कार, घर या मंदिर में भगवान की मूर्ति के सामने शराब और धूम्रपान को धार्मिक रूप से अनुचित माना गया है। कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर के अनुसार, नशा आस्था के खिलाफ है और इससे धन, स्वास्थ्य व सम्मान पर नकारात्मक असर पड़ता है। साथ ही, कार में मूर्ति रखने के भी कुछ जरूरी नियम बताए गए हैं।
Car Mein Bhagwan Ki Murti: भारत में आस्था से जुड़ी परंपराओं को लेकर एक बार फिर बहस तेज है कि क्या कार में भगवान की मूर्ति के सामने शराब पीना या धूम्रपान करना उचित है। कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने घर, मंदिर और वाहन में नशे को धार्मिक रूप से वर्जित बताया है। उनका कहना है कि जहां देवताओं की स्थापना हो, वहां नशा करने से जीवन में नकारात्मक परिणाम आते हैं। यह विषय धार्मिक आस्था, सामाजिक जिम्मेदारी और सड़क सुरक्षा तीनों से जुड़ा हुआ है।
कार में मूर्ति के सामने शराब और धूम्रपान
आज के समय में बहुत से लोग अपनी कार में भगवान की छोटी मूर्ति रखते हैं। यह उनकी आस्था और सुरक्षा की भावना से जुड़ा होता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या ऐसी स्थिति में कार के अंदर शराब पीना, बीड़ी या सिगरेट पीना सही है। धार्मिक कथावाचकों के अनुसार, जिस वाहन में भगवान की मूर्ति विराजमान हो, वहां नशे से पूरी तरह दूरी बनाए रखनी चाहिए।
कथावाचकों का कहना है कि सिगरेट या बीड़ी का धुआं सीधे भगवान की मूर्ति की ओर जाता है, जिसे अपमान की दृष्टि से देखा जाता है। उनका साफ कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को शराब या धूम्रपान करना ही है, तो उसे कार में मूर्ति स्थापित नहीं करनी चाहिए। आस्था और आदतों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि दोनों का सम्मान बना रहे।
शराब पीकर गाड़ी चलाना कानूनन भी अपराध
धार्मिक पहलू के साथ-साथ इसका एक कानूनी और स्वास्थ्य से जुड़ा पहलू भी है। शराब पीकर वाहन चलाना भारत में दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद आए दिन ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां लोग नशे की हालत में ड्राइविंग करते हैं। यह न केवल चालक के लिए, बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी बार-बार चेतावनी देते हैं कि शराब पीकर गाड़ी चलाना दुर्घटनाओं का बड़ा कारण है। ऐसे में अगर कार में भगवान की मूर्ति भी स्थापित हो और उसी वाहन में नशे का सेवन किया जाए, तो यह धार्मिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टियों से गलत माना जाता है।

कार में मूर्ति रखना हो तो इन बातों का रखें ध्यान
अगर कोई व्यक्ति अपनी कार में भगवान की मूर्ति रखना चाहता है, तो इसके लिए भी कुछ जरूरी नियम बताए गए हैं। सबसे पहले उस स्थान की साफ-सफाई बेहद जरूरी है, जहां मूर्ति रखी जाए। जैसे घर के पूजा कक्ष में साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है, उसी तरह कार में भी उस स्थान को स्वच्छ और व्यवस्थित रखना चाहिए।
मूर्ति के चयन को लेकर भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कार में बड़ी या बहुत हल्की मूर्ति रखना ठीक नहीं माना जाता। क्योंकि वाहन उबड़-खाबड़ रास्तों और गड्ढों से गुजरता है, ऐसे में मूर्ति के गिरने या टूटने का खतरा रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पत्थर, लकड़ी या धातु से बनी छोटी और मजबूत मूर्तियां कार के लिए अधिक उपयुक्त होती हैं।
मूर्ति की जगह और सुरक्षा से जुड़े नियम
मूर्ति को कार में ऐसी जगह रखा जाना चाहिए, जिससे ड्राइवर का दृश्य बाधित न हो। आमतौर पर लोग इसे डैशबोर्ड के बीच में रखते हैं, लेकिन अगर इससे सामने का दृश्य प्रभावित होता है, तो इसे थोड़ी दूरी पर रखा जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि मूर्ति पूरी तरह स्थिर होनी चाहिए, ताकि अचानक ब्रेक या झटके में वह हिले-डुले नहीं।
इसके अलावा कार में धूपबत्ती या दीप जलाने से भी बचना चाहिए। यह धार्मिक रूप से तो आस्था का विषय हो सकता है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से बेहद खतरनाक है। कार में आग लगने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।
आस्था के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जहां भगवान की उपस्थिति मानी जाती है, वहां संयम, शुद्धता और मर्यादा का पालन जरूरी होता है। चाहे वह घर हो, मंदिर हो या फिर कार। शराब और धूम्रपान जैसी आदतें न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, बल्कि आस्था के अनुरूप भी नहीं मानी जातीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सच्ची भक्ति का अर्थ केवल मूर्ति रखना नहीं, बल्कि जीवन में संयम और सकारात्मकता अपनाना भी है। अगर व्यक्ति अपनी आस्था के साथ-साथ सुरक्षा और कानून का भी सम्मान करता है, तभी समाज में संतुलन बना रह सकता है।








