भारतीय क्रिकेट टीम एक बार फिर घरेलू सरजमीं पर टेस्ट सीरीज हार गई। दक्षिण अफ्रीका ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में भारत को 2-0 से मात दी। कोलकाता में खेले गए पहले टेस्ट में टीम इंडिया को 30 रन से हार का सामना करना पड़ा, जबकि गुवाहाटी में दूसरे टेस्ट में 408 रन के रिकॉर्ड अंतर से हार का सामना करना पड़ा, जो टेस्ट क्रिकेट में भारत की अब तक की सबसे बड़ी हार है।
स्पोर्ट्स न्यूज़: भारतीय क्रिकेट टीम को घरेलू सरजमीं पर एक और करारी हार का सामना करना पड़ा है। दक्षिण अफ्रीका ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में भारत का 2-0 से क्लीन स्वीप करते हुए 25 साल पुराना इतिहास दोहराया। इस ऐतिहासिक जीत के नायक बने अनुभवी ऑफ स्पिनर साइमन हार्मर, जिन्होंने पूरी सीरीज में भारतीय बल्लेबाजी को पूरी तरह बेबस कर दिया। हार्मर को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुना गया।
गुवाहाटी टेस्ट में भारत को 408 रन के रिकॉर्ड अंतर से हार झेलनी पड़ी, जो अब तक की घरेलू टेस्ट क्रिकेट में भारत की सबसे बड़ी हार मानी जा रही है। इस मुकाबले की दूसरी पारी में हार्मर ने 6 विकेट झटके, जबकि पूरे मैच में उनके खाते में 9 विकेट आए। इससे पहले कोलकाता टेस्ट में भी उन्होंने 8 विकेट लेकर भारत की कमर तोड़ दी थी। कुल मिलाकर, उन्होंने इस सीरीज में 17 विकेट चटकाए, जबकि भारत में अब तक खेले 4 टेस्ट मैचों में उनके नाम 27 विकेट हो चुके हैं।
‘यह मेरे करियर का खास पल है’ – हार्मर
‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ बनने के बाद साइमन हार्मर ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा,
'पिछले टेस्ट के बाद भी मैंने कहा था कि यह मेरे लिए एक लंबा और भावनात्मक सफर रहा है। करीब 10 साल बाद भारत लौटना और यहां इस तरह का प्रदर्शन करना मेरे लिए बहुत खास है। भारत जैसी मजबूत टीम को उनके घर में हराना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। यहां पांच विकेट लेना और जीत में योगदान देना मेरे करियर के यादगार पलों में शामिल रहेगा।'
हार्मर ने भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ अपनी रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि उन्होंने पिच और गेंद की स्थिति को ध्यान में रखते हुए गेंदबाजी की। दूसरी पारी में हमने देखा कि करीब 40 ओवर बाद गेंद नरम हो गई थी। पिच टूटने लगी थी और फुटमार्क्स बनने लगे थे। हमने इसी का फायदा उठाया। कुछ गेंदें ऐसी थीं जो अचानक ज्यादा स्पिन हो रही थीं और वहीं से हमें सफलता मिली।

उन्होंने ऋषभ पंत को मिली एक खास गेंद का जिक्र करते हुए कहा, अगर आप उस विकेट को ध्यान से देखें, तो आपको समझ आएगा कि किस तरह पिच की हालत ने उस गेंद को खतरनाक बना दिया।
कप्तान की चाल और बदला हुआ छोर बना टर्निंग पॉइंट
हार्मर ने यह भी बताया कि कप्तान टेम्बा बावुमा के कहने पर उन्होंने गेंदबाजी का छोर बदला, जिससे उन्हें बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ ज्यादा मदद मिली। जब मैंने छोर बदला तो महसूस हुआ कि इस एंड से गेंदबाजी करते हुए स्टंप-टू-स्टंप ज्यादा असरदार हो रही थी। टेम्बा ने यह सुझाव दिया और वही फैसला मैच का टर्निंग पॉइंट बन गया। इसके बाद पुरानी गेंद भी सीधी दिशा से ज्यादा स्पिन करने लगी।
हार्मर ने टीम की फील्डिंग की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, एडेन मार्करम ने स्लिप में शानदार कैच लपके और मार्को यानसन ने भी अहम मौकों पर बेहतरीन फील्डिंग की। जब गेंदबाजी के साथ फील्डिंग भी मजबूत हो, तो दबाव में बल्लेबाज टूट ही जाता है।









