केंद्र सरकार ने Praveen Sood का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। 1986 बैच के कर्नाटक कैडर के आईपीएस अधिकारी प्रवीण सूद अब 12 मई 2027 तक Central Bureau of Investigation के निदेशक पद पर बने रहेंगे।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक Praveen Sood का कार्यकाल एक वर्ष के लिए और बढ़ा दिया है। इस फैसले के बाद अब वह मई 2027 तक देश की प्रमुख जांच एजेंसी का नेतृत्व करते रहेंगे। सरकार की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर उनके कार्यकाल विस्तार को मंजूरी दी है। यह लगातार दूसरा अवसर है जब सूद को सेवा विस्तार दिया गया है।
एक साल और बढ़ा कार्यकाल
1986 बैच के कर्नाटक कैडर के आईपीएस अधिकारी Praveen Sood ने 25 मई 2023 को CBI निदेशक के रूप में कार्यभार संभाला था। उनका प्रारंभिक कार्यकाल दो वर्षों का था, जो मई 2025 में समाप्त होना था। इसके बाद उन्हें पहली बार एक वर्ष का विस्तार दिया गया था। अब नए आदेश के तहत उनका कार्यकाल 12 मई 2027 तक बढ़ा दिया गया है। केंद्रीय सरकार के अनुसार, यह निर्णय एजेंसी में प्रशासनिक निरंतरता और चल रही महत्वपूर्ण जांचों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
उच्च स्तरीय चयन समिति की बैठक
CBI निदेशक की नियुक्ति और कार्यकाल विस्तार को लेकर मंगलवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय चयन समिति की बैठक आयोजित की गई। इस समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi भी शामिल थे। बैठक प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित हुई और इसमें अगले CBI निदेशक की नियुक्ति सहित एजेंसी के नेतृत्व से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

राहुल गांधी ने जताई असहमति
बैठक के दौरान कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने चयन प्रक्रिया को लेकर असहमति जताई। उन्होंने एक औपचारिक “डिसेंट नोट” प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार CBI जैसी संस्थाओं का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग कर रही है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना बयान साझा करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चयन समिति में विपक्ष के नेता की भूमिका को प्रभावी तरीके से निभाने का अवसर नहीं दिया गया।
CBI की भूमिका पर राजनीतिक बहस
Central Bureau of Investigation (CBI) भारत की सबसे प्रमुख केंद्रीय जांच एजेंसियों में से एक है, जो भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराधों और विशेष आपराधिक मामलों की जांच करती है। हाल के वर्षों में एजेंसी की निष्पक्षता और स्वायत्तता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। विपक्षी दल कई बार आरोप लगा चुके हैं कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जाता है। वहीं केंद्र सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है और कहती है कि एजेंसियां कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से काम करती हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रवीण सूद को विस्तार देने का उद्देश्य एजेंसी के भीतर स्थिरता बनाए रखना और संवेदनशील मामलों की जांच में निरंतरता सुनिश्चित करना है। उनके नेतृत्व में CBI ने कई बड़े भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराध मामलों की जांच की है।










