JNU में एडमिशन के दौरान SC, ST, OBC-NCL, EWS और PWD श्रेणियों के लिए तय प्रतिशत में आरक्षण दिया जाता है। इन वर्गों के छात्रों को प्रमाणपत्रों के आधार पर लाभ मिलता है। विश्वविद्यालय की आरक्षण प्रणाली का उद्देश्य योग्य वंचित छात्रों को समान अवसर देना और प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी रखना है।
JNU Reservation System: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र के एडमिशन के दौरान आरक्षण नियम अहम भूमिका निभाते हैं। दिल्ली स्थित JNU में SC को 15 प्रतिशत, ST को 7.5 प्रतिशत, OBC-NCL को 27 प्रतिशत, EWS को 10 प्रतिशत और PWD उम्मीदवारों को 5 प्रतिशत आरक्षण मिलता है। यह व्यवस्था केंद्र सरकार की नीतियों के अनुरूप है और पात्र छात्रों को प्रमाणपत्रों के आधार पर इसका लाभ दिया जाता है। आरक्षण प्रणाली का उद्देश्य वंचित और कमजोर तबके के छात्रों को उच्च शिक्षा तक समान पहुंच प्रदान करना और प्रवेश प्रक्रिया को निष्पक्ष रखना है।
SC-ST छात्रों के लिए तय नियम
JNU में एससी श्रेणी के उम्मीदवारों को 15 प्रतिशत और एसटी श्रेणी को 7.5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। आवेदन के लिए मान्यता प्राप्त अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र जरूरी है, जिसमें छात्र का नाम, जाति, राज्य और यह पुष्टि शामिल होनी चाहिए कि यह जाति केंद्र की सूची में दर्ज है।
यदि आवेदन के समय मूल प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं है, तो छात्र उसकी रसीद जमा कर सकता है। हालांकि अंतिम एडमिशन प्रक्रिया से पहले मूल दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य है। सामान्य मेरिट में चयनित SC-ST उम्मीदवारों को आरक्षित सीटों में नहीं गिना जाता।

OBC-NCL को मिलता है 27 प्रतिशत कोटा
ओबीसी वर्ग के छात्रों के लिए JNU में 27 प्रतिशत आरक्षण लागू है। इसके लिए OBC-NCL प्रमाणपत्र केंद्र सरकार की सूची के अनुरूप होना चाहिए और यह साफ होना चाहिए कि छात्र नॉन-क्रीमी लेयर में आता है।
आर्थिक वर्ष 2025–26 का वैध सर्टिफिकेट अनिवार्य माना गया है। यदि यह उपलब्ध न हो तो पिछला प्रमाणपत्र या आवेदन रसीद स्वीकार की जा सकती है, लेकिन प्रवेश लेते समय वैध दस्तावेज दिखाना होगा।
EWS और PWD श्रेणी को भी मिलता है लाभ
EWS श्रेणी के छात्रों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण है। इसके लिए वार्षिक पारिवारिक आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और परिवार के पास बड़ी कृषि भूमि या बड़े आकार की संपत्ति नहीं होनी चाहिए। प्रमाणपत्र केवल अधिकृत अधिकारी द्वारा जारी होना चाहिए।
PWD कैटेगरी के छात्रों को विश्वविद्यालय में 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। यह उन उम्मीदवारों पर लागू होता है जिनकी न्यूनतम 40 प्रतिशत विकलांगता होती है। इसमें लोकोमोटर डिसेबिलिटी, सेरेब्रल पाल्सी, ब्लाइंडनेस, मानसिक बीमारी, ऑटिज्म जैसी स्थितियां शामिल हैं। इसके लिए तय फॉर्मेट में मेडिकल सर्टिफिकेट अनिवार्य होता है।
आरक्षण प्रक्रिया कैसे मदद करती है छात्रों को
JNU Reservation System का उद्देश्य वंचित और कमजोर तबके के योग्य छात्रों के लिए उच्च शिक्षा को आसान बनाना है। आरक्षण के कारण एससी, एसटी, ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को बेहतर अवसर मिलते हैं।
साथ ही, दस्तावेज सत्यापन की स्पष्ट प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि केवल पात्र उम्मीदवार ही लाभ प्राप्त करें। इससे प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी, व्यवस्थित और निष्पक्ष बनी रहती है।










