कानपुर में घरेलू एलपीजी सिलिंडर लेने वाले उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। शहर के अलग-अलग इलाकों से गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं को सिलिंडर के साथ चायपत्ती, नमक, साबुन, सर्फ और दूसरे घरेलू सामान खरीदने के लिए कथित तौर पर दबाव बनाने की शिकायतें सामने आई हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि यदि वे अतिरिक्त सामान खरीदने से इनकार करते हैं तो उन्हें सिलिंडर का स्टॉक खत्म होने की बात कहकर वापस भेज दिया जाता है। कई लोगों का कहना है कि उन्हें एक ही सिलिंडर के लिए बार-बार एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ते हैं और आखिरकार मजबूरी में अतिरिक्त सामान खरीदना पड़ता है।
मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि एलपीजी सिलिंडर घरेलू उपभोक्ताओं की आवश्यक जरूरत से जुड़ा उत्पाद है। उपभोक्ता जब गैस बुक कराने के बाद सिलिंडर लेने एजेंसी पहुंचते हैं तो उनकी प्राथमिकता केवल रिफिल प्राप्त करना होती है। लेकिन शिकायतों के मुताबिक कुछ जगहों पर सिलिंडर देने से पहले दूसरे घरेलू उत्पाद खरीदने की शर्त रखी जा रही है। इससे उपभोक्ताओं में नाराजगी है और उन्होंने जिला पूर्ति विभाग तथा संबंधित तेल कंपनियों के अधिकारियों से मामले की जांच कराने की मांग की है।
जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसी पर पहुंचने के बाद उनसे कहा जाता है कि गैस सिलिंडर के साथ कोई न कोई दूसरा उत्पाद लेना होगा। यदि ग्राहक अतिरिक्त सामान लेने से मना करता है तो कभी स्टॉक खत्म होने और कभी किसी अन्य वजह का हवाला देकर सिलिंडर देने में टालमटोल की जाती है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक यह स्थिति एक-दो बार की नहीं बल्कि कई बार दोहराई गई है।
विनायकपुर की रहने वाली गीता देवी ने शिकायत करते हुए बताया कि चिड़ियाघर के पास संचालित भारत गैस की भवानी गैस एजेंसी से उन्हें होम डिलीवरी की सुविधा लगभग नहीं मिलती और सिलिंडर लेने के लिए खुद एजेंसी जाना पड़ता है। उनका आरोप है कि वहां सिलिंडर लेने के दौरान 20 रुपये अतिरिक्त लेकर बदले में चायपत्ती दी जाती है। उन्होंने कहा कि जब इसका विरोध किया जाता है तो सिलिंडर देने में आनाकानी की जाती है। उनके मुताबिक हर बार कोई न कोई अतिरिक्त सामग्री लेने के लिए कहा जाता है।
सिविल लाइंस निवासी रितेश पांडेय ने भी इसी तरह की परेशानी बताई। उनके अनुसार जब सिलिंडर घर पर पहुंचता है तो समस्या नहीं होती, लेकिन एजेंसी से खुद सिलिंडर लेने जाने पर किसी न किसी घरेलू उत्पाद को साथ में लेने का दबाव बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि कभी नमक, कभी साबुन, कभी चायपत्ती तो कभी सर्फ पाउडर लेने के लिए कहा जाता है। अतिरिक्त सामान लेने से मना करने पर कथित तौर पर स्टॉक खत्म होने की बात कही जाती है और अगले दिन आने को कहा जाता है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस सिलिंडर की कीमत के अलावा ऐसे उत्पाद खरीदने पर उनका घरेलू बजट भी प्रभावित होता है। कई परिवारों के लिए चायपत्ती, नमक या सर्फ जैसी वस्तुओं की तत्काल जरूरत नहीं होती, लेकिन यदि सिलिंडर लेने के लिए इन्हें खरीदना पड़े तो ग्राहक के पास अतिरिक्त खर्च करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। यही वजह है कि लोगों ने इस व्यवस्था की जांच और संबंधित एजेंसियों पर कार्रवाई की मांग की है।
मामले में जिला पूर्ति विभाग और तेल विपणन कंपनियों के स्थानीय अधिकारियों का रुख भी सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी उपभोक्ता से एलपीजी सिलिंडर उपलब्ध कराने के बदले जबरन कोई अन्य सामान खरीदवाने की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराई जाएगी। तेल कंपनियों के अधिकारियों ने भी कहा है कि ग्राहक को किसी अतिरिक्त उत्पाद की खरीद के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
यहां यह समझना भी जरूरी है कि एजेंसी पर उपलब्ध अन्य घरेलू उत्पाद खरीदना और उसे खरीदने के लिए ग्राहक पर दबाव डालना दो अलग-अलग बातें हैं। यदि कोई ग्राहक अपनी इच्छा से चायपत्ती, नमक या अन्य सामान खरीदता है तो यह अलग विषय है, लेकिन यदि सिलिंडर देने को उस खरीद से जोड़ दिया जाता है तो उपभोक्ता अधिकारों को लेकर सवाल खड़े होते हैं। इसी बिंदु पर अब शिकायतों की जांच की जरूरत बताई जा रही है।
कानपुर में एलपीजी उपभोक्ताओं के सामने इस समय ई-केवाईसी को लेकर भी एक अलग प्रक्रिया चल रही है। जिले में करीब 11.80 लाख घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं में से लगभग 4.30 लाख की ई-केवाईसी अभी बाकी बताई गई थी। 30 सितंबर तक प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले उपभोक्ताओं की घरेलू गैस बुकिंग प्रभावित होने की बात कही गई है।
देशभर में भी एलपीजी सब्सिडी से जुड़े बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण को लेकर प्रक्रिया चल रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार 19 सितंबर 2026 तक 27.43 करोड़ सक्रिय घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं ने बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण पूरा कर लिया था, जो करीब 89.9 प्रतिशत कवरेज है। 1 अक्टूबर 2026 से जिन उपभोक्ताओं ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उनके लिए प्रमाणीकरण पूरा होने के बाद सब्सिडी के साथ रिफिल बुकिंग शुरू होने की व्यवस्था बताई गई है।
हालांकि ई-केवाईसी या बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की सरकारी प्रक्रिया और गैस सिलिंडर के साथ अतिरिक्त सामान खरीदने की कथित शर्त अलग-अलग मामले हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि एजेंसी पर कोई आधिकारिक प्रक्रिया या दस्तावेज जरूरी है तो उसकी जानकारी स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए, लेकिन चायपत्ती, नमक या सर्फ जैसे उत्पादों को सिलिंडर से जोड़ना उचित नहीं है। अब जिला पूर्ति विभाग और संबंधित तेल कंपनियों की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि किन एजेंसियों के खिलाफ शिकायतें सही पाई जाती हैं।
फिलहाल कानपुर के उपभोक्ताओं ने मांग की है कि संबंधित विभाग एजेंसियों की जांच कर यह सुनिश्चित करे कि एलपीजी सिलिंडर लेने के लिए किसी ग्राहक को अतिरिक्त घरेलू सामान खरीदने के लिए मजबूर न किया जाए। अधिकारियों ने भी शिकायत मिलने पर जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायतों की जांच किस स्तर पर होती है और दोष पाए जाने पर संबंधित एजेंसियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।












