झारखंड में नक्सलवाद को बड़ा झटका: 25 हार्डकोर नक्सली करेंगे आत्मसमर्पण, हथियार भी सौंपेंगे

झारखंड में 25 हार्डकोर नक्सली पुलिस मुख्यालय में समर्पण करेंगे। इनमें 6 सब जोनल कमांडर और 6 एरिया कमांडर शामिल हैं। नक्सली हथियार और गोलियां भी जमा करेंगे।

झारखंड में 25 हार्डकोर नक्सली गुरुवार को पुलिस मुख्यालय रांची में आत्मसमर्पण करेंगे। इनमें कई इनामी कमांडर शामिल हैं। नक्सली हथियारों और भारी मात्रा में गोलियों का जखीरा भी पुलिस को सौंपेंगे, जिसे सुरक्षा एजेंसियां बड़ी सफलता मान रही हैं।

रांची: Jharkhand में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को बड़ी सफलता मिलने जा रही है। राज्य पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लगातार दबाव के बीच 25 हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया है। यह सरेंडर गुरुवार को रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में किया जाएगा और इसे झारखंड के नक्सल इतिहास की सबसे बड़ी सामूहिक सरेंडर कार्रवाई माना जा रहा है।

सरेंडर करने वाले नक्सलियों में छह सब-जोनल कमांडर, छह एरिया कमांडर और 13 अन्य हार्डकोर उग्रवादी शामिल हैं। ये सभी लंबे समय से कोल्हान और सारंडा के जंगलों में सक्रिय थे और कई बड़े हमलों, लेवी वसूली तथा सुरक्षा बलों पर हमलों में शामिल बताए जाते हैं।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस सामूहिक आत्मसमर्पण से झारखंड में नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगेगा और क्षेत्र में हिंसा कम करने में मदद मिलेगी।

कोल्हान और सारंडा के जंगलों में सक्रिय थे नक्सली

आत्मसमर्पण करने वाले अधिकतर नक्सली Saranda Forest और कोल्हान क्षेत्र के घने जंगलों में सक्रिय थे। यह इलाका लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद का गढ़ माना जाता रहा है।

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, इन क्षेत्रों में पहले लगभग 60 सक्रिय नक्सली मौजूद थे, जिनमें से अब 25 ने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। इसके बाद क्षेत्र में केवल लगभग 35 सक्रिय नक्सली ही बचेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार सुरक्षा अभियानों, खुफिया निगरानी और विकास योजनाओं के कारण नक्सली संगठनों की पकड़ कमजोर होती जा रही है।

हथियारों का बड़ा जखीरा भी होगा जमा

सरेंडर करने वाले नक्सली अपने हथियार भी पुलिस के हवाले करेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, इनके पास से कई आधुनिक और स्वचालित हथियार बरामद किए जाएंगे।

बरामद होने वाले हथियारों में एक इंसास एलएमजी, चार इंसास राइफल, नौ एसएलआर राइफल, एक .303 राइफल और एक देसी पिस्टल शामिल हैं। इसके अलावा 27 मैगजीन, इंसास राइफल की लगभग 2000 गोलियां और एसएलआर की 755 गोलियां भी जमा कराई जाएंगी।

सुरक्षा एजेंसियां इसे बड़ी उपलब्धि मान रही हैं, क्योंकि इन हथियारों का इस्तेमाल कई वर्षों से जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा बलों और सरकारी परियोजनाओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था।

किन दस्तों से जुड़े हैं नक्सली

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली कई सक्रिय उग्रवादी दस्तों से जुड़े हुए हैं। इनमें सागेन आंगारिया दस्ता, गुलशन मुंडा दस्ता और मिसिर बेसरा दस्ता प्रमुख हैं।

इन संगठनों का इस्तेमाल लेवी वसूली, हथियारों की सप्लाई और सुरक्षा बलों पर हमलों के लिए किया जाता था। कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में इन दस्तों का लंबे समय से प्रभाव रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन दस्तों के कमजोर होने से झारखंड के कई इलाकों में विकास परियोजनाओं को गति मिल सकती है।

सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल का नाम सबसे चर्चित

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में सबसे चर्चित नाम सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल का है। वह लंबे समय से पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था और कोल्हान क्षेत्र में उसका प्रभाव काफी मजबूत माना जाता था।

Chaibasa जिले में उसके खिलाफ 123 से अधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह कई नक्सली गतिविधियों और सुरक्षा बलों पर हमलों में शामिल रहा है।

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि उसके सरेंडर से क्षेत्र में सक्रिय नक्सली नेटवर्क को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।

गुलशन मुंडा पर भी कई गंभीर आरोप

गादी मुंडा उर्फ गुलशन मुंडा भी सरेंडर करने वालों में शामिल है। वह बुंडू, दशम फॉल और खूंटी सीमा क्षेत्र में सक्रिय था।

पुलिस के मुताबिक, गुलशन मुंडा पर लेवी वसूली, टेरर फंडिंग और उग्रवादी गतिविधियों से जुड़े 48 मामले दर्ज हैं। वह स्थानीय कारोबारियों और ठेकेदारों से धन उगाही में शामिल बताया जाता रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस तरह के कमांडरों का आत्मसमर्पण नक्सली संगठनों की वित्तीय क्षमता को कमजोर करेगा।

महिला नक्सलियों ने भी चुना आत्मसमर्पण का रास्ता

सरेंडर सूची में कई महिला कमांडर और महिला उग्रवादी भी शामिल हैं। इनमें कुछ पर एक लाख से लेकर पांच लाख रुपए तक का इनाम घोषित था।

विशेषज्ञों के अनुसार, महिला कैडरों का आत्मसमर्पण यह संकेत देता है कि संगठन के भीतर मनोबल कमजोर हो रहा है और कई सदस्य अब हिंसक रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन में लौटना चाहते हैं।

अन्य राज्यों में भी दिख रहा झारखंड कनेक्शन

हाल के महीनों में Telangana और West Bengal में भी नक्सलियों की गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण की घटनाएं सामने आई हैं, जिनका संबंध झारखंड नेटवर्क से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में समर दा ने आत्मसमर्पण किया, जबकि मुर्शिदाबाद से बेला सरकार को गिरफ्तार किया गया। इसी तरह आंध्र प्रदेश के विश्वनाथ उर्फ संतोष और पूनम उर्फ जोभा ने तेलंगाना में सरेंडर किया।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन सभी के खिलाफ चाईबासा और आसपास के क्षेत्रों में कई मामले दर्ज हैं।

नक्सल विरोधी अभियान का असर

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड में लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

केंद्रीय सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में जंगल क्षेत्रों में संयुक्त अभियान तेज किए हैं। ड्रोन निगरानी, बेहतर खुफिया नेटवर्क और स्थानीय समुदायों के सहयोग से नक्सली संगठनों की गतिविधियां सीमित हुई हैं।

इसके अलावा सरकार की पुनर्वास नीति और आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को मुख्यधारा में शामिल करने की योजनाओं ने भी सकारात्मक प्रभाव डाला है।

विकास परियोजनाओं को मिल सकती है रफ्तार

विशेषज्ञों का कहना है कि नक्सल प्रभाव कम होने से खनन, सड़क निर्माण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी विकास परियोजनाओं को गति मिल सकती है।

सारंडा और कोल्हान जैसे क्षेत्रों में लंबे समय तक सुरक्षा चुनौतियों के कारण कई परियोजनाएं प्रभावित होती रही हैं। अब यदि हिंसा में कमी आती है, तो स्थानीय लोगों को रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सकता है।

झारखंड के लिए महत्वपूर्ण मोड़

25 हार्डकोर नक्सलियों का सामूहिक आत्मसमर्पण झारखंड के सुरक्षा इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। यह केवल सुरक्षा एजेंसियों की रणनीतिक सफलता नहीं, बल्कि उस बदलते माहौल का संकेत भी है जिसमें कई उग्रवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने के लिए तैयार हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार सुरक्षा अभियान के साथ विकास और पुनर्वास पर समान रूप से ध्यान देती रही, तो आने वाले वर्षों में झारखंड में नक्सलवाद का प्रभाव और कमजोर पड़ सकता है।

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