कैबिनेट का फैसला! MSME निर्यातकों के लिए बड़ी राहत, ₹45,060 करोड़ की नई योजनाएं लागू

कैबिनेट का फैसला! MSME निर्यातकों के लिए बड़ी राहत, ₹45,060 करोड़ की नई योजनाएं लागू

केंद्रीय कैबिनेट ने निर्यातकों को राहत देने के लिए ₹45,060 करोड़ की दो योजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें निर्यात संवर्धन मिशन और ऋण गारंटी योजना शामिल हैं। इन योजनाओं से MSME निर्यातकों को वित्तीय सहायता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी।

New Delhi: भारत सरकार ने निर्यातकों को राहत देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कुल ₹45,060 करोड़ की दो नई योजनाओं को मंजूरी दी है। इन योजनाओं का उद्देश्य खासतौर पर एमएसएमई (MSME) निर्यातकों को सहायता और संरक्षण प्रदान करना है। यह फैसला उस समय आया है जब अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी तक शुल्क लगा दिया है, जिससे भारत के कई उद्योग प्रभावित हुए हैं।

निर्यातकों के लिए दो बड़ी योजनाएं मंजूर

कैबिनेट की बैठक में दो प्रमुख योजनाओं को मंजूरी मिली है। पहली योजना है निर्यात संवर्धन मिशन (Export Promotion Mission – EPM), जिसके लिए ₹25,060 करोड़ आवंटित किए गए हैं। दूसरी है ऋण गारंटी योजना (Credit Guarantee Scheme for Exporters – CGSE), जिसके विस्तार के लिए ₹20,000 करोड़ मंजूर किए गए हैं। दोनों योजनाएं मिलकर निर्यातकों को वित्तीय और संरचनात्मक मजबूती देने का काम करेंगी।

यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस बैठक के एक सप्ताह बाद की गई, जिसमें उन्होंने निर्यात संवर्धन परिषदों (Export Promotion Councils) के प्रमुखों से बातचीत की थी। उस बैठक में अमेरिकी टैक्स से प्रभावित उद्योगों ने सरकार से राहत की मांग की थी।

निर्यात संवर्धन मिशन (EPM) का उद्देश्य

निर्यात संवर्धन मिशन का उद्देश्य भारत के निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाना और नए निर्यातकों को प्रोत्साहित करना है। यह योजना वित्त वर्ष 2031 तक चलेगी और इसमें दो उप-योजनाएं शामिल होंगी — ‘निर्यात प्रोत्साहन’ (Export Promotion) और ‘निर्यात दिशा’ (Export Direction)।

इस मिशन के तहत 25,060 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इसमें 10,401 करोड़ रुपये ‘निर्यात प्रोत्साहन’ और 14,659 करोड़ रुपये ‘निर्यात दिशा’ के लिए खर्च किए जाएंगे। इसका लक्ष्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे वस्त्र, चमड़ा, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और समुद्री उत्पादों को बढ़ावा देना है।

‘निर्यात प्रोत्साहन’ योजना से मिलेगा वित्तीय सहयोग

‘निर्यात प्रोत्साहन’ योजना का उद्देश्य वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इसके तहत ब्याज सहायता, निर्यात फैक्टरिंग, ब्याज गारंटी, ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट कार्ड और नए बाजारों में प्रवेश के लिए ऋण वृद्धि सहायता दी जाएगी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह मिशन एक व्यापक (Comprehensive) ढांचा है जो पूरे निर्यात तंत्र को मजबूत करेगा। इससे छोटे उद्योगों को वैश्विक बाजारों में विस्तार करने का अवसर मिलेगा और निर्यातकों को ब्याज दरों में राहत मिलेगी।

‘निर्यात दिशा’ योजना से बढ़ेगी गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा

‘निर्यात दिशा’ योजना गैर-वित्तीय क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित करेगी। इसके तहत भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए कई उपाय किए जाएंगे।

इस योजना में निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग, पैकेजिंग सहायता, व्यापार मेलों में भागीदारी, निर्यात भंडारण, अंतर्देशीय परिवहन प्रतिपूर्ति और व्यापार खुफिया सहायता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इन कदमों से भारत के उत्पाद वैश्विक बाजारों में अधिक आकर्षक बनेंगे।

ऋण गारंटी योजना (CGSE) की अवधि बढ़ी

कैबिनेट ने निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना की अवधि बढ़ाकर 31 मार्च 2026 तक कर दी है। इस योजना के तहत निर्यातकों को उनकी स्वीकृत निर्यात सीमा के 20 फीसदी तक की अतिरिक्त कार्यशील पूंजी (Working Capital) के रूप में रेहन-मुक्त (Collateral-Free) ऋण सहायता दी जाएगी।

इस योजना के अंतर्गत 50 करोड़ रुपये तक के कर्ज पर सरकार गारंटी देगी। इससे बैंक और वित्तीय संस्थान निर्यातकों को आसानी से कर्ज दे पाएंगे। यह कदम एमएसएमई निर्यातकों के लिए बड़ा सहारा साबित होगा, जो अक्सर पूंजी की कमी के कारण वैश्विक व्यापार में पीछे रह जाते हैं।

राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी करेगी संचालन

यह योजना राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी (National Credit Guarantee Trustee Company – NCGTC) के माध्यम से लागू की जाएगी। इसका संचालन वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services) द्वारा किया जाएगा।

वित्तीय सेवा विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक प्रबंधन समिति (Management Committee) बनाई जाएगी जो योजना की निगरानी करेगी। यह समिति यह सुनिश्चित करेगी कि योजना का लाभ पात्र निर्यातकों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे।

अमेरिकी शुल्क से राहत देने का प्रयास

अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 50 फीसदी का भारी शुल्क लगा दिया था। इसका असर भारत के रसायन, इंजीनियरिंग और वस्त्र जैसे कई क्षेत्रों पर पड़ा। इन नई योजनाओं से निर्यातकों को इस झटके से उबरने में मदद मिलेगी।

खनिज क्षेत्र में रॉयल्टी सुधार को मंजूरी

कैबिनेट की बैठक में कुछ महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) पर रॉयल्टी दरों में सुधार के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और खनिज आधारित उद्योगों को लागत में राहत मिलेगी। यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को और मजबूत करेगा।

Leave a comment