38 साल बाद न्यूजीलैंड ने भारत की सरजमीं पर इतिहास रच दिया। इंदौर के होल्कर स्टेडियम में खेले गए तीसरे और निर्णायक वनडे मुकाबले में कीवियों ने भारत को 41 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली।
स्पोर्ट्स न्यूज़: भारतीय क्रिकेट के लिए यह मुकाबला ऐतिहासिक तो रहा, लेकिन कारण खुशी का नहीं था। 38 साल के लंबे इंतजार के बाद न्यूजीलैंड ने भारत की सरजमीं पर द्विपक्षीय वनडे सीरीज जीतकर नया इतिहास रच दिया। इंदौर के होल्कर स्टेडियम में खेले गए तीसरे और निर्णायक वनडे मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 41 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। यह भारत में न्यूजीलैंड की आठवीं कोशिश में पहली वनडे सीरीज जीत है। इससे पहले 1988 से अब तक कीवी टीम हर बार असफल रही थी।
इस हार के साथ भारत का घरेलू वनडे क्रिकेट में एक और मजबूत रिकॉर्ड भी टूट गया। होल्कर स्टेडियम में यह भारत की पहली वनडे हार रही, जहां टीम इंडिया इससे पहले लगातार सात मुकाबले जीत चुकी थी। इसके अलावा, अक्टूबर 2022 के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब टॉस जीतने के बावजूद भारत को घरेलू वनडे मैच गंवाना पड़ा। टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने के बाद भारत की लगातार 13 घरेलू वनडे जीत का सिलसिला भी समाप्त हो गया।
मिचेल और फिलिप्स ने पलटा मैच का रुख

रविवार को खेले गए निर्णायक मुकाबले में भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। शुरुआती ओवरों में यह फैसला सही भी साबित हुआ, जब न्यूजीलैंड का स्कोर 58 रन पर तीन विकेट हो गया था। लेकिन इसके बाद डेरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स ने भारतीय गेंदबाजों के सामने मजबूती से मोर्चा संभाला।
मिचेल (137 रन) और फिलिप्स (106 रन) ने चौथे विकेट के लिए 219 रन की शानदार साझेदारी कर न्यूजीलैंड की पारी की दिशा ही बदल दी। मिचेल ने एक छोर से पारी को संभाले रखा, जबकि फिलिप्स ने आक्रामक अंदाज में रन गति को तेज किया। दोनों बल्लेबाजों के शतकों की बदौलत न्यूजीलैंड ने 50 ओवर में आठ विकेट पर 337 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।
भारतीय गेंदबाजों की शुरुआत मजबूत
भारतीय तेज गेंदबाजों ने शुरुआती ओवरों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। अर्शदीप सिंह ने पहले ही ओवर में हेनरी निकोल्स को शून्य पर आउट कर भारत को बड़ी सफलता दिलाई। उन्होंने 10 ओवर में 63 रन देकर तीन विकेट झटके। वहीं हर्षित राणा ने भी तेज और सटीक गेंदबाजी करते हुए 3/84 का प्रदर्शन किया और डेवोन कॉनवे को लगातार तीसरी बार आउट किया।
हालांकि, मध्य ओवरों में भारतीय गेंदबाज मिचेल और फिलिप्स की साझेदारी को तोड़ने में नाकाम रहे। छोटी बाउंड्री और गेंद के नरम होने का फायदा उठाकर न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने खुलकर शॉट खेले।

लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की लड़खड़ाती शुरुआत
338 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। कप्तान रोहित शर्मा 11 रन बनाकर आउट हुए, जबकि शुभमन गिल 23 रन ही बना सके। श्रेयस अय्यर और केएल राहुल भी बड़ी पारी खेलने में असफल रहे, जिससे भारत का स्कोर 71/4 हो गया। इसके बाद विराट कोहली ने एक छोर संभालते हुए पारी को संभाला। उन्होंने नीतीश कुमार रेड्डी के साथ अहम साझेदारी की और भारत को मैच में बनाए रखा।
विराट कोहली ने इंदौर में दबाव के बीच शानदार बल्लेबाजी करते हुए 108 गेंदों में 124 रन बनाए। यह उनके करियर का 85वां अंतरराष्ट्रीय शतक और वनडे में 54वां शतक रहा। न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे क्रिकेट में यह उनका सातवां शतक है, जिससे वह इस टीम के खिलाफ सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए।
कोहली की पारी में संयम, आक्रामकता और अनुभव का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला। हालांकि, 292 के स्कोर पर उनके आउट होते ही भारत की उम्मीदें भी लगभग खत्म हो गईं। अंतिम ओवरों में हर्षित राणा ने 43 गेंदों पर 52 रन की तेजतर्रार पारी खेलकर कुछ देर के लिए मुकाबले में रोमांच पैदा किया, लेकिन बढ़ता रनरेट भारतीय टीम पर भारी पड़ा। पूरी टीम 46 ओवर में 296 रन पर सिमट गई और न्यूजीलैंड ने 41 रन से मैच जीत लिया।











