दिल्ली शराब घोटाला मामले में राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया समेत सभी आरोपियों को बरी किया। फैसले के एक दिन बाद CBI ने हाई कोर्ट में इसे चुनौती देने का निर्णय लिया और सबूतों का पुनर्मूल्यांकन मांगा।
New Delhi: दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मामले में हाल ही में राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य 21 आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत ने CBI की चार्जशीट में गंभीर कमियों और आवश्यक सबूतों की कमी को देखते हुए इस कदम को उठाया। कोर्ट ने कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए प्रस्तुत मटीरियल एडमिनिस्ट्रेटिव निर्णयों की ओर इशारा करता है, न कि किसी क्रिमिनल साजिश का।
इस फैसले के तुरंत बाद CBI ने दिल्ली हाई कोर्ट में इसे चुनौती देने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, यह कदम अदालत द्वारा चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार करने और सभी आरोपियों को बरी करने के एक दिन बाद उठाया गया। CBI का कहना है कि उन्हें विश्वास है कि न्यायपालिका उच्च स्तर पर मामले की समीक्षा करेगी और आवश्यक सबूतों का पुनर्मूल्यांकन करेगी।
क्या थी दिल्ली एक्साइज पॉलिसी 2021-22
दिल्ली सरकार ने नवंबर 2021 में नई आबकारी नीति लागू की थी, जिसका उद्देश्य शराब बिक्री में निजीकरण और राजस्व वृद्धि करना था। इससे पहले दिल्ली में शराब की बिक्री सरकारी निगमों और निजी कंपनियों के बीच संतुलित रूप से होती थी और आबकारी विभाग को लगभग 4,500 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था। नई नीति के तहत सभी 272 नगरपालिका वार्डों में कम से कम दो शराब की दुकानें होनी थीं, और नीति का उद्देश्य चोरी रोकने के साथ राजस्व को दोगुना करना था।
CBI और ईडी ने आरोप लगाया कि नीति को लागू करते समय कुछ अधिकारियों और निजी व्यापारियों को अनुचित लाभ दिया गया। आरोप है कि लाइसेंस शुल्क माफ या कम किया गया और एल-1 लाइसेंस बढ़ाने के लिए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी नहीं ली गई। CBI का मानना है कि नीति लागू करने में भ्रष्टाचार हुआ और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।
जांच की शुरुआत और कोर्ट की लड़ाई
दिल्ली की उपराज्यपाल Vinai Kumar Saxena ने जुलाई 2022 में CBI से इस मामले की जांच की सिफारिश की थी। 17 अगस्त 2022 को CBI ने धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोप में FIR दर्ज की। इसके बाद कई गिरफ्तारियां और तलाशी अभियान हुए।

2023 में मनीष सिसोदिया को पूछताछ और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया। 2024 में अरविंद केजरीवाल को भी दिल्ली में उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत और बाद में CBI मामले में भी जमानत दी।
राउज़ एवेन्यू कोर्ट का फैसला
27 फरवरी 2026 को राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि CBI ने कोई ठोस सबूत नहीं पेश किए और केवल आरोपों के आधार पर मुकदमा नहीं चल सकता। विशेष न्यायाधीश ने चार्जशीट में पाई गई खामियों और सबूतों की कमी का हवाला देते हुए कहा कि इसे ज्यूडिशियल प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ सबूतों की कमी पर ध्यान देते हुए कहा कि गंभीर आरोपों को मटीरियल और दस्तावेजों से समर्थन देना आवश्यक है। बिना ठोस सबूत के किसी भी क्रिमिनल साजिश की पुष्टि नहीं हो सकती।
केजरीवाल और सिसोदिया की प्रतिक्रिया
अरविंद केजरीवाल ने अदालत के फैसले पर इमोशनल प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केस "आजाद भारत की सबसे बड़ी पॉलिटिकल साजिश" थी। उनका कहना था कि BJP ने इसे AAP को सत्ता से हटाने के लिए रचा। केजरीवाल ने यह भी कहा कि सत्ता के लिए किसी को देश और संविधान के साथ इस तरह नहीं खेलना चाहिए।
मनीष सिसोदिया ने भी कहा कि अदालत ने साबित कर दिया कि उनके खिलाफ कोई क्रिमिनल इरादा नहीं था। कोर्ट ने उनके पक्ष में कहा कि प्रस्तुत दस्तावेजों में एडमिनिस्ट्रेटिव निर्णयों और प्रक्रिया संबंधी पहलुओं को दिखाया गया है, न कि किसी गलत कार्रवाई को।
CBI की चुनौती: हाई कोर्ट में मामला
राउज़ एवेन्यू कोर्ट का फैसला आने के एक दिन बाद CBI ने दिल्ली हाई कोर्ट में इसे चुनौती देने का फैसला किया। सूत्रों के अनुसार, CBI का कहना है कि चार्जशीट में मौजूद सबूतों और दस्तावेजों का उच्च न्यायालय द्वारा पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
CBI का मानना है कि राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने चार्जशीट में पाई गई कमियों और सबूतों की कमी को देखते हुए मामले को खत्म कर दिया, जबकि उनका दावा है कि दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्य हैं जिन्हें अदालत ने ध्यान में नहीं लिया।











