जयपुर रोप-वे प्रोजेक्ट पर राजस्थान हाईकोर्ट की रोक: आमेर–जयगढ़–नाहरगढ़ कॉरिडोर टेंडर विवाद में बड़ा फैसला

राजस्थान के जयपुर के आमेर-जयगढ़-नाहरगढ़ रोपवे प्रोजेक्ट पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई। टेंडर में अनियमितता और लागत बढ़ाने के आरोपों पर अगली सुनवाई 19 मई को होगी।

जयपुर में आमेर-जयगढ़-नाहरगढ़ रोपवे प्रोजेक्ट पर हाईकोर्ट ने टेंडर में गड़बड़ी के आरोपों के चलते रोक लगा दी है। 80 करोड़ के प्रोजेक्ट को 350 करोड़ में देने पर विवाद है। मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी।

जयपुर: राजधानी जयपुर में प्रस्तावित राज्य के सबसे बड़े रोप-वे प्रोजेक्ट पर राजस्थान हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अंतरिम रोक लगा दी है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना राजधानी जयपुर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों—आमेर किला, जयगढ़ किला और नाहरगढ़ किला—को एक रोप-वे नेटवर्क के जरिए जोड़ने के लिए बनाई गई थी।

करीब 6.5 किलोमीटर लंबा यह रोप-वे प्रोजेक्ट न केवल राजस्थान का सबसे बड़ा, बल्कि देश के प्रमुख पर्यटन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा था। लेकिन टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मामला अदालत तक पहुंच गया।

टेंडर में गड़बड़ी के आरोप, लागत में भारी अंतर

इस पूरे विवाद की जड़ टेंडर आवंटन प्रक्रिया को बताया जा रहा है। याचिकाकर्ता कंपनी Shivam Prime Infra Projects Pvt. Ltd. ने अदालत में आरोप लगाया कि परियोजना के लिए पारदर्शी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

याचिका के अनुसार, एक कंपनी लगभग 80 करोड़ रुपये की लागत में रोप-वे बनाने को तैयार थी, जबकि दूसरी फर्म ने इसकी लागत लगभग 350 करोड़ रुपये बताई। इसके बावजूद अधिक लागत वाली फर्म को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया गया है।

इस अंतर ने टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाईकोर्ट का आदेश और अगली सुनवाई

राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस समीर जैन ने 2 फरवरी 2026 को दी गई सरकारी मंजूरी पर रोक लगाने का आदेश जारी किया। अदालत ने माना कि मामले में गंभीर कानूनी प्रश्न उठते हैं, जिनकी विस्तृत जांच आवश्यक है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी। तब तक परियोजना से जुड़े सभी आगे के कामों पर अस्थायी रोक रहेगी।

RTPP एक्ट के उल्लंघन का आरोप

याचिकाकर्ता की ओर से वकील अभि गोयल और हार्दिक मिश्रा ने तर्क दिया कि यह पूरा मामला राजस्थान ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक प्रोक्योरमेंट (RTPP) एक्ट-2012 के नियमों का उल्लंघन है।

उनका कहना है कि:

टेंडर के लिए उचित सार्वजनिक विज्ञापन जारी नहीं किया गया

प्रक्रिया सीमित फर्मों तक ही सीमित रखी गई

चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा

नियमों के अनुसार प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया को दरकिनार किया गया

याचिका में यह भी कहा गया कि यह परियोजना RTPP एक्ट की धारा 2(13) के तहत सार्वजनिक खरीद के दायरे में आती है, इसलिए नियमों का पालन अनिवार्य था।

सरकार की महत्वाकांक्षी पर्यटन योजना

राज्य सरकार ने इस परियोजना को पर्यटन विकास के एक बड़े कदम के रूप में पेश किया था। योजना के तहत जयपुर के ऐतिहासिक किलों को एक ही रोप-वे नेटवर्क से जोड़कर पर्यटकों को एक अनोखा अनुभव देने का लक्ष्य रखा गया था।

यह परियोजना केंद्र सरकार की धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर रोप-वे विकास नीति के अनुरूप मानी जा रही थी। इसके लिए बजट में प्रावधान किया गया था और प्रारंभिक मंजूरी भी दी गई थी।

पर्यावरण और लागत को लेकर भी विवाद

याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी दावा किया कि कम लागत वाली परियोजना में वन भूमि और पेड़ों को न्यूनतम नुकसान होने की संभावना थी, जबकि अधिक लागत वाली योजना में पर्यावरणीय प्रभाव अधिक बताया गया था।

इस आधार पर भी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं कि आखिर कम प्रभाव और कम लागत वाली योजना को नजरअंदाज क्यों किया गया।

6.5 किलोमीटर लंबा महत्वाकांक्षी रोप-वे

यह प्रस्तावित रोप-वे राजस्थान का सबसे लंबा माना जा रहा था, जो जयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों को एक साथ जोड़ता। इसका उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और यात्रियों को किलों के बीच आसान आवागमन सुविधा प्रदान करना था।

2024 में इस परियोजना की घोषणा के बाद इसे राज्य के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा था।

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