कॉटन इंपोर्ट ड्यूटी खत्म: कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत, टेक्सटाइल सेक्टर में आएगी तेजी

कॉटन आयात शुल्क समाप्त होने से भारतीय कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत मिली है। इस फैसले से कच्चे माल की लागत घटने, उत्पादन बढ़ने और टेक्सटाइल सेक्टर में नई तेजी आने

भारत सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए कपास (Cotton) पर लगने वाली 11% आयात शुल्क को पूरी तरह खत्म कर दिया है। इस फैसले के बाद देश के कपड़ा उद्योग में सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है और कई टेक्सटाइल कंपनियों के शेयरों में भी जोरदार तेजी दर्ज की गई है।

बिजनेस न्यूज़: जहां एक तरफ देशभर में महंगाई का दबाव आम जनता पर महसूस किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ी राहत दी है। भारत सरकार ने हाल ही में कपास (Cotton) के आयात पर लगाए जाने वाले टैक्स को हटाने का फैसला किया है। इस कदम का सीधा फायदा देश के कपड़ा उद्योग को मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इससे कच्चे माल की लागत कम होगी और उत्पादन पर आने वाला खर्च भी घटेगा। 

यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों और सप्लाई चेन दबाव के कारण टेक्सटाइल इंडस्ट्री पहले से ही लागत बढ़ने की चुनौती का सामना कर रही थी।

30 अक्टूबर तक लागू रहेगी राहत

सरकारी घोषणा के अनुसार यह राहत अस्थायी रूप से 1 जून 2026 से 30 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी। इस अवधि में कपास के आयात पर सभी प्रकार की कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है। इस निर्णय का उद्देश्य घरेलू टेक्सटाइल कंपनियों को सस्ती और बेहतर गुणवत्ता वाली कपास उपलब्ध कराना है, ताकि उत्पादन लागत में कमी आए और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ सके।

शेयर बाजार में टेक्सटाइल कंपनियों में तेजी

इस फैसले के तुरंत बाद टेक्सटाइल सेक्टर के शेयरों में मजबूत तेजी देखने को मिली।

  • वर्धमान टेक्सटाइल्स
  • गोकलदास एक्सपोर्ट्स
  • अरविंद
  • वेलस्पन लिविंग
  • ट्राइडेंट
  • केपीआर मिल
  • रेमंड लाइफस्टाइल

इन कंपनियों के शेयरों में 2% से 7% तक की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, Indo Count Industries के शेयरों में सबसे ज्यादा करीब 11% की उछाल देखने को मिली, जो इस फैसले से सबसे अधिक लाभ पाने वाली कंपनियों में से एक मानी जा रही है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार का मानना है कि आयात शुल्क हटाने से:

  • घरेलू उद्योग को सस्ती कपास उपलब्ध होगी
  • उत्पादन लागत में कमी आएगी
  • निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
  • टेक्सटाइल वैल्यू चेन मजबूत होगी

यह निर्णय खासकर ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। Apparel Export Promotion Council के चेयरमैन ए. सक्थिवल ने कहा कि हाल के महीनों में कपास और यार्न की बढ़ती कीमतों ने MSME इकाइयों पर दबाव डाला था। अब ड्यूटी हटने से इन लागतों में राहत मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने यह भी कहा कि स्पिनिंग मिलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लागत में कमी का लाभ ग्राहकों और एक्सपोर्ट मार्केट तक पहुंचे। Confederation of Indian Textile Industry ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक बड़ी राहत है। संस्था के अनुसार, यह नीति भारत को 2030 तक 100 अरब डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर सकती है।

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