2026 के शीतकालीन ओलंपिक के मिलानो-कोर्तिना आयोजन में 22 वर्षीय फ्रीस्टाइल स्कीयर एयलीन गू एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा उनके खेल से ज्यादा उनके देश-चयन और नागरिकता के फैसले को लेकर है।
स्पोर्ट्स न्यूज़: 2026 के मिलानो-कोर्तिना शीतकालीन ओलंपिक में 22 वर्षीय फ्रीस्टाइल स्कीयर Eileen Gu एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में हैं। हालांकि इस बार चर्चा सिर्फ उनके खेल प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी राष्ट्रीय पहचान और देश-चयन को लेकर भी तीखी बहस छिड़ी हुई है। सैन फ्रांसिस्को में जन्मीं और Stanford University की छात्रा एयलीन गू ने अमेरिका के बजाय चीन का प्रतिनिधित्व करने का फैसला किया। यह निर्णय खेल जगत से निकलकर राजनीति, राष्ट्रवाद और व्यक्तिगत स्वतंत्रता तक पहुंच गया।
चीन का प्रतिनिधित्व और वैश्विक बहस
एयलीन गू ने 2019 से चीन की ओर से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। उनका यह फैसला खासकर अमेरिका में कुछ वर्गों के लिए चौंकाने वाला था। 2022 के Beijing Winter Olympics में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। इसके बाद 2026 के Milan-Cortina Winter Olympics में भी उन्होंने दो रजत पदक अपने नाम किए।
अब तक अपने ओलंपिक करियर में एयलीन गू ने पांच स्पर्धाओं में हिस्सा लिया है और हर बार पदक जीता है। इस उपलब्धि के साथ वह शीतकालीन ओलंपिक इतिहास की सबसे सफल महिला फ्रीस्टाइल स्कीयर्स में गिनी जाती हैं।

‘गद्दार’ कहे जाने का विवाद
उनके चीन से खेलने के फैसले ने अमेरिकी समाज और मीडिया में बहस छेड़ दी। कुछ आलोचकों ने उन्हें ‘गद्दार’ तक कह दिया। पूर्व एनबीए खिलाड़ी Enes Kanter Freedom ने सार्वजनिक रूप से उनकी आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका में जन्म लेकर और शिक्षा पाकर चीन का प्रतिनिधित्व करना गलत संदेश देता है। यह बयान अमेरिकी मीडिया में व्यापक रूप से चर्चा का विषय बना।
मामला राजनीति तक भी पहुंचा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने टिप्पणी की कि जो लोग अमेरिका में पले-बढ़े हैं, उन्हें देश के लिए प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर एयलीन गू की आलोचना नहीं की, लेकिन उनके बयान से यह स्पष्ट था कि यह मुद्दा खेल से आगे बढ़ चुका है।
धमकियां और हमले के आरोप
विवाद केवल आलोचना तक सीमित नहीं रहा। एयलीन गू ने हालिया इंटरव्यू में दावा किया कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलीं और उनके साथ शारीरिक हमला भी हुआ। उन्होंने कहा कि स्टैनफोर्ड कैंपस में उनके साथ धक्का-मुक्की की गई, पुलिस को बुलाना पड़ा और उनका डॉर्म रूम भी लूट लिया गया। उनके अनुसार, 22 साल की उम्र में इस तरह की घटनाओं का सामना करना बेहद पीड़ादायक रहा। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि वैश्विक खेल मंच पर राष्ट्रीय पहचान से जुड़े फैसले किस तरह व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित कर सकते हैं।

खेल में असाधारण उपलब्धियां
विवादों के बावजूद एयलीन गू का खेल प्रदर्शन लगातार उच्च स्तर पर बना हुआ है। ओलंपिक के अलावा उन्होंने विश्व चैंपियनशिप और विंटर एक्स गेम्स में भी कई स्वर्ण पदक जीते हैं। उनकी तकनीकी दक्षता, रचनात्मकता और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता ने उन्हें फ्रीस्टाइल स्कीइंग की दुनिया में अलग पहचान दिलाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वह आने वाले वर्षों में इस खेल की सबसे प्रभावशाली एथलीट्स में बनी रह सकती हैं।
एयलीन गू की कहानी केवल एक एथलीट की सफलता की कहानी नहीं है। यह वैश्विक नागरिकता, राष्ट्रवाद, आर्थिक हितों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के जटिल रिश्तों को भी उजागर करती है।








