भारत सरकार ने 2030 तक देश में 6G सेवाएं शुरू करने और भारत को 6G तकनीक में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में तैयारियां तेज कर दी हैं। 6G अलायंस के तहत सात वर्किंग ग्रुप्स स्पेक्ट्रम, डिवाइस, रिसर्च और इनोवेशन समेत विभिन्न क्षेत्रों पर काम कर रहे हैं।
Tech: भारत सरकार ने 6G तकनीक के विकास और 2030 तक देश में इसकी शुरुआत के लक्ष्य को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 6G अलायंस की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित टीमों को समन्वय के साथ काम करने और भारत को वैश्विक 6G इकोसिस्टम में अग्रणी बनाने पर जोर दिया।
6G मिशन को गति देने के लिए सरकार की नई रणनीति
भारत सरकार ने अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक 6G को लेकर अपनी रणनीति को और तेज कर दिया है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा आयोजित बैठक में भारत 6G अलायंस (B6GA) की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में केंद्रीय संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी, दूरसंचार सचिव अमित अग्रवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक भारत में 6G सेवाओं की शुरुआत करना और देश को इस तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति तक पहुंचाना है। इसके लिए सरकार उद्योग, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स और दूरसंचार कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दे रही है।
सात वर्किंग ग्रुप्स संभाल रहे हैं अलग-अलग जिम्मेदारियां
6G अलायंस के तहत कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए सात अलग-अलग वर्किंग ग्रुप्स बनाए गए हैं। ये समूह स्पेक्ट्रम प्रबंधन, 6G डिवाइस निर्माण, नई तकनीकों के अनुसंधान एवं विकास, एप्लिकेशन इकोसिस्टम, बिजनेस मॉडल, पर्यावरणीय स्थिरता और वैश्विक मानकों जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर काम कर रहे हैं।
बैठक के दौरान टेलीकॉम स्टैंडर्ड्स डेवलपमेंट सोसाइटी इंडिया (TSDSI) ने 6G तकनीक के मानकों को विकसित करने की दिशा में हो रही प्रगति की जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने सभी टीमों से आपसी समन्वय बढ़ाने और उन क्षेत्रों की पहचान करने को कहा, जहां साझा प्रयासों से बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
रिसर्च, पेटेंट और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर रहेगा फोकस
सरकार के अनुसार, 6G अलायंस से जुड़े सदस्यों द्वारा 5G और 6G तकनीकों से संबंधित 7,700 से अधिक पेटेंट आवेदन दाखिल किए जा चुके हैं। इनमें 4,400 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय पेटेंट फाइलिंग शामिल हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय अनुसंधान और नवाचार क्षमता को दर्शाती हैं।
भारत पहले ही 5G नेटवर्क के विस्तार में तेज़ी से आगे बढ़ चुका है और देश के अधिकांश जिलों तक 5G सेवाएं पहुंच चुकी हैं। अब सरकार का उद्देश्य इस अनुभव का उपयोग करते हुए 6G तकनीक के विकास, मानकीकरण और व्यावसायिक उपयोग में भी अग्रणी भूमिका निभाना है।
बैठक में यह भी कहा गया कि भारतीय टीमें अंतरराष्ट्रीय 6G संगठनों की प्रगति का लगातार अध्ययन करें, वैश्विक सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को अपनाएं और तकनीकी कमियों की समय रहते पहचान करें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अनुसंधान, पेटेंट, विनिर्माण और वैश्विक सहयोग की मौजूदा गति बनी रहती है, तो भारत आने वाले वर्षों में 6G तकनीक के विकास और उपयोग में प्रमुख देशों की श्रेणी में शामिल हो सकता है।
सरकार का मानना है कि 6G केवल तेज इंटरनेट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, स्वायत्त परिवहन, हेल्थकेयर, इंडस्ट्री 4.0 और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण बदलाव लाने में बड़ी भूमिका निभाएगा।











