देश के कई हिस्से भीषण लू की चपेट में हैं, जहां तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी करते हुए हीटस्ट्रोक और गर्मी से जुड़ी बीमारियों को लेकर चेतावनी दी है।
नई दिल्ली: भारत में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के कई इलाकों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के बाद भारतीय मौसम विभाग ने भीषण लू को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय घरों से बाहर निकलने से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी है।
देश के कई हिस्सों में भीषण लू का असर
देश इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। मध्य भारत और उत्तर-पश्चिमी राज्यों के कई शहरों में तापमान लगातार बढ़ रहा है। कई इलाकों में पारा 47 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों तक भीषण लू जारी रहने की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने कई राज्यों के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा रही है।
2024 में लू से हुई थीं 1,832 मौतें
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में देशभर में लू लगने से 1,832 लोगों की मौत दर्ज की गई थी। यह पिछले दो दशकों में सबसे अधिक मौतों में शामिल है। इससे पहले 2015 में गर्मी के कारण 1,908 लोगों की जान गई थी।
कोरोना महामारी के दौरान कुछ समय के लिए मौतों के आंकड़ों में कमी आई थी। वर्ष 2021 में लू से मरने वालों की संख्या घटकर 374 रह गई थी, लेकिन उसके बाद फिर तेजी से वृद्धि दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहने से शरीर पर गंभीर असर पड़ता है। खासतौर पर बाहरी काम करने वाले लोगों के लिए खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।
पुरुषों में ज्यादा असर, कामकाजी वर्ग सबसे प्रभावित
आंकड़ों के मुताबिक, लू का सबसे अधिक असर कामकाजी उम्र के पुरुषों पर देखा गया। 30 से 44 साल के आयु वर्ग में 525 पुरुषों की मौत हुई, जबकि 45 से 59 वर्ष के समूह में यह आंकड़ा 577 तक पहुंच गया।
इसके मुकाबले महिलाओं की मौतों का आंकड़ा काफी कम रहा। विशेषज्ञ मानते हैं कि पुरुषों के लंबे समय तक बाहर काम करने, धूप में रहने और शारीरिक मेहनत वाले कार्यों में जुड़े होने के कारण जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है।
18 से 29 साल की आयु वर्ग में भी 152 पुरुषों की मौत दर्ज की गई, जबकि महिलाओं में यह संख्या केवल 23 रही। इससे साफ है कि बाहरी वातावरण और कामकाजी परिस्थितियां गर्मी के खतरे को बढ़ा रही हैं।
29 मई के बाद मिल सकती है राहत
मौसम विभाग के अनुसार, 29 मई के बाद तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आने की संभावना है। कुछ इलाकों में बादल छाने और हल्की बारिश की उम्मीद भी जताई गई है, जिससे लोगों को राहत मिल सकती है।
हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले वर्षों में लू की घटनाएं और ज्यादा तीव्र हो सकती हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सुरक्षा और सतर्कता बेहद जरूरी होगी।










