जापान के पाम-साइज रोवर LEV-2 ने चंद्रमा की सतह पर SLIM लैंडर की स्थिति की तस्वीरें भेजकर उसकी तकनीकी समस्या का खुलासा किया। छोटे रोवर ने दिखाया कि भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों में मिनी रोबोट बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
टोक्यो: जापान के SLIM Moon Mission में इस्तेमाल किए गए छोटे रोवर LEV-2 ने चंद्रमा पर एक अहम खोज कर वैज्ञानिकों की बड़ी समस्या सुलझा दी। इस पाम-साइज रोबोट ने चंद्र सतह से ऐसी तस्वीरें भेजीं, जिनसे पता चला कि SLIM लैंडर गलत दिशा में उतर गया था। यह खोज भविष्य के चंद्र और मंगल मिशनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
छोटे रोवर ने उजागर की लैंडर की तकनीकी समस्या
जापान की अंतरिक्ष एजेंसी Japan Aerospace Exploration Agency द्वारा विकसित Palm-Sized Lunar Excursion Vehicle-2 (LEV-2) ने चंद्रमा पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जनवरी 2024 में जापान का SLIM (Smart Lander for Investigating Moon) मिशन चंद्रमा पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग करने में कामयाब रहा था, जिससे जापान ऐसा करने वाला दुनिया का पांचवां देश बना।

हालांकि शुरुआती सफलता के बाद वैज्ञानिकों को पता चला कि SLIM लैंडर पर्याप्त बिजली उत्पन्न नहीं कर पा रहा था। इसकी वजह समझना आसान नहीं था क्योंकि पृथ्वी से लैंडर की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही थी। ऐसे में LEV-2 ने चंद्र सतह पर घूमते हुए तस्वीरें भेजीं और इसी से समस्या की असली वजह सामने आई।
तस्वीर से पता चला, उल्टा पड़ा था SLIM लैंडर
LEV-2 द्वारा भेजी गई तस्वीरों में दिखाई दिया कि SLIM लैंडर अपेक्षित स्थिति के बजाय उल्टा पड़ा हुआ था। इसी कारण उसके सौर पैनल सूर्य के प्रकाश को सही दिशा में प्राप्त नहीं कर पा रहे थे और बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा था।
यह तस्वीर पूरे मिशन की सबसे महत्वपूर्ण तस्वीरों में से एक साबित हुई। इसके आधार पर पृथ्वी पर मौजूद इंजीनियरों ने लैंडर की स्थिति का आकलन किया और मिशन के दौरान आई तकनीकी चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझा।
रोवर ने अपनी सीमित अवधि के संचालन के बावजूद वैज्ञानिकों को ऐसी जानकारी उपलब्ध कराई, जो किसी अन्य माध्यम से प्राप्त करना कठिन था।
BB-8 जैसा दिखने वाला रोवर बना मिशन का हीरो
LEV-2 का डिजाइन काफी अनोखा है। यह रोवर शुरुआत में एक गोलाकार गेंद जैसा दिखाई देता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर खुद को छोटे पहियों वाले वाहन में बदल सकता है। इसकी बनावट लोकप्रिय फिल्म श्रृंखला Star Wars के BB-8 ड्रॉयड से मिलती-जुलती बताई जाती है।
लगभग 100 मिनट तक सक्रिय रहने वाले इस रोवर ने चंद्र सतह पर सफलतापूर्वक आवाजाही की और डेटा एकत्र किया। इसने अपनी जानकारी एक साथी रोबोट LEV-1 के माध्यम से पृथ्वी तक पहुंचाई। निर्धारित मिशन अवधि पूरी होने के बाद उससे संपर्क टूट गया, लेकिन तब तक वह अपना मुख्य उद्देश्य पूरा कर चुका था।
भविष्य के Moon और Mars मिशनों के लिए नई उम्मीद
वैज्ञानिकों का मानना है कि LEV-2 की सफलता भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की दिशा बदल सकती है। बड़े रोवर जहां भारी और महंगे होते हैं, वहीं छोटे और स्वायत्त रोबोट कम लागत में कठिन इलाकों तक पहुंच सकते हैं।
इस परियोजना में आकार बदलने वाली गतिशीलता प्रणाली, स्वायत्त नेविगेशन, वायरलेस संचार और इमेज प्रोसेसिंग जैसी कई उन्नत तकनीकों का सफल परीक्षण किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसे कई छोटे रोबोट बड़े अंतरिक्ष यानों के साथ मिलकर काम करेंगे और चंद्रमा, मंगल तथा अन्य ग्रहों की खोज में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
LEV-2 ने साबित कर दिया कि आकार छोटा होने के बावजूद कोई तकनीक अंतरिक्ष मिशन की सबसे बड़ी समस्या का समाधान बन सकती है। यही वजह है कि इस छोटे रोवर को अब जापान के सबसे सफल अंतरिक्ष सहायक मिशनों में से एक माना जा रहा है।










