एक ही जमीन पर भाई को मिली टैक्स राहत, दूसरे की अपील 2,544 दिन की देरी के चलते खारिज

चंडीगढ़ ITAT ने 2,544 दिनों की देरी के कारण टैक्स अपील खारिज की। समान जमीन पर भाई को कैपिटल गेन्स टैक्स से राहत मिल चुकी थी, फिर भी लाभ नहीं मिला।

चंडीगढ़ ITAT ने एक टैक्स मामले में 2,544 दिनों की देरी के कारण अपील खारिज कर दी। समान जमीन पर भाई को पहले ही राहत मिल चुकी थी, लेकिन पर्याप्त कारण साबित न होने से दूसरे भाई को लाभ नहीं मिला।

Business:आयकर अपील न्यायाधिकरण की चंडीगढ़ पीठ ने टैक्स अपील में देरी को लेकर अहम फैसला दिया है। एक ही कृषि भूमि से जुड़े मामले में एक भाई को कैपिटल गेन्स टैक्स से राहत मिली, लेकिन दूसरे भाई की अपील 2,544 दिनों की देरी के कारण खारिज कर दी गई। ITAT ने पर्याप्त कारण साबित नहीं होने को फैसले का आधार बनाया।

2,544 दिनों की देरी बनी सबसे बड़ी वजह

आयकर अपील न्यायाधिकरण की चंडीगढ़ पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी टैक्स मामले में मजबूत आधार होने के बावजूद अपील दाखिल करने में अत्यधिक देरी होने पर राहत मिलना मुश्किल हो सकता है। इस मामले में अपील 2,544 दिनों की देरी से दाखिल की गई थी।

ट्रिब्यूनल के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या इतनी लंबी देरी को माफ करने के लिए पर्याप्त कारण मौजूद हैं। मामले में देरी का संतोषजनक आधार साबित नहीं होने के कारण अपीलकर्ता को राहत नहीं मिल सकी।

एक ही जमीन के दो भाइयों का मामला

सुरजीत सिंह और उनके भाई प्यारा सिंह कृषि भूमि में बराबर हिस्सेदार थे। दोनों ने वर्ष 2013-14 में जमीन बेची थी। आयकर विभाग ने सुरजीत सिंह के मामले में जमीन को कैपिटल एसेट मानते हुए 1.86 करोड़ रुपये की आय पर टैक्स जोड़ा और 40.44 लाख रुपये की टैक्स डिमांड निकाली।

सुरजीत सिंह ने विभागीय कार्रवाई के खिलाफ अपील की, लेकिन दिसंबर 2018 में कमिश्नर (अपील) ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्हें निर्धारित समय के भीतर आगे की अपील करनी थी, लेकिन उन्होंने काफी देर बाद ITAT का रुख किया।

दूसरे भाई को मिल चुकी थी टैक्स राहत

इसी जमीन के दूसरे सह-मालिक प्यारा सिंह ने अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखी। जनवरी 2026 में आयकर अधिकारियों ने माना कि संबंधित जमीन ग्रामीण कृषि भूमि की श्रेणी में आती है। इसलिए उस पर कैपिटल गेन्स टैक्स लागू नहीं होता।

इस फैसले के बाद प्यारा सिंह को मामले में राहत मिल गई। इससे सुरजीत सिंह के मामले में समान जमीन और समान परिस्थितियों के आधार पर राहत की उम्मीद बनी थी।

मजबूत केस के बावजूद अपील क्यों हुई खारिज?

सुरजीत सिंह के मामले में देरी ही निर्णायक मुद्दा बन गई। ITAT ने माना कि समान जमीन से जुड़े दूसरे सह-मालिक को राहत मिलना अपने आप में पर्याप्त नहीं है। अपीलकर्ता को पहले यह बताना जरूरी था कि निर्धारित समयसीमा के भीतर अपील क्यों दाखिल नहीं की जा सकी।

चूंकि 2,544 दिनों की देरी के लिए पर्याप्त और संतोषजनक कारण साबित नहीं किया गया, इसलिए ट्रिब्यूनल ने देरी को माफ करने से इनकार कर दिया। परिणामस्वरूप अपील खारिज हो गई।

यह फैसला टैक्स मामलों में समयसीमा के महत्व को रेखांकित करता है। समान तथ्यों वाले मामले में किसी अन्य व्यक्ति को राहत मिलने के बावजूद अपील की प्रक्रिया और निर्धारित समयसीमा का पालन करना जरूरी है।

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