राऊज एवेन्यू कोर्ट ने महिला कांग्रेस अध्यक्ष Alka Lamba को जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन से जुड़े मामले में दोषी ठहराया है। यह मामला महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर जुलाई 2024 में किए गए प्रदर्शन से संबंधित बताया जा रहा है।
Alka Lamba: दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने महिला कांग्रेस अध्यक्ष Alka Lamba को एक प्रदर्शन से जुड़े मामले में दोषी करार दिया है। यह मामला जुलाई 2024 में जंतर-मंतर पर हुए उस विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें महिला आरक्षण कानून को लागू करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उनके खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया साबित होते हैं। अब इस मामले में 5 जून 2026 को सजा पर बहस (sentencing arguments) होगी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला जुलाई 2024 का है, जब महिला कांग्रेस ने जंतर-मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया था। इस प्रदर्शन का नेतृत्व Alka Lamba कर रही थीं।प्रदर्शन का उद्देश्य महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू करने की मांग करना था। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।
आरोप है कि इस दौरान, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई. पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की हुई, सार्वजनिक स्थान पर अवरोध उत्पन्न किया गया. कानूनी आदेशों की अवहेलना की गई. इन आरोपों के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिनमें धारा 132, 221, 223(a) और 285 शामिल हैं।

कोर्ट का फैसला
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड और परिस्थितियों के आधार पर आरोप प्रथम दृष्टया सिद्ध होते हैं। इसी आधार पर Alka Lamba को दोषी करार दिया गया है। यह फैसला उस सुनवाई के बाद आया है, जिसमें लंबे समय से मामले की जांच और गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे थे।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने यह भी माना था कि मामले में पर्याप्त आधार हैं, जिसके चलते आरोप तय किए गए थे। इसके बाद से लगातार सुनवाई चल रही थी और दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जा रही थीं। अब अदालत ने अंतिम चरण में पहुंचते हुए उन्हें दोषी घोषित कर दिया है, जबकि सजा का निर्धारण अभी बाकी है।
अलका लांबा की प्रतिक्रिया
कोर्ट के फैसले के बाद Alka Lamba ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वह इस फैसले से हैरान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन महिला आरक्षण और महिला सुरक्षा जैसे संवैधानिक अधिकारों के समर्थन में था। उन्होंने कहा कि वे पिछले कई महीनों से अदालत में पेशियां दे रही थीं और इस निर्णय को लेकर वह डरने वाली नहीं हैं। उनके अनुसार, उनका उद्देश्य केवल महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाना था और इसे अपराध नहीं माना जाना चाहिए।











