भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक और अहम पड़ाव आने वाला है। इसरो 4 सितंबर को GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी में है।
श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) एक और महत्वपूर्ण मिशन के लिए तैयार है। इसरो का GSLV-F17 मिशन 4 सितंबर 2026 को लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन के तहत अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-05 को अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा। यह मिशन भारत की पृथ्वी अवलोकन, आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसरो के अनुसार, GSLV-F17/EOS-05 मिशन को 4 सितंबर की सुबह 2:55 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC SHAR) के सेकेंड लॉन्च पैड से रवाना किया जाना है। मिशन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
GSLV-F17 की 19वीं उड़ान
GSLV-F17 भारत के Geosynchronous Satellite Launch Vehicle (GSLV) की 19वीं उड़ान होगी। लॉन्च से पहले 28 अगस्त को रॉकेट को व्हीकल असेंबली बिल्डिंग से लॉन्च कॉम्प्लेक्स के अम्बिलिकल टावर तक पहुंचाया गया था। इस मिशन में GSLV-F17, EOS-05 को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित करेगा। रॉकेट में करीब चार मीटर व्यास वाली ओगिव आकार की कंपोजिट पेलोड फेयरिंग का इस्तेमाल किया गया है।
GSLV भारत के भारी उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए विकसित प्रमुख लॉन्च व्हीकल परिवार में शामिल है। इस मिशन की सफलता भारत की स्वदेशी लॉन्च क्षमता और अर्थ ऑब्जर्वेशन कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण होगी।
EOS-05 क्या है और क्यों है खास?
EOS-05 को एक अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट के तौर पर पेश किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसका वजन करीब 2,367 किलोग्राम है। इसे GISAT-1A नाम से भी संदर्भित किया जाता है। इस सैटेलाइट की खासियत जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की इमेजिंग करने की क्षमता से जुड़ी है। इसका उद्देश्य भारतीय उपमहाद्वीप के बड़े हिस्से की हाई-रिजॉल्यूशन और लगभग रियल-टाइम तस्वीरें उपलब्ध कराना है।
इस तरह के सैटेलाइट केवल तस्वीरें लेने तक सीमित नहीं होते। इनके डेटा का इस्तेमाल मौसम, कृषि, भूमि उपयोग, आपदा प्रबंधन, शहरी नियोजन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।
चीन और पाकिस्तान सीमा पर भी नजर रखने में मदद
EOS-05 की व्यापक इमेजिंग क्षमता को भारत की रणनीतिक निगरानी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जियोसिंक्रोनस कक्षा से बड़े क्षेत्र पर लगातार नजर रखने की क्षमता भारत को संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों की निगरानी में अतिरिक्त सहायता दे सकती है। विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान से लगी भारतीय सीमाओं पर गतिविधियों की निगरानी के लिए अर्थ ऑब्जर्वेशन डेटा उपयोगी हो सकता है। हालांकि, किसी सैटेलाइट की वास्तविक निगरानी क्षमता उसके सेंसर, रिजॉल्यूशन, कक्षा और परिचालन व्यवस्था पर निर्भर करती है।
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बाढ़ से जंगल की आग तक, आपदाओं में आएगा काम
इस मिशन का महत्व केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। EOS-05 से मिलने वाला पृथ्वी अवलोकन डेटा प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी उपयोगी साबित हो सकता है। बाढ़, चक्रवात, भूकंप और जंगलों में लगने वाली आग जैसी घटनाओं के बाद बड़े क्षेत्रों का तेजी से आकलन करने में सैटेलाइट इमेजरी प्रशासन और राहत एजेंसियों की मदद कर सकती है। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में फसल की स्थिति, भूमि में बदलाव और संभावित जोखिमों की निगरानी के लिए भी ऐसे डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है।
4 सितंबर को ऐसे देख सकेंगे लॉन्च
ISRO ने बताया है कि आम लोग श्रीहरिकोटा स्थित Launch View Gallery से इस मिशन को देख सकते हैं। इसके लिए इसरो की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके अलावा मिशन की लाइव कवरेज ऑनलाइन भी उपलब्ध होगी। इसरो के YouTube चैनल पर लॉन्च से पहले लाइव प्रसारण शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कवरेज सुबह करीब 2:25 बजे से शुरू होगी, जबकि रॉकेट का लॉन्च 2:55 बजे निर्धारित है।










