झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द कर 2014 से अब तक की सभी नियुक्ति परीक्षाओं की CID जांच कराने का फैसला किया है। छात्र CBI जांच की मांग पर कायम हैं, जबकि 1,932 सफल अभ्यर्थियों ने नियुक्ति रद्द करने का विरोध किया।
रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। इसके साथ ही वर्ष 2014 से अब तक आयोजित सभी नियुक्ति परीक्षाओं की जांच कराने का निर्णय लिया गया है। सरकार के इस फैसले से आंदोलन कर रहे छात्रों में राहत है, लेकिन वे अभी भी केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से जांच कराने की मांग पर कायम हैं।
छात्र संगठनों का आरोप है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में लंबे समय से अनियमितताओं और कथित धांधली की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी मुद्दे को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे थे। आंदोलन का सोमवार को 24वां दिन था। सरकार की घोषणा के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने इसे महत्वपूर्ण कदम बताया, लेकिन अंतिम निर्णय से पहले सरकारी अधिसूचना और जांच की प्रक्रिया का अध्ययन करने की बात कही है।
JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद कहा कि सरकार JSSC-CGL परीक्षा को रद्द कर रही है। इसके अलावा परीक्षा एजेंसी TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को भी रद्द करने की घोषणा की गई है। सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक हुई नियुक्ति परीक्षाओं की जांच कराने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार जांच में सामने आए तथ्यों को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि जब किसी मामले की जांच शुरू की गई है तो उसे पूरी तरह से किया जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है और युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
2014 से अब तक की परीक्षाओं की होगी जांच
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि SIT और CID की जांच में कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच अभी जारी होने के कारण सरकार ने सभी विवरण सार्वजनिक नहीं किए हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक जांच के दौरान अलग-अलग समय में काम करने वाली कई कंपनियों के बीच जटिल और आपस में जुड़े नेटवर्क के संकेत मिले हैं।
सरकार ने इसी के आधार पर वर्ष 2014 से अब तक आयोजित सभी नियुक्ति परीक्षाओं की जांच CID से कराने का निर्णय लिया है। इस फैसले का दायरा केवल JSSC-CGL तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पिछले करीब 12 वर्षों में आयोजित विभिन्न नियुक्ति परीक्षाओं की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आएगी।
इस कदम से अब यह पता लगाने की कोशिश होगी कि भर्ती परीक्षाओं में कहीं अनियमितता, पेपर लीक, परीक्षा संचालन में गड़बड़ी या किसी अन्य तरह की प्रक्रिया संबंधी समस्या तो नहीं हुई। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
JPSC सिविल सेवा परीक्षा पर भी जांच
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की प्रमुख मांगों में JPSC सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ी शिकायतें भी शामिल हैं। सरकार ने इस मामले की जांच रिटायर्ड जज की देखरेख में कराने की बात कही है।
सरकार का यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि JPSC और JSSC से जुड़ी भर्ती परीक्षाएं राज्य के हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।
रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच कराने के प्रस्ताव से सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों की निष्पक्ष तरीके से समीक्षा की जाएगी। हालांकि छात्रों की CBI जांच की मांग पर अभी सहमति नहीं बनी है।
CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र
सरकार की घोषणा के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों ने राहत जताई, लेकिन उन्होंने अपना आंदोलन पूरी तरह खत्म करने का फैसला नहीं किया है। छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार की ओर से की गई घोषणाओं के बावजूद उनकी प्रमुख मांग CBI जांच की है।
छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा कि सरकार ने आंदोलन और अनशन समाप्त करने की अपील की है, लेकिन CBI जांच से संबंधित मांग अभी पूरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जारी होने वाले आधिकारिक नोटिफिकेशन का अध्ययन किया जाएगा और उसके बाद आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।
