जापान ने 12 जून को तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से H3 रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया। मिशन के दौरान छह उपग्रहों को सफलतापूर्वक उनकी निर्धारित कक्षाओं में स्थापित किया गया। पिछले मिशन की विफलता के बाद यह सफलता जापान के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
जापान: जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) ने अपने अगली पीढ़ी के H3 रॉकेट का सफल प्रक्षेपण कर अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस मिशन के तहत छह उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया गया। दिसंबर 2025 में मिशन विफल होने के बाद यह पहली उड़ान थी, जिसने रॉकेट की विश्वसनीयता को फिर से साबित कर दिया है।
विफलता के बाद H3 रॉकेट की सफल वापसी
जापान के अंतरिक्ष कार्यक्रम को उस समय बड़ी सफलता मिली जब JAXA ने 12 जून को तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से H3 रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया। यह मिशन इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि दिसंबर 2025 में इसी रॉकेट के एक मिशन को असफलता का सामना करना पड़ा था। उस दौरान पेलोड एडेप्टर में आई तकनीकी खराबी के कारण दूसरे चरण का इंजन निर्धारित रूप से काम नहीं कर पाया था, जिससे उपग्रह को कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका था।

विफलता के बाद JAXA और उसके साझेदार इंजीनियरों ने विस्तृत जांच की। समस्या की जड़ तक पहुंचने के बाद आवश्यक तकनीकी सुधार किए गए। हालिया सफल लॉन्च ने यह साबित कर दिया कि सुधार प्रभावी रहे और रॉकेट अब फिर से मिशनों के लिए तैयार है।
छह उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचाया गया
इस मिशन के दौरान H3 रॉकेट ने कुल छह उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाया। उड़ान शुरू होने के लगभग 16 मिनट बाद PETREL और STARS-X उपग्रहों को सफलतापूर्वक तैनात किया गया। इसके बाद BRO-22, VERTECS, HORN-L और HORN-R नामक चार अन्य उपग्रहों को भी उनकी निर्धारित कक्षाओं में स्थापित कर दिया गया।
JAXA के अनुसार मिशन के सभी चरण योजना के अनुसार पूरे हुए और किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा सामने नहीं आई। इससे एजेंसी को भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण आत्मविश्वास मिला है।
पहली बार तीन इंजन वाले संस्करण की उड़ान
इस लॉन्च की एक और खास बात यह रही कि H3 रॉकेट को पहली बार उसके अधिक शक्तिशाली तीन-इंजन कॉन्फ़िगरेशन में उड़ाया गया। इससे पहले सफल मिशनों में दो-इंजन वाले संस्करण का उपयोग किया गया था।
तीन इंजन वाला संस्करण अधिक वजन वाले पेलोड को अंतरिक्ष में पहुंचाने में सक्षम है। इसके अलावा यह विभिन्न प्रकार के मिशनों के लिए अधिक लचीलापन प्रदान करता है। सफल परीक्षण के बाद जापान को उम्मीद है कि H3 रॉकेट वैश्विक लॉन्च बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत करेगा।
जापान की अंतरिक्ष रणनीति में अहम भूमिका
H3 रॉकेट को JAXA और Mitsubishi Heavy Industries ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इसे पुराने H-2A रॉकेट की जगह तैयार किया गया है, जिसे 2025 में सेवानिवृत्त कर दिया गया था।
हालांकि 2023 में अपनी पहली उड़ान के दौरान H3 को असफलता मिली थी, लेकिन इसके बाद रॉकेट ने कई सफल मिशन पूरे किए हैं। ताजा सफलता से सरकारी एजेंसियों, वैज्ञानिक संस्थानों और निजी कंपनियों का भरोसा और बढ़ने की संभावना है।
चंद्र मिशनों और अन्य अंतरिक्ष परियोजनाओं पर बढ़ते निवेश के बीच जापान H3 को अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम का प्रमुख आधार मान रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता भविष्य के वैज्ञानिक अनुसंधान, उपग्रह प्रक्षेपण और गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए नई संभावनाएं खोलेगी। H3 की यह कामयाबी जापान की वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को भी मजबूती प्रदान करती है।











