झारखंड के सरायकेला में करंट से जंगली हाथी की मौत: अवैध बालू खनन और वन्यजीव कॉरिडोर पर गंभीर सवाल

झारखंड में सरायकेला में करंट लगने से जंगली हाथी की मौत। अवैध बालू खनन और बिजली तार पर सवाल उठे। वन विभाग जांच कर रहा है, कॉरिडोर सुरक्षा पर चिंता बढ़ी।

झारखंड के सरायकेला में अवैध बालू खनन क्षेत्र में करंट लगने से एक जंगली हाथी की मौत हो गई। ग्रामीणों ने बिजली तार और कॉरिडोर बाधित होने का आरोप लगाया है। वन विभाग मामले की जांच में जुटा है।

सरायकेला: झारखंड के सरायकेला जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां कुकड़ू प्रखंड के तिरुलडीह और सपारूम गांव के बीच स्थित जंगल में एक जंगली हाथी की करंट लगने से मौत हो गई। यह घटना वन्यजीव संरक्षण, अवैध खनन गतिविधियों और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह क्षेत्र हाथियों का पारंपरिक कॉरिडोर रहा है, लेकिन लगातार बढ़ती मानवीय गतिविधियों ने इसे प्रभावित किया है।

घटना स्थल: हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर में हादसा

यह घटना जिस स्थान पर हुई है, वह दलमा वन क्षेत्र से जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण हाथी कॉरिडोर माना जाता है। सपारूम गांव के जंगल में हाथी का शव मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध बालू का भंडारण किया जा रहा है और ट्रकों की लगातार आवाजाही से जंगल का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है।

करंट से मौत की आशंका और अवैध तार का शक

प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि हाथी की मौत करंट लगने से हुई है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि अवैध बालू खनन में शामिल लोगों ने हाथियों को भगाने के लिए जंगल में अवैध बिजली का तार बिछाया हो सकता है।

यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह मामला वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध माना जाएगा और इसमें आपराधिक कार्रवाई संभव है।

अवैध बालू खनन से बढ़ता संकट

ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में लंबे समय से अवैध बालू खनन जारी है। खनन के कारण जंगल में भारी मशीनों और ट्रकों की आवाजाही बढ़ गई है, जिससे हाथियों का प्राकृतिक मार्ग बाधित हो रहा है।

खनन विभाग द्वारा पहले भी इस इलाके से अवैध बालू जब्त की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद गतिविधियां पूरी तरह बंद नहीं हो सकी हैं।

हाथियों के कॉरिडोर पर बढ़ता दबाव

यह इलाका झारखंड के महत्वपूर्ण हाथी कॉरिडोर का हिस्सा है, लेकिन लगातार अतिक्रमण और खनन गतिविधियों के कारण यह कॉरिडोर कमजोर होता जा रहा है।

इसके कारण:

  • हाथियों का प्राकृतिक रास्ता बाधित हो रहा है
  • वे गांवों की ओर भटकने लगे हैं
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं
  • यह स्थिति वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है।

वन विभाग पर लापरवाही के आरोप

स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विभाग को अवैध खनन और बालू भंडारण की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

ग्रामीणों के अनुसार:

  • कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए कोई विशेष टीम तैनात नहीं की गई
  • अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं लगाया गया
  • बिजली विभाग के साथ समन्वय की कमी रही
  • इससे वन्यजीव सुरक्षा प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
  • प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच प्रक्रिया

जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच में हाथी की मौत करंट से प्रतीत होती है। उन्होंने बिजली विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि अवैध तार बिछाने की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी और मामला गैर-जमानती अपराध के रूप में दर्ज होगा।

बार-बार हो रही हाथियों की मौत से बढ़ी चिंता

यह पहली घटना नहीं है। लगभग एक वर्ष पहले तुलीनडीह जंगल में भी एक हाथी के बच्चे की मौत हो चुकी है। पिछले तीन महीनों में यह तीसरी हाथी मौत बताई जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है।

लगातार हो रही घटनाएं यह संकेत देती हैं कि वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष का बढ़ता खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, अवैध खनन और जंगलों के अतिक्रमण के कारण हाथियों और मानवों के बीच संघर्ष बढ़ रहा है। हाथी अपने प्राकृतिक मार्ग से भटककर गांवों और खेतों में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे दोनों पक्षों के लिए खतरा बढ़ गया है।

इस स्थिति ने पर्यावरण संतुलन को भी प्रभावित किया है।

विशेषज्ञों की राय: कॉरिडोर संरक्षण जरूरी

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हाथियों के कॉरिडोर को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि यह कॉरिडोर टूटता है, तो हाथियों का व्यवहार असामान्य हो जाता है और मानव बस्तियों के साथ टकराव बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि:

  • कॉरिडोर क्षेत्रों को सख्ती से संरक्षित किया जाए
  • अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाई जाए
  • वन विभाग और बिजली विभाग मिलकर निगरानी करें

Leave a comment