‘कौन शंकराचार्य है, यह प्रशासन तय नहीं करेगा’- सदानंद सरस्वती का सरकार पर तीखा हमला

द्वारका पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने कहा कि शंकराचार्य की पहचान प्रशासन तय नहीं कर सकता। माघ मेले में संतों को रोकने की निंदा भी की।

द्वारका पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने कहा कि शंकराचार्य की पहचान प्रशासन नहीं तय कर सकता। उन्होंने माघ मेले में संतों को रोकने की निंदा की और धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप को गलत बताया।

Madhya Pradesh: बुधवार शाम खनेताधाम से लौटते समय द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती अल्प प्रवास पर ग्वालियर पहुंचे। उन्होंने रामबाग कॉलोनी स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने चरण पादुका पूजन कर शंकराचार्य का आशीर्वाद प्राप्त किया।

मीडिया से बातचीत में स्वामी सदानंद सरस्वती ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद और माघ मेले में हुई घटनाओं पर खुलकर अपनी बात रखी।

‘शंकराचार्य की परंपरा प्रशासन से नहीं चलती’

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर उठ रहे सवालों पर स्वामी सदानंद सरस्वती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह तय करना प्रशासन का काम नहीं है कि कौन शंकराचार्य है और कौन नहीं। शंकराचार्य की परंपरा गुरु-शिष्य परंपरा से चलती है, न कि सरकारी आदेशों से।

उन्होंने बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का श्रृंगेरी पीठ में विधिवत अभिषेक हुआ है, जिसके वे स्वयं साक्षी रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके गुरु ने केवल दो ब्रह्मचारियों को संन्यास दिया था-एक वे स्वयं और दूसरे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। ऐसे में उनकी वैधता पर सवाल उठाना धार्मिक परंपराओं में सीधा हस्तक्षेप है।

माघ मेले की घटना को बताया निंदनीय

स्वामी सदानंद सरस्वती ने माघ मेले के दौरान संतों और ब्राह्मण बालकों को स्नान से रोके जाने की घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि गंगा स्नान से किसी भी साधु-संत को रोकना गंभीर अपराध है और यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कार्य है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती। सत्ता के अहंकार में लिए गए फैसले समाज में निंदा का कारण बनते हैं। सरकारों का दायित्व धार्मिक परंपराओं को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उनका संरक्षण करना होना चाहिए।

राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बढ़ी चर्चा

शंकराचार्य के इस बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके बयान को धार्मिक स्वतंत्रता और परंपराओं के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

इस अवसर पर ग्वालियर की महापौर डॉ. शोभा सिकरवार, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र शर्मा, सूर्यकांत शर्मा, राहुल शर्मा, सौमित्र शर्मा, रजनीश शर्मा, विवेक शर्मा और पुनीत द्विवेदी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने शंकराचार्य का पूजन कर आशीर्वाद लिया।

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