India 5G Growth: 2030 तक 62% भारतीय अपनाएंगे 5G, BSNL की लॉन्चिंग से बढ़ेगी पहुंच

GSMA के अनुमान के मुताबिक 2030 तक भारत में 62% लोग 5G अपनाएंगे। BSNL की 5G लॉन्चिंग से देश में हाई-स्पीड नेटवर्क की पहुंच बढ़ सकती है।

GSMA के अनुमान के मुताबिक भारत में 2030 तक 62% लोग 5G अपना सकते हैं। यह एशिया-पैसिफिक के 50% औसत से अधिक है। BSNL की संभावित 5G लॉन्चिंग से देश में इसकी पहुंच और बढ़ सकती है।

Tech: भारत में 5G अपनाने की रफ्तार लगातार तेज हो रही है और GSMA के अनुमान के अनुसार 2030 तक देश के 62% लोग इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के 50% औसत से काफी अधिक है। फिलहाल Jio, Airtel और Vodafone Idea 5G सेवाएं दे रही हैं, जबकि BSNL भी दिसंबर तक अपनी 5G सेवा शुरू करने की तैयारी में है।

2030 तक 62% भारतीयों के 5G अपनाने का अनुमान

भारत में 5G तकनीक का विस्तार तेजी से हो रहा है। GSMA की रिपोर्ट के अनुसार, देश में 5G अपनाने की दर आने वाले वर्षों में लगातार बढ़ सकती है। अनुमान है कि 2030 तक भारत में 62% लोग 5G नेटवर्क का इस्तेमाल करने लगेंगे।

यह आंकड़ा एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के अनुमानित 50% औसत से अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि भारत में मोबाइल यूजर्स नई नेटवर्क तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं।

फिलहाल देश में रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया यानी Vi की ओर से वायरलेस 5G सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL भी 5G नेटवर्क शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

BSNL की 5G सर्विस से बढ़ सकती है पहुंच

BSNL के 5G नेटवर्क को लेकर भी तैयारी चल रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकारी कंपनी दिसंबर 2026 तक अपनी 5G सेवा उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है।

BSNL के नेटवर्क में आने से 5G सेवा का विस्तार और तेज हो सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां निजी टेलीकॉम कंपनियों की सेवाओं की पहुंच सीमित है, वहां सरकारी नेटवर्क की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

भारत में 5G के बढ़ते इस्तेमाल से तेज इंटरनेट, बेहतर कनेक्टिविटी और डिजिटल सेवाओं के विस्तार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसका असर शिक्षा, कारोबार, स्वास्थ्य, डिजिटल भुगतान और अन्य ऑनलाइन सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

अब नेटवर्क की कमी से ज्यादा जरूरी डिजिटल अपनाने की चुनौती

GSMA के मुताबिक भारत और दक्षिण एशिया में मोबाइल नेटवर्क की पहुंच से जुड़ी समस्या पहले की तुलना में काफी कम हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की पहुंच नहीं थी, उनका हिस्सा पहले करीब 30% था, जो अब 5% से भी कम रह गया है।

ऐसे में अगली बड़ी चुनौती केवल नेटवर्क पहुंचाने की नहीं, बल्कि लोगों को मोबाइल इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का प्रभावी इस्तेमाल करने में सक्षम बनाने की है।

किफायती डेटा और स्मार्टफोन की उपलब्धता, डिजिटल कौशल, इंटरनेट की उपयोगिता को लेकर जागरूकता, भरोसा और ऑनलाइन सुरक्षा जैसे मुद्दे अब मोबाइल इंटरनेट अपनाने की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं।

BharatNet और PMGDISHA से डिजिटल पहुंच बढ़ाने की कोशिश

भारत सरकार ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में डिजिटल कनेक्टिविटी और डिजिटल कौशल बढ़ाने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। इनमें BharatNet और PMGDISHA प्रमुख पहल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, PMGDISHA के तहत 6.4 करोड़ से अधिक ग्रामीण लोगों को बुनियादी डिजिटल कौशल का प्रशिक्षण दिया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को इंटरनेट, डिजिटल सेवाओं और ऑनलाइन सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए सक्षम बनाना है।

5G के विस्तार के साथ डिजिटल कौशल और ऑनलाइन सुरक्षा पर ध्यान बढ़ाना भी जरूरी होगा। भारत में 5G अपनाने की तेज रफ्तार के बाद आने वाले वर्षों में 6G तकनीक की तैयारी पर भी जोर बढ़ने की उम्मीद है।

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