कहा कि दोनों के अभिनय के तरीके अलग हैं, लेकिन यही अंतर उन्हें एक-दूसरे से सीखने में मदद करता है। उनका मानना है कि जब दो कलाकार साथ काम करते हैं तो उनका विकास और भी तेजी से होता है।