छात्रों का कहना है कि केवल विभागीय या राज्य स्तर की जांच से उनकी सभी शंकाएं दूर नहीं होंगी। वे पूरे मामले की स्वतंत्र केंद्रीय जांच चाहते हैं। इसलिए सरकार के फैसले के बाद भी आंदोलन को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है।
देवेंद्रनाथ महतो ने तोड़ा अनशन
छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल देवेंद्रनाथ महतो ने भूख हड़ताल के 15वें दिन अपना अनशन समाप्त कर दिया। सरकार की घोषणा के बाद ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। इस दौरान JLKM विधायक जयराम महतो भी मौजूद रहे।
जयपाल सिंह स्टेडियम में प्रेम नायक और कुश महतो का भी अनशन समाप्त कराया गया। आंदोलन के दौरान छात्रों की मांगों को लेकर लगातार बातचीत का दौर चल रहा था।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी वीडियो कॉल के जरिए देवेंद्रनाथ महतो से बातचीत की और उन्हें बधाई दी। उन्होंने छात्रों की उपलब्धि को सकारात्मक कदम बताते हुए उन्हें आगे भी एकजुटता और मेहनत के साथ अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने की शुभकामनाएं दीं।

सफल अभ्यर्थियों में फैसले के खिलाफ नाराजगी
जहां आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया, वहीं JSSC-CGL में सफल हुए अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी देखने को मिली। कैबिनेट की बैठक के दौरान बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुटे और नियुक्तियां रद्द किए जाने के फैसले का विरोध किया।
अभ्यर्थियों ने मानव श्रृंखला बनाकर सरकार के निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा के बाद कई अभ्यर्थी भावुक हो गए और धरने पर बैठ गए। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए न्यायालय का रुख करेंगे।
प्रदर्शन के दौरान प्रोजेक्ट भवन के बाहर सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। सफल अभ्यर्थी देर रात करीब एक बजे तक मौके पर मौजूद रहे।
करीब तीन साल चली थी भर्ती प्रक्रिया
JSSC-CGL भर्ती प्रक्रिया करीब तीन वर्षों तक चली थी। इस प्रक्रिया के तहत 1,932 अभ्यर्थियों का चयन किया गया था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 30 दिसंबर 2025 को रांची के मोरहाबादी मैदान में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे थे।
नियुक्ति पत्र मिलने के बाद अभ्यर्थियों ने सरकारी सेवाओं में काम शुरू किया था। करीब आठ महीने बाद परीक्षा और नियुक्ति रद्द होने की घोषणा से सफल उम्मीदवारों में असमंजस और नाराजगी बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी थी तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, लेकिन सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक साथ प्रभावित करना उचित नहीं है।
अभ्यर्थियों के पास अदालत जाने का विकल्प
हाईकोर्ट के अधिवक्ता विनोद सिंह ने नियुक्ति रद्द करने के फैसले को लेकर कानूनी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नियुक्ति के बाद अभ्यर्थियों का पक्ष सुने बिना नौकरी समाप्त करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से चयनित अभ्यर्थियों को करीब आठ महीने तक वेतन दिया गया है। ऐसे में नियुक्ति रद्द करने के फैसले को लेकर कानूनी चुनौती की संभावना बनी हुई है। सफल अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का रुख कर सकते हैं।
अब इस पूरे मामले में सरकार की आधिकारिक अधिसूचना और जांच की शर्तें महत्वपूर्ण होंगी। एक तरफ भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा पास कर नियुक्ति पा चुके अभ्यर्थियों के भविष्य का सवाल खड़ा हो गया है।
आगे क्या होगा?
सरकार के फैसले के बाद अब दो मोर्चों पर कार्रवाई आगे बढ़ने की संभावना है। एक ओर 2014 से अब तक हुई नियुक्ति परीक्षाओं की जांच शुरू होगी, वहीं दूसरी ओर JSSC-CGL के सफल अभ्यर्थी अपने नियुक्ति रद्द होने के फैसले को चुनौती देने के लिए कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि CBI जांच की मांग अभी खत्म नहीं हुई है। वे सरकार के आधिकारिक नोटिफिकेशन का अध्ययन करने के बाद आंदोलन की अगली रणनीति तय करेंगे। ऐसे में झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल पूरी तरह खत्म होता नहीं दिख रहा है।
सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती जांच को पारदर्शी तरीके से पूरा करने, दोषियों की पहचान करने और लाखों युवाओं के बीच भर्ती प्रक्रिया को लेकर भरोसा बहाल करने की होगी। वहीं JSSC-CGL के चयनित अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति रद्द होने के बाद न्यायिक प्रक्रिया आगे की दिशा तय कर सकती है।











