अमेरिका के साथ भारत की ट्रेड डील पर बातचीत लंबे समय से अटकी हुई है। इसी बीच भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए लगातार चर्चा हो रही है। ट्रेड डील समेत कई अहम मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत का दौर जारी है।
नई दिल्ली: भारत और कनाडा के रिश्तों में सुधार की कोशिशों के बीच एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम की चर्चा हो रही है। खबरों के मुताबिक, भारत सरकार 26 जनवरी 2027 को गणतंत्र दिवस समारोह में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने पर विचार कर सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। यदि यह निमंत्रण आगे बढ़ता है, तो इसे भारत और कनाडा के बीच संबंधों को नई दिशा देने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।
यह संभावित घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहा है और वैश्विक व्यापार में बदलते समीकरणों के बीच दूसरे प्रमुख देशों के साथ आर्थिक साझेदारी मजबूत करने पर भी ध्यान दे रहा है।
गणतंत्र दिवस 2027 के लिए मार्क कार्नी के नाम की चर्चा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत अगले साल गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के लिए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नाम पर विचार कर रहा है। भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि को आमंत्रित करना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक परंपरा है। इसके जरिए मेजबान देश अपने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ संबंधों को अहमियत देने का संदेश देता है।
हालांकि, कार्नी को आमंत्रित किए जाने की खबरों को फिलहाल संभावित योजना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अंतिम निर्णय से पहले दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत, आर्थिक सहयोग और व्यापक कूटनीतिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
भारत-कनाडा संबंधों में सुधार की कोशिशें

भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान तनाव देखने को मिला था। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में गंभीर चुनौतियां सामने आई थीं। अब दोनों पक्ष आर्थिक सहयोग बढ़ाने और संवाद के जरिए मतभेदों को कम करने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और कनाडा के बीच व्यापार, निवेश और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिशें हुई हैं। दोनों देशों के लिए आर्थिक संबंधों को मजबूत करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि व्यापार और निवेश के क्षेत्र में सहयोग से नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
फिर भी, संबंधों में वास्तविक सुधार केवल व्यापारिक बातचीत तक सीमित नहीं रहेगा। इसके लिए दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाना और सुरक्षा व राजनयिक मुद्दों पर संवाद जारी रखना भी अहम होगा।
ट्रेड डील और CEPA पर टिकी निगाहें
भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) बातचीत का एक प्रमुख विषय है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना हो सकता है। यदि वार्ता सफल रहती है, तो इससे बाजार तक पहुंच, कारोबारी सहयोग और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के अवसर बढ़ सकते हैं।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दोनों देश साल के अंत तक व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में गणतंत्र दिवस के निमंत्रण पर होने वाला संभावित निर्णय द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक प्रगति से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि समझौते को अंतिम रूप देने और मुख्य अतिथि के चयन के बीच कोई औपचारिक संबंध तय किया गया है या नहीं।
क्या प्रधानमंत्री मोदी कर सकते हैं कनाडा का दौरा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर में कनाडा जाने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। यदि यह यात्रा होती है, तो इसे दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जाएगा। संभावित दौरे का समय CEPA वार्ता की प्रगति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले 2016 में कनाडा का दौरा किया था, जब स्टीफन हार्पर वहां के प्रधानमंत्री थे। ऐसे में संभावित नई यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को फिर से गति देने का संकेत बन सकती है। हालांकि, दौरे की तारीख और कार्यक्रम को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।











