झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की तैयारी की जा रही है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने विधानसभा में बताया कि रांची में 7 करोड़ रुपये की लागत से राज्य की पहली बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) यूनिट स्थापित की जाएगी।
रांची: झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि रांची में जल्द ही एक बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) यूनिट स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के बाहर जाकर थैलसीमिया मरीजों के बोन मैरो ट्रांसप्लांट के खर्च को वहन करने पर भी विचार कर रही है। अंसारी यह जानकारी थैलसीमिया रोगियों की स्थिति को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव द्वारा उठाए गए प्रश्न का उत्तर देते हुए दी।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट
बोन मैरो ट्रांसप्लांट, जिसे हड्डी के मज्जा (Bone Marrow) के जरिए रोगियों को नई रक्त कोशिकाओं की आपूर्ति के लिए किया जाता है, थैलसीमिया और कुछ अन्य रक्त संबंधी बीमारियों के लिए जीवनरक्षक साबित होता है। वर्तमान में झारखंड में कोई भी BMT यूनिट नहीं है, इसलिए मरीजों को इलाज के लिए अन्य राज्यों का रुख करना पड़ता है।
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार थैलसीमिया रोगियों के लिए राज्य से बाहर होने वाले बोन मैरो ट्रांसप्लांट के खर्च को वहन करने पर भी विचार कर रही है, जिसकी लागत लगभग 14 लाख रुपये आती है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
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थैलसीमिया रोगियों का डेटा और सरकार की पहल
सभा में कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने थैलसीमिया रोगियों के लिए सरकार की योजनाओं और डेटा के बारे में प्रश्न उठाया। इसके जवाब में मंत्री अंसारी ने कहा कि राज्य सरकार थैलसीमिया रोगियों का डेटा जुटा रही है, जो एक महीने के भीतर तैयार हो जाएगा। उन्होंने चाईबासा में पांच बच्चों के ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने की घटना का हवाला देते हुए कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है।
इरफान अंसारी ने विधानसभा को बताया कि सदर अस्पताल, रांची में 7 करोड़ रुपये की लागत से BMT यूनिट स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। यह यूनिट न केवल राज्य में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध कराएगी, बल्कि थैलसीमिया और अन्य रक्त रोगों के उपचार में भी नई उम्मीद जगाएगी। स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि सरकार राज्य से बाहर इलाज कराने वाले मरीजों के लिए आर्थिक मदद पर विचार कर रही है। इससे झारखंड के गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को उच्च स्तर का इलाज राज्य के भीतर या राज्य की आर्थिक मदद से उपलब्ध हो सकेगा।









