केन्या के पश्चिमी हिस्से में स्थित दूरदराज का गांव चेपोरोर इन दिनों अचानक सुर्खियों में आ गया है। कुछ समय पहले तक जहां सिर्फ झाड़ियां और मवेशियों के चरने के मैदान नजर आते थे, वहीं पिछले कुछ हफ्तों में सोने की खोज को लेकर ऐसी होड़ मची कि हजारों लोग यहां पहुंच गए।
Kenya Gold Rush: पश्चिमी केन्या का चेपोरोर गांव इन दिनों अचानक सोने की तलाश करने वालों का केंद्र बन गया है। एक स्थानीय बकरी चरवाहे को सोना मिलने की खबर फैलने के बाद हजारों लोग यहां पहुंच गए हैं। हालांकि, प्रशासन के सामने अब भीड़ को संभालने, सुरक्षा, साफ पानी और बच्चों की पढ़ाई जैसी कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
पश्चिमी केन्या के दूरदराज इलाके में स्थित चेपोरोर गांव इन दिनों एक अप्रत्याशित ‘गोल्ड रश’ का गवाह बन रहा है। कुछ समय पहले तक जहां ग्रामीण इलाका मुख्य रूप से खेती और पशुपालन के लिए जाना जाता था, वहीं अब यहां बड़ी संख्या में लोग जमीन खोदकर सोने की तलाश कर रहे हैं। इस बदलाव की शुरुआत एक स्थानीय बकरी चरवाहे की किस्मत चमकने से हुई।
बकरी ढूंढते-ढूंढते मिला सोना
करीब 33 वर्षीय मानसे लोमाचार अपनी खोई हुई बकरी की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान वह नदी के किनारे कुछ महिलाओं के पास पहुंचे, जो रेत और मिट्टी छानकर सोने के कण तलाश रही थीं। लोमाचार ने भी उनके साथ सोना खोजने की कोशिश की और उन्हें करीब तीन ग्राम सोना मिल गया। उन्होंने इस सोने को स्थानीय बाजार में लगभग 36,000 केन्याई शिलिंग में बेच दिया। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 26 हजार रुपये के बराबर बताई गई।
एक ऐसे इलाके में जहां बड़ी आबादी सीमित आय और गरीबी से जूझ रही है, वहां यह रकम लोगों के लिए बड़ी उम्मीद बन गई। लोमाचार को मिले सोने की खबर तेजी से आसपास के इलाकों में फैल गई। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग चेपोरोर पहुंचने लगे।
कभी 10 हजार लोगों की भीड़ जुटी
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, सोने की तलाश शुरू होने के बाद गांव में एक समय करीब 10,000 लोग तक जमा हो गए थे। बाद में शुरुआती उत्साह कम होने और खुदाई का काम कठिन साबित होने के कारण यह संख्या घटकर लगभग 2,500 रह गई। यहां आने वाले लोगों में बड़ी संख्या किसानों और छोटे पशुपालकों की है। इनमें से कई लोग बेहतर आय की तलाश में यहां पहुंचे हैं। उनके लिए सोने की खोज सिर्फ रोमांच नहीं, बल्कि आर्थिक मुश्किलों से बाहर निकलने की उम्मीद भी है।
बच्चों की पढ़ाई का खर्च निकालने की उम्मीद

इस गोल्ड रश में शामिल कई लोगों का कहना है कि वे मिलने वाले पैसों से अपने परिवार की जरूरतें पूरी करना चाहते हैं। कुछ लोग बच्चों की स्कूल फीस जुटाने की उम्मीद में यहां पहुंचे हैं। 18 वर्षीय अबीगैल भी इसी उम्मीद के साथ खुदाई कर रही हैं। उन्होंने इससे पहले खनन का काम नहीं किया था, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि अगर सोना मिल गया तो वह अपनी और छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई का खर्च उठा सकेंगी।
चेपोरोर में अब रोजाना बड़ी संख्या में लोग कुदाल, फावड़े और दूसरे सामान्य उपकरणों के साथ जमीन खोदते नजर आते हैं। कुछ लोग गहरे गड्ढों में उतरकर चट्टानों को तोड़ते हैं, जबकि महिलाएं मिट्टी और रेत को पानी में छानकर सोने के छोटे कण तलाशती हैं। हालांकि हर व्यक्ति को सोना मिल रहा हो, ऐसा नहीं है। कई लोग घंटों मेहनत करने के बावजूद खाली हाथ लौट रहे हैं। इसके बावजूद सोना मिलने की उम्मीद लोगों को लगातार यहां रोके हुए है।
रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए
गोल्ड रश ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया है। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बाद इलाके में 200 से अधिक छोटी दुकानें खुलने की जानकारी सामने आई है। यहां पानी, भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों का सामान बेचने वाले दुकानदारों को भी नए ग्राहक मिल रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं पर दबाव तेजी से बढ़ गया है। साफ पानी की कमी, बिजली का अभाव, स्वच्छता और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रशासन के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, कुछ लोगों को सोना मिलने की खबरों ने भीड़ बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। छोटे स्तर पर सोने की बिक्री की पुष्टि हुई है और कुछ लोगों को कुछ सौ से लेकर करीब 78,000 केन्याई शिलिंग तक कीमत का सोना मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, जमीन के नीचे सोने का वास्तविक भंडार कितना है, इसका अभी कोई स्पष्ट अनुमान नहीं है।
भीड़ बढ़ने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी पैदा हुए हैं। प्रशासन ने स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं। स्कूल खुलने से पहले यह भी चिंता है कि बच्चे सोने की तलाश में अपनी पढ़ाई छोड़कर खनन गतिविधियों में शामिल न हो जाएं।












