रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच के बीच पूर्व JPSC अध्यक्ष एल खियांग्ते और पूर्व डिप्टी परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता की जमानत याचिका पर सुनवाई एक सितंबर तक टाल दी गई है। मामले की जांच कर रही CID ने कोर्ट में जांच से जुड़े दस्तावेजों के कई बंडल पेश किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक CID की ओर से कोर्ट में करीब 6 बैग दस्तावेज पेश किए गए, जिनकी जांच मामले की अगली सुनवाई में महत्वपूर्ण हो सकती है।
JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब लगातार आगे बढ़ रही है। CID की कार्रवाई में आयोग के अधिकारियों से लेकर परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी के कर्मचारियों तक की भूमिका की जांच की जा रही है। इससे पहले भी जांच एजेंसी ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और परीक्षा से जुड़े दस्तावेज तथा डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं।
जमानत पर सुनवाई टलने के बाद अब खियांग्ते और श्वेता गुप्ता को राहत के लिए एक सितंबर तक इंतजार करना होगा। अदालत में जमानत याचिका पर बहस के दौरान बचाव पक्ष और CID की ओर से अपने-अपने तर्क रखे जाएंगे। जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और केस डायरी में दर्ज तथ्यों को भी अदालत के सामने रखा जा सकता है।
JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और परिणाम को लेकर सवाल उठाए थे। विवाद बढ़ने के बाद मामले की जांच CID को सौंपी गई। जांच एजेंसी ने JPSC मुख्यालय और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के कार्यालयों में छापेमारी कर परीक्षा से संबंधित रिकॉर्ड, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल सामग्री जब्त की थी।
जांच का दायरा केवल परीक्षा के संचालन तक सीमित नहीं है। CID इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि परीक्षा आयोजित कराने के लिए निजी एजेंसी का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया गया और क्या निर्धारित नियमों का पालन किया गया था। जांच में TDPL नाम की निजी कंपनी की भूमिका भी सामने आई है। एजेंसी के चयन और उसके दस्तावेजों की जांच को केस का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
पूर्व JPSC अध्यक्ष एल खियांग्ते की भूमिका भी जांच के घेरे में है। उन्होंने विवाद के बीच JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। बाद में CID ने उनसे कई दौर में पूछताछ की। जांच एजेंसी उनसे परीक्षा संचालन, निजी एजेंसी के चयन और परीक्षा से जुड़े अन्य निर्णयों के संबंध में सवाल कर चुकी है।
वहीं श्वेता गुप्ता JPSC में डिप्टी परीक्षा नियंत्रक के पद पर रह चुकी हैं। उनकी भूमिका परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों से जुड़ी रही थी। CID उनकी भूमिका और परीक्षा प्रक्रिया से संबंधित निर्णयों की भी जांच कर रही है। इससे पहले उन्हें मामले में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
जांच एजेंसी ने अब तक मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें JPSC से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी और परीक्षा संचालन करने वाली निजी एजेंसी के लोग शामिल हैं। CID का फोकस यह पता लगाने पर है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितता किस स्तर पर हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।
मामले की जांच में परीक्षा से जुड़े कागजात और डिजिटल रिकॉर्ड अहम सबूत माने जा रहे हैं। CID ने अलग-अलग स्थानों से बड़ी मात्रा में दस्तावेज जुटाए हैं। अब कोर्ट में पेश किए गए 6 बैग दस्तावेजों में क्या-क्या रिकॉर्ड हैं और उनका मामले से क्या संबंध है, यह आगे की न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्ट हो सकता है।
जांच के दौरान परीक्षा एजेंसी से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों से भी पूछताछ की गई है। CID यह जानने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा का डेटा किस तरह तैयार और सुरक्षित किया गया था, रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया क्या थी और शिकायतों पर आयोग की ओर से किस तरह कार्रवाई की गई।
JPSC परीक्षा विवाद के चलते अभ्यर्थियों में भी नाराजगी रही है। परीक्षा की प्रक्रिया और परिणाम को लेकर सवाल उठने के बाद छात्रों ने आंदोलन किया और आयोग से निष्पक्ष जांच की मांग की। जांच आगे बढ़ने के साथ अभ्यर्थियों की नजर भी अदालत और CID की कार्रवाई पर बनी हुई है।
मामले में कोर्ट के सामने अब जांच एजेंसी की ओर से पेश दस्तावेज और केस डायरी महत्वपूर्ण रहेंगे। अदालत इन तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों को देखने के बाद जमानत याचिकाओं पर फैसला करेगी।
एक सितंबर की सुनवाई इसलिए अहम होगी क्योंकि उसी दिन खियांग्ते और श्वेता गुप्ता की जमानत याचिकाओं पर आगे की सुनवाई होनी है। तब तक CID द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों और जांच की प्रगति पर अदालत में चर्चा हो सकती है।
JPSC मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल CID की जांच का फोकस परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, निजी परीक्षा एजेंसी के चयन, अधिकारियों की भूमिका और दस्तावेजी साक्ष्यों की कड़ियों को जोड़ने पर है।
फिलहाल एल खियांग्ते और श्वेता गुप्ता की जमानत पर फैसला नहीं हुआ है। अदालत ने सुनवाई को 1 सितंबर तक टाल दिया है और CID ने जांच से जुड़े 6 बैग दस्तावेज कोर्ट में पेश किए हैं। अब अगली सुनवाई में इन दस्तावेजों और केस डायरी के आधार पर मामले की आगे की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।