इंदौर नगर निगम में वंदे मातरम को लेकर विवाद: बजट सत्र में हंगामा, राजनीतिक टकराव तेज

इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में ‘वंदे मातरम’ को लेकर विवाद बढ़ गया, जिससे सदन में हंगामा और राजनीतिक टकराव देखने को मिला। जिससे राजनीति माहौल गरमा गया ।

मध्य प्रदेश के Indore नगर निगम में बजट सत्र के दौरान उस समय तीखा विवाद खड़ा हो गया, जब कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार कर दिया। इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस पार्षदों के बीच तीखी बहस और नारेबाजी हुई। 

इंदौर: नगर निगम इंदौर में मंगलवार को 8,455 करोड़ रुपए के बजट पर चर्चा के दौरान सदन में हंगामा हो गया। प्रश्नकाल के बीच कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम द्वारा ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार करने पर भाजपा पार्षद भड़क उठे, और अपनी सीटों से उठकर सभापति के आसन के पास पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। 

इससे कुछ समय तक सदन में शोर-शराबा रहा और कार्यवाही प्रभावित हुई। हालात संभालने के लिए सभापति मुन्नालाल यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने फौजिया को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए। 

इस पर फौजिया ने कहा कि उन्हें वह नियम दिखाया जाए, जिसमें इसे अनिवार्य बताया गया हो, हालांकि बाद में वे खुद ही सदन से बाहर चली गईं। बाहर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके धर्म में इसकी अनुमति नहीं है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया।


वंदे मातरम  विवाद: सदन में बढ़ा तनाव

कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम द्वारा राष्ट्रगीत गाने से इनकार करने के बाद भाजपा पार्षदों ने इसका कड़ा विरोध किया। वे अपनी सीटों से उठकर सभापति के आसन के पास पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी।

स्थिति बिगड़ती देख सभापति मुन्नालाल यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने फौजिया शेख अलीम को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए।

फौजिया ने इस दौरान कहा कि उन्हें वह नियम दिखाया जाए, जिसमें ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य बताया गया हो। बाद में वे स्वयं ही सदन से बाहर चली गईं।

धर्म का हवाला, बयान से बढ़ी संवेदनशीलता

सदन से बाहर मीडिया से बातचीत में फौजिया शेख अलीम ने कहा कि उनका धर्म इस्लाम उन्हें ‘वंदे मातरम’ गाने की अनुमति नहीं देता। उनके इस बयान ने मामले को और संवेदनशील बना दिया।

वहीं, कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ गाना व्यक्तिगत आस्था का विषय हो सकता है, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का सम्मान करती है।

‘गद्दार’ टिप्पणी पर फिर भड़का विवाद

सदन में तनाव उस समय और बढ़ गया, जब कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia को ‘गद्दार’ कह दिया।

इस टिप्पणी पर भाजपा पार्षदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और सदन में फिर से हंगामा शुरू हो गया। लगातार विरोध के बाद भदौरिया को माफी मांगनी पड़ी, जिसके बाद ही कार्यवाही दोबारा शुरू हो सकी।

ईरान के नेता को श्रद्धांजलि पर भी विवाद

बजट पेश होने से पहले कांग्रेस पार्षद रूबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei को श्रद्धांजलि दी।

इस बयान के बाद भाजपा पार्षदों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए और विरोध जताया। इससे सदन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।

निगम संपत्तियों और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी उठे सवाल

राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस पार्षदों ने नगर निगम की संपत्तियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया कि कई मामलों में अधिकारी सही जानकारी देने में असमर्थ रहते हैं और जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते हैं। इस पर महापौर ने जवाब देते हुए कहा कि सभी सवालों के उत्तर 7 दिनों के भीतर उपलब्ध कराए जाएंगे।

दो दिनों से जारी विवाद

यह विवाद केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहा। जानकारी के अनुसार, दूसरे दिन भी सदन में तनाव बना रहा।

दर्शक दीर्घा में कुछ लोगों द्वारा पोस्टर दिखाने और नारेबाजी करने की भी बात सामने आई। भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि यह सब विपक्ष के इशारे पर किया गया, जबकि कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया।

लोकतांत्रिक मंच पर बढ़ती वैचारिक टकराव की झलक

इंदौर नगर निगम का यह घटनाक्रम दर्शाता है कि स्थानीय निकायों में भी अब वैचारिक, धार्मिक और राजनीतिक मुद्दे प्रमुख रूप से उभर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवाद विकास और प्रशासनिक मुद्दों से ध्यान भटका सकते हैं, जो आम नागरिकों के लिए अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

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