नितिन नवीन की टीम में राम माधव की वापसी, RSS-BJP रिश्तों के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?

नितिन नवीन की नई BJP टीम में राम माधव की वापसी को अहम बदलाव माना जा रहा है। जानिए राम माधव की वापसी और RSS से जुड़े नेताओं की मौजूदगी BJP-RSS रिश्तों के लिए

भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया। नई नियुक्तियों में राम माधव की पार्टी संगठन में वापसी को सबसे अहम बदलावों में माना जा रहा है।

BJP National Team 2026: भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया है। छह साल बाद राम माधव की बीजेपी संगठन में वापसी हुई है और उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। नई टीम में RSS पृष्ठभूमि वाले कई अनुभवी नेताओं को भी महत्वपूर्ण पदों पर बरकरार रखा गया है।

भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को अपनी नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर दी। पार्टी के नए अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में गठित इस टीम में कुछ पुराने चेहरों को नई जिम्मेदारियां मिली हैं, जबकि संगठन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े अनुभवी नेताओं की मौजूदगी भी बनी हुई है। सबसे अधिक ध्यान छह साल बाद राम माधव की बीजेपी में वापसी पर गया है।

राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उनकी वापसी को बीजेपी और RSS के बीच संगठनात्मक समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद मुख्य रूप से वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिका से जुड़ा है, लेकिन माधव के लंबे संगठनात्मक और राजनीतिक अनुभव को देखते हुए उनकी जिम्मेदारी केवल औपचारिक रहने की संभावना कम मानी जा रही है।

RSS प्रचारक से बीजेपी के रणनीतिकार तक का सफर

राम माधव ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत RSS प्रचारक के तौर पर की थी। संघ में उन्होंने राष्ट्रीय प्रवक्ता और अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख सहित कई जिम्मेदारियां संभालीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद उन्हें RSS की ओर से पार्टी संगठन में काम करने के लिए भेजा गया था।बीजेपी में आने के बाद उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिली।

इस दौरान उन्होंने खासतौर पर पूर्वोत्तर भारत और जम्मू-कश्मीर में पार्टी के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। असम, त्रिपुरा और नागालैंड में संगठन को मजबूत करने और सत्ता तक पहुंच बनाने की बीजेपी की रणनीति में उनका योगदान अहम रहा। जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के बीच गठबंधन सरकार बनाने की प्रक्रिया में भी माधव को प्रमुख रणनीतिकारों में गिना गया। हालांकि बाद में राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के बाद बीजेपी ने PDP के साथ गठबंधन समाप्त कर दिया।

2020 में संगठन से हुए थे बाहर

सितंबर 2020 में तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा की थी। उस समय राम माधव को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी नहीं दी गई। इसके बाद उन्होंने RSS की गतिविधियों में वापसी की और संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल हुए। करीब छह साल बाद बीजेपी संगठन में उनकी वापसी को उनके राजनीतिक अनुभव की दोबारा उपयोगिता से जोड़कर देखा जा रहा है। नई जिम्मेदारी के साथ वह पार्टी और संघ के बीच संवाद तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर सकते हैं।

विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों में भी अनुभव

राम माधव की पहचान सिर्फ संगठनात्मक रणनीतिकार के रूप में नहीं रही है। वह विदेश नीति, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े विषयों पर भी सक्रिय रहे हैं। वह इंडिया फाउंडेशन से जुड़े रहे हैं और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की विदेश नीति तथा वैश्विक मामलों पर अपनी राय रखते रहे हैं। ऐसे में बीजेपी में उनकी वापसी का एक संभावित महत्व यह भी है कि पार्टी को अंतरराष्ट्रीय मामलों और रणनीतिक मुद्दों पर अनुभव रखने वाला वरिष्ठ चेहरा फिर से संगठन में मिल गया है।

RSS पृष्ठभूमि वाले नेताओं पर भरोसा जारी

नई राष्ट्रीय टीम में RSS से जुड़े नेताओं की निरंतरता भी खास तौर पर चर्चा में है। सुनील बंसल को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बरकरार रखा गया है। RSS प्रचारक रहे बंसल ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी के संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके बाद उन्होंने तेलंगाना, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी पार्टी के विस्तार के लिए काम किया।

इसी तरह बीएल संतोष राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के पद पर बने रहेंगे। RSS से बीजेपी संगठन में आए संतोष पार्टी के सबसे प्रभावशाली संगठनात्मक नेताओं में शामिल हैं। उनके साथ RSS पृष्ठभूमि वाले शिव प्रकाश और सौदान सिंह भी संयुक्त महासचिव के तौर पर अपनी भूमिका जारी रखेंगे।

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