झारखंड के यात्रियों से ₹168 करोड़ सुपरफास्ट शुल्क वसूला, 100 ट्रेनों की रफ्तार 55 KM से कम

CAG रिपोर्ट में 100 ट्रेनों की रफ्तार 55 KM से कम मिली, फिर भी ₹168 करोड़ सुपरफास्ट शुल्क वसूला गया। 86% स्टेशनों पर चिकित्सा सुविधा नहीं।

CAG रिपोर्ट में पूर्व मध्य रेलवे की यात्री सुविधाओं पर सवाल उठे हैं। 100 ट्रेनों से कम गति के बावजूद ₹168 करोड़ सुपरफास्ट शुल्क वसूला गया। झारखंड के कई स्टेशनों पर चिकित्सा और यात्री सुविधाओं की कमी भी सामने आई।

झारखंड: CAG की रिपोर्ट में पूर्व मध्य रेलवे की कार्यप्रणाली और झारखंड में यात्री सुविधाओं को लेकर गंभीर कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 100 ट्रेनों की गति 55 किलोमीटर प्रति घंटे से कम होने के बावजूद यात्रियों से ₹168 करोड़ सुपरफास्ट शुल्क वसूला गया। इसके अलावा झारखंड में उपनगरीय सेवाओं और स्टेशनों पर चिकित्सा सुविधाओं की कमी भी सामने आई है।

55 KM से कम रफ्तार वाली ट्रेनों पर भी सुपरफास्ट शुल्क

CAG की लेखा परीक्षा रिपोर्ट में पूर्व मध्य रेलवे की यात्री सेवाओं को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 100 ऐसी ट्रेनों से यात्रियों से करीब ₹168 करोड़ सुपरफास्ट शुल्क वसूला गया, जिनकी गति 55 किलोमीटर प्रति घंटे के मानक से कम थी।

रिपोर्ट में झारखंड और बिहार के बीच यात्री सुविधाओं में अंतर का भी उल्लेख किया गया है। पूर्व मध्य रेलवे के कुल 2,976 किलोमीटर नेटवर्क में बिहार में 1,092 किलोमीटर का नेटवर्क झारखंड में है। इसके बावजूद उपनगरीय रेल सुविधाओं के मामले में झारखंड पीछे है।

झारखंड को सिर्फ 6 उपनगरीय सेवाएं

पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत बिहार में गया, सोनपुर और झाझा में तीन उपनगरीय ट्रेन रखरखाव शेड हैं, जबकि झारखंड में एक भी उपनगरीय ट्रेन रखरखाव शेड नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार पूर्व मध्य रेलवे में करीब 172 उपनगरीय सेवाएं संचालित होती हैं, लेकिन इनमें से झारखंड को केवल छह सेवाएं मिलती हैं। इससे राज्य में स्थानीय रेल यात्रियों के लिए उपलब्ध सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठते हैं।

रेल उपयोगकर्ता परामर्श समिति की बैठकों को लेकर भी धनबाद मंडल की स्थिति रिपोर्ट में सामने आई है। वर्ष 2022-23 में निर्धारित संख्या से दो बैठकें कम हुईं, जबकि 2023-24 में एक बैठक कम हुई। पूरे पूर्व मध्य रेलवे में भी कई मंडलों में निर्धारित संख्या से कम बैठकें हुईं।

86% स्टेशनों पर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा नहीं

CAG ने पूर्व मध्य रेलवे के 512 स्टेशनों की जांच की। इनमें से 441 स्टेशन यानी करीब 86% ऐसे पाए गए, जहां न तो आपातकालीन चिकित्सा कक्ष था और न ही AIIMS द्वारा सुझाया गया प्राथमिक चिकित्सा डिब्बा उपलब्ध था।

इसके अलावा 15 स्टेशनों पर चिकित्सा कक्ष मौजूद होने के बावजूद वहां जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं थीं। इससे यात्रियों की अचानक तबीयत बिगड़ने की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता मिलने को लेकर चिंता सामने आई है।

720 स्टेशनों के लिए वेब पेज का आदेश भी लागू नहीं

रिपोर्ट में रेलवे की ऑनलाइन यात्री सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देश के बाद रेलवे बोर्ड ने 2019 में 720 प्रमुख स्टेशनों के लिए विशेष वेब पेज तैयार करने का आदेश दिया था।

इन वेब पेज पर स्टेशनों की सफाई, उपलब्ध सुविधाओं और यात्रियों की राय से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जानी थी। हालांकि लेखा परीक्षा में पाया गया कि किसी भी क्षेत्र ने ऐसे वेब पेज तैयार नहीं किए।

धनबाद से रेलवे को मिला ₹36,688 करोड़ से ज्यादा राजस्व

झारखंड रेल यूजर्स के पदाधिकारियों के अनुसार धनबाद रेल मंडल से पिछले वित्तीय वर्ष में रेलवे को माल ढुलाई के जरिए ₹36,688 करोड़ से अधिक का राजस्व मिला। इसके बावजूद यात्री सुविधाओं में कमी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

रेल उपयोगकर्ता संगठनों का कहना है कि रेलवे को यात्री सुविधाओं की समीक्षा कर व्यवस्था में सुधार करना चाहिए। उपनगरीय ट्रेन शेड, बेहतर स्टेशन सुविधाओं और तेज गति वाली लंबी दूरी की ट्रेनों की जरूरत को भी इसी संदर्भ में उठाया गया है।

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